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Astronomical Event: दो साल बाद कल पृथ्वी के सबसे पास रहेगा मंगल, बड़ा और अधिक चमकीला दिखेगा मार्स
Wed, 07 Dec 2022 05:06 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 07 Dec 2022 05:06 PM IST
सार
दो चंद्रमा वाला मंगल ग्रह दो साल के इंतजार के बाद 8 दिसम्बर 2022 को पृथ्वी के नजदीक आ रहा है। लगभग 8 करोड़ किमी से कुछ अधिक दूर रहते हुए मंगल, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक कतार में होंगे।
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सारिका ने बताया कि यह खगोलीय घटना मार्स एट अपोजिशन कहलाती है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुरुवार रात को खास खगोलिय घटना होने जा रही है। दो चंद्रमा वाला मंगल ग्रह दो साल के इंतजार के बाद 8 दिसम्बर 2022 को पृथ्वी के नजदीक आ रहा है। लगभग 8 करोड़ किमी से कुछ अधिक दूर रहते हुए मंगल, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक कतार में होंगे। पृथ्वी , मंगल और सूर्य के बीच होगी। विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि यह खगोलीय घटना मार्स एट अपोजिशन कहलाती है। इस समय मंगल अपेक्षाकृत बड़ा और अधिक चमकीला दिखेगा।
सारिका ने बताया शाम लगभग 6 बजे जब पश्चिम में सूर्य अस्त हो चुका होगा, तब पूर्व में लाल ग्रह मंगल उदित होगा। इसके साथ पूर्णिमा का चंद्रमा भी होगा। रात भर आकाश में रहते हुए सुबह लगभग 6 बजे पश्चिम दिशा में मंगल अस्त होगा। इसे खाली आंखों से ही देखा जा सकेगा। सारिका ने बताया कि मंगल के दो चंद्रमा फोबोस और डीमोस हैं। ये पृथ्वी के चंद्रमा के समान सुंदर नहीं दिखते। मंगल का वातावरण मुख्य रूप से कार्बन-डाई-ऑक्साईड से बना है जिसमें आर्गन और नाइट्रोजन की अल्प मात्रा है। यह वातावरण बहुत पतला है।
मंगल की रेगिस्तानी दुनिया को ढंकने वाली धूल में आयरन ऑक्साइड के कारण यह लाल है। मंगल पर रोवर्स ने जो नमूना लिया उसके आधार पर इसमें लाल, भूरा और नारंगी रंग हैं। पास आने पर इसकी दूरी 5 करोड़ 38 लाख किमी रह सकती है तो दूर जाने पर लगभग 40 करोड़ किमी तक दूर चले जाता है इस कारण इसके आकार में सबसे अधिक अंतर देखा जा सकता है। मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है। यहां धूल भरी ठंडी रेगिस्तानी दुनिया है। चंद्रमा का एक साल पृथ्वी के 687 दिनों के बराबर और एक दिन 24 घंटे 37 मिनट का होता है। इसके पहले ऐसी घटना 13 अक्टूबर 2020 को हुई थी। अब दो साल बाद फिर ऐसा देखा जाएगा। इसके बाद यह खगोलीय घटना 16 जनवरी 2025 को होगी।
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सारिका ने बताया शाम लगभग 6 बजे जब पश्चिम में सूर्य अस्त हो चुका होगा, तब पूर्व में लाल ग्रह मंगल उदित होगा। इसके साथ पूर्णिमा का चंद्रमा भी होगा। रात भर आकाश में रहते हुए सुबह लगभग 6 बजे पश्चिम दिशा में मंगल अस्त होगा। इसे खाली आंखों से ही देखा जा सकेगा। सारिका ने बताया कि मंगल के दो चंद्रमा फोबोस और डीमोस हैं। ये पृथ्वी के चंद्रमा के समान सुंदर नहीं दिखते। मंगल का वातावरण मुख्य रूप से कार्बन-डाई-ऑक्साईड से बना है जिसमें आर्गन और नाइट्रोजन की अल्प मात्रा है। यह वातावरण बहुत पतला है।
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मंगल की रेगिस्तानी दुनिया को ढंकने वाली धूल में आयरन ऑक्साइड के कारण यह लाल है। मंगल पर रोवर्स ने जो नमूना लिया उसके आधार पर इसमें लाल, भूरा और नारंगी रंग हैं। पास आने पर इसकी दूरी 5 करोड़ 38 लाख किमी रह सकती है तो दूर जाने पर लगभग 40 करोड़ किमी तक दूर चले जाता है इस कारण इसके आकार में सबसे अधिक अंतर देखा जा सकता है। मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है। यहां धूल भरी ठंडी रेगिस्तानी दुनिया है। चंद्रमा का एक साल पृथ्वी के 687 दिनों के बराबर और एक दिन 24 घंटे 37 मिनट का होता है। इसके पहले ऐसी घटना 13 अक्टूबर 2020 को हुई थी। अब दो साल बाद फिर ऐसा देखा जाएगा। इसके बाद यह खगोलीय घटना 16 जनवरी 2025 को होगी।
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