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मियां भोपाली के झोले-बतोले: अब महाकाल लोक में भिरष्टाचार!

Sat, 22 Oct 2022 06:28 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 22 Oct 2022 06:28 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उज्जैन में श्री महाकाल लोक का लोकार्पण किया। दस दिन भी पूरे नहीं हुए कि भ्रष्टाचार के आरोप लगने शुरू हो गए। लोकायुक्त ने केस दर्ज कर लिया है।

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Miya Bhopali Jhole Batole Regular Column in Bhopali Slang Regional dialect column Amar Ujala Ajay Bokil
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, उज्जेन के महाकाल लोक का लोकारपण हुए एक पखवाड़ा भी नई बीता हेगा कि इस पूरे काम में भारी भिरष्टाचार के आरोप लगने शुरू हो गए हें। कांगरेस  विधायक महेश परमार ने लोकायुक्त में शिकायत करी थी के महाकाल लोक कोरीडोर के काम में भारी भिरष्टाचार हुआ हेगा। लोकायुक्त पुलिस ने जिले के 3 आईएएस अफसरों समेत महाकाल लोक बनाने वाले स्मार्ट सिटी के 15 अफसरों को नोटिस थमा दिए हें। इससे सरकार सकते में हे। क्योंकि शिवराज सरकार ने महाकाल लोक को अपनी बड़ी कामयाबी बता के पेश करा था ओर पिरधानमंतरी नरेन्द्र मोदी के हाथों इसका लोकारपण करा के भारी वाहवाली लूटी थी। उधर कांगरेस पार्टी ने महाकाल लोक के काम में भारी करप्शन का आरोप लगाया हे तो बीजेपी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया हे। 

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मियां, जो इल्जाम लगाए गए हें, वो काफी हद तक संगीन हें। शिकायत करने वाले महेश परमार का केना हे के अफसरों ने अपने ओहदे का इस्तेमाल ठेकेदारों को गलत तरीके से फायदा पोंचाने वास्ते करा। जिस ठेकेदार को फायदा पोंचाया गया, वो गुजराती हेगा। वेसे भी आजकल मधपिरदेश में ज्यादातर ठेके उन्हीं को जा रिए हें। आरोप हे के ठेकेदार को करोड़ों का फायदा पोंचाने वास्ते एसओआर ( शिड्यूल ऑफ रेट्स) की दरें और आइटम को बदलने का आरोप लगाया गया है। परमार का केना हेगा के ठेकेदार को 1 करोड़ का फायदा पोंचा ओर सरकारी खजाने को भारी घाटा हुआ। बताया जा रिया हे के पेली नजर में लोकायुक्त ने तमाम इल्जामात को सही पाया अोर नोटिस जारी कर दिए। जिन अफसरों  को नोटिस मिले हेंगे, उनमें तीन आईएएस उज्जैन कलेक्टर और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष सिंह, उज्जैन स्मार्ट सिटी के तत्कालीन कार्यपालक निदेशक क्षितिज सिंघल और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता शामिल हैं। इनमें से अंशुल गुप्ता को तो सरकार ने मोदी के दोरे के चार दिन पेले हटा दिया था। 
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यूं महाकाल लोक में गड़बड़ी के आरोप तो कई हेंगे। मसलन जारी टेंडर के मुताबिक वहां जीआई शीट लगानी थी, जिस पर 22 लाख का खर्च होना था। ठेकेदार ने इसकी सस्ती  पोली कार्बोनेट की शीट लगा दी। बाजार में ये 808 रू. वर्गमीटर मिलती हे, सरकारी रेट इससे तीन गुना यानी 3105 रुपए वर्गमीटर लगाया गया। इस तरह ठेकेदार को 91 लाख का फायदा मिला। ओर भी कई आयटम बदल दिए गए। सोलर कंस्ट्रक्शन में ड्राइंग डिजाइन ही बदल डाली। महाकाल लोक में लगी मूर्तियां पिलास्टिक फाइबर की बताई जाती हें, जबकि हिंदू धरम में मूर्ति अमूमन पत्थर या अष्टधातु की रेती हे। इस बारे में उज्जैन स्मार्ट सिटी सीईओ आशीष पाठक का केना हे के रेट की या आइटम की घटबढ़ जमीनी जरूरत के मुताबिक हे। इसमें कोई गड़बड़ी नई हुई हे।
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महाकाल लोक में गड़बड़ी हुई हेगी या नई, ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन इसने 2016 के सिंहस्थ में भिरष्टाचार की याद जरूर दिला दी। उस वक्त कांगरेस ने आरोप लगाया था कि सिंहस्थ के कामो में करोड़ो का भिरष्टाचार हुआ हे। सो रू. का मटका 750 रू. में, नाश्ते की खाली पिलेट फी 1625 रू. में, चाय का एक थर्मस 14 हजार रू. में खरीदा  गया। यहा तक के टेंम्परेरी टायलेट बनाने में 156 करोड़ रू. का घपला हुआ। पिछली कमलनाथ सरकार ने इन घोटालों  की जांच के वास्ते तीन मंतरियों की एक कमेटी भी बनाई थी। कमेटी जांच शुरू करती, उसके पेलेई महाकाल की तिरछी निगाह कमलनाथ सरकार पे पड़ी ओर सरकार गिर गई। सिंहस्थ में गड़बड़ी की जांच पे भी पर्दा पड़ गया। शिवराज सरकार नई मानती के उसमे किसी किस्म का भिरष्टाचार हुआ। 

खां, चाहे सिंहस्थ हो या महाकाल लोक, ये सब धरम खाते के काम हें। सरकार मानती हे के इनमें भिरष्टाचार खोजना अधरम का काम हे। कांगरेस इसी में लगी रेती हे। अरे, मियां पेसा आया, खरच हो गया। एक जेब से दूसरी जेब में चला गया। दान धरम का कोई हिसाब नई रखा जाता ओर न ही पूछा जाता हे। ऐसा सोचना भी पाप हे। जनता का पेसा हे, जनता के काम में लगा। सो सिंहस्थ में गड़बड़ी की कोई जांच नई हुई। इससे कोई को क्या फरक पड़ा। इंसान को भगवान ने बनाया हे ओर भिरष्टाचार भी इंसान न ई करता हेगा। यानी राम की चिडि़या, राम का खेत। चुग ले चिडि़या भर-भर पेट। धरम की आड़ में कुछ की अंटी हरी हुई तो इसमें किसी का पेट क्यों दुख रिया हेगा? रहा सवाल लोकायुक्त का तो उसने नोटिस देने का दम जरूर दिखा दिया हे, आगे लोकायुक्त वाले भी कितने दिन कुर्सी पे टिकेंगे, ये खुद भगवान देख लेंगे। 


- बतोलेबाज
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।  

 

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