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एमपी में 20 साल बाद बदलेगा बसों का सिस्टम: 25 सितंबर से नई सेवा, निजी ऑपरेटर चलाएंगे बसें; GPS-CCTV से निगरानी
Tue, 22 Sep 2026 07:34 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 22 Sep 2026 07:34 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में करीब 20 साल बाद यात्री परिवहन व्यवस्था को नए मॉडल के साथ शुरू करने की तैयारी है। 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होगी और मार्च तक करीब 1000 बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को बड़े स्तर पर बदलने की तैयारी है। 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होगी। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 351 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। खास बात यह है कि यह सिर्फ 351 बसों की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि सरकार ने आगे प्रदेश में करीब 15 हजार आधुनिक सार्वजनिक बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में करीब 1500 बसों का संचालन शुरू होने की जानकारी है। इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। यानी शुरुआत में शहरों के बीच और शहरों के भीतर दोनों तरह की कनेक्टिविटी पर फोकस रहेगा।
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सात शहरों से पहला नेटवर्क
पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को जोड़ा जा रहा है। जानकारीें के अनुसार अनुसार 351 बसों को 25 सितंबर को रवाना किया जाएगा। इसके बाद अनुबंध और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इंदौर में 50 इंटरसिटी, 40 इंट्रासिटी और 55 पीएम ई-बसों समेत 145 बसें बताई गई हैं। भोपाल में 23 इंटरसिटी, 38 इंट्रासिटी और 45 पीएम ई-बसों समेत 106, जबलपुर में 14 इंटरसिटी, 27 इंट्रासिटी और 26 पीएम ई-बसों समेत 67 बसों की जानकारी दी गई है। रीवा में 18, देवास में 23, कटनी में 3 और भिंड में 4 बसें बताई गई हैं। हालांकि आने वाले समय में निजी ऑपरेटर के साथ अनुबंध होने के साथ ही बसों की संख्या बढ़ भी सकती हैं।
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2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
सरकार का बड़ा लक्ष्य वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसें संचालित करने का है। योजना के तहत 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना है। इसके साथ प्रदेश में 180 से अधिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है। यानी योजना का फोकस सिर्फ बसें बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा परिवहन नेटवर्क तैयार करने पर है।
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बस में सीसीटीवी, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग
नई व्यवस्था में सुरक्षा और निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और रियल टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। यात्रियों को बस की स्थिति और संचालन से जुड़ी जानकारी देने के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है। बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगी। इसके लिए कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं, जहां से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर नजर रखी जाएगी।
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सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक बसों पर भी
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाली बसों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे सार्वजनिक परिवहन में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य है।
निजी ऑपरेटरों की होगी बड़ी भूमिका
इस व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी भी अहम होगी। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच PPP मॉडल के जरिए बस संचालन, डिपो और टर्मिनल जैसी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। इससे सरकार का फोकस सीधे बसें खरीदने के बजाय नेटवर्क, निगरानी और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने पर रहेगा। इस पूरी व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
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सात शहरों से पहला नेटवर्क
पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को जोड़ा जा रहा है। जानकारीें के अनुसार अनुसार 351 बसों को 25 सितंबर को रवाना किया जाएगा। इसके बाद अनुबंध और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इंदौर में 50 इंटरसिटी, 40 इंट्रासिटी और 55 पीएम ई-बसों समेत 145 बसें बताई गई हैं। भोपाल में 23 इंटरसिटी, 38 इंट्रासिटी और 45 पीएम ई-बसों समेत 106, जबलपुर में 14 इंटरसिटी, 27 इंट्रासिटी और 26 पीएम ई-बसों समेत 67 बसों की जानकारी दी गई है। रीवा में 18, देवास में 23, कटनी में 3 और भिंड में 4 बसें बताई गई हैं। हालांकि आने वाले समय में निजी ऑपरेटर के साथ अनुबंध होने के साथ ही बसों की संख्या बढ़ भी सकती हैं।
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2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
सरकार का बड़ा लक्ष्य वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसें संचालित करने का है। योजना के तहत 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना है। इसके साथ प्रदेश में 180 से अधिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है। यानी योजना का फोकस सिर्फ बसें बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा परिवहन नेटवर्क तैयार करने पर है।
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बस में सीसीटीवी, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग
नई व्यवस्था में सुरक्षा और निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और रियल टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। यात्रियों को बस की स्थिति और संचालन से जुड़ी जानकारी देने के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है। बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगी। इसके लिए कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं, जहां से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर नजर रखी जाएगी।
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सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक बसों पर भी
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाली बसों को बढ़ावा देने की योजना है। इससे सार्वजनिक परिवहन में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य है।
निजी ऑपरेटरों की होगी बड़ी भूमिका
इस व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी भी अहम होगी। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच PPP मॉडल के जरिए बस संचालन, डिपो और टर्मिनल जैसी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। इससे सरकार का फोकस सीधे बसें खरीदने के बजाय नेटवर्क, निगरानी और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने पर रहेगा। इस पूरी व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
