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मियां भोपाली के झोले-बतोले: शिवराज का बड़प्पन ओर दशमत की दरियादिली!

Sun, 09 Jul 2023 02:58 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sun, 09 Jul 2023 02:58 PM IST
सार

सीधी जिले के कुबरी बाजार गांव में एक आदिवासी दशमत रावत पे बिरहमन लड़के पिरवेश शुक्ला द्वारा पिशाब करने के मामले में सीएम शिवराज ने भारी डेमेज कंटरोल करा फिर भी जो मेसिज जाना वो चला गया। क्योंकि पिशाब करने वाला बिरहमन होने के साथ साथ बीजेपी का कारकरता भी हेगा।

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MIya Bhopali Jhole Batole Shivraj's nobility and Dashmat's generosity!, Column Ajay Bokil
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, एमपी में शिवराज सरकार की हालत ‘मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की’ वाली होती जा रई हे। पार्टी विधानसभा चुनाव जीतने की खातिर आदिवासियों ओर दलितों को पटाने की हर मुमकिन कोशिश कर रई हे, मगर एक के बाद एक हालात इस कदर बिगड़ते जा रिए हें के कोई समझ नई आ रिया के क्या करें। सीधी जिले के कुबरी बाजार गांव में एक आदिवासी दशमत रावत पे बिरहमन लड़के पिरवेश शुक्ला द्वारा पिशाब करने के मामले में सीएम शिवराज ने भारी डेमेज कंटरोल करा फिर भी जो मेसिज जाना वो चला गया। क्योंकि पिशाब करने वाला बिरहमन होने के साथ साथ बीजेपी का कारकरता भी हेगा। इस वाकये से पूरी आदिवासी बिरादरी भड़की हुई हे। सरकार फायर बिरगेड लेके घूम रई हे पर ये आग चुनाव तक ठंडी होगी, इसके इमकान कम ई हें।
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मियां, सत्ता पे काबिज बीजेपी इस बार आदिवासियों पे खास तोर पे फोकस कर री हे। क्योंकि उसे मालूम हे के पिरदेश में 21 फीसदी आबादी आदिवासियों की हे ओर राज्य में 47 सीटें इस समुदाय के वास्ते रिजर्व हे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा इनमें से महज एक तिहाई सीटें जीत पाई थी। ज्यादातर आदिवासी सीटें कांगरेस की झोली में चली गईं। मेसिज गया के आदिवासी वोटर वापस कांगरेस की तरफ चला गया हे। अगर बीजेपी इन में से आधी सीटें जीत जाती तो चौथी बार फिर हुकूमत में आ जाती। उधर कांगरेस ने शुरू से ई आदिवासियों पे ध्यान दिया हुआ हे। पिछले साल राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा खास तोर पे पिरदेश के उन इलाकों से निकाली गई, जिधर आदिवासी आबादी ज्यादा हे। कांगरेस का अभी भी मानना हे के आदिवासी वोटर आज भी उसी के साथ हे।
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इधर, दो साल से बीजेपी आदिवासियों को रिझाने की खासी मशक्कत कर रई हे। भील स्वतंत्रता सेनानी टंट्या मामा और गोंड रानी दुर्गावती की मूर्तियां लगवाई जा रई हें। भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम गोंड रानी कमलापति के नाम पे कर दिया हे। सरकार छिंदवाड़ा में यूनिवर्सिटी का नाम गोंड राजा शंकरशाह के नाम पे हो गया हे। आदिवासियों के लिए तमाम तरह की योजनाएं लांच हुई हें। गरीबी ओर कुपोषण से जूझता आदिवासी खामोशी से यह सब देख रिया हे। सरकार भी खुश थी कि सब उम्दा चल रिया हे। इस दफे आधी से ज्यादा आदिवासी सीटें बीजेपी के खाते में आएंगी।
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मगर सीधी और बाकी जगह पे हो रही आदिवासियों पे ज्यादती की वजह से सरकार की कोशिशों पे पानी फिरने का अंदेशा लगने लगा हे। एक आदमी दूसरे आदमी पे सरेआम मूत दे, इससे घटिया कुछ हो नहीं सकता। जिस पे पिशाब करी गई, वो एक आदिवासी हेगा। साल भर पुराना ये वीडियो जिसने भी वायरल करा, उसने कई सियासी शिकार कर डाले। भौंचक शिवराज सरकार हरकत में आई। उस पीड़ित आदिवासी को नए कपड़े पेरा के भोपाल बुलवाया गया। सीएम ने उसके चरण पखारे। पूरे पिरदेश की ओर से माफी मांगी। लगा कि जो हुआ, सब माफ। भूल चूक लेनी देनी। पर जो कसक थी, सो मन में ई रे गई। बड़ा दिल तो उस आदिवासी ने दिखाया, जिसने बदनाम ओर बेइज्जत होने के बाद भी ये बोला के उस पिशाब करने वाले बिहरमन को माफ कर दो। जो हुआ, सो हुआ। कित्ती बड़ी बात। आदिवासी दशमत रावत के बयान से अगर कुछ राहत मिल जाए तो ठीक है, वरना उम्मीदों पे पानी की लहरें तो उछल ई रई हें।


-बतोलेबाज

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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