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मध्य प्रदेश: सरकार पर कमलनाथ का निशाना, कहा- निर्णय बेतुका, किसान विरोधी है मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार
Thu, 03 Feb 2022 05:19 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 03 Feb 2022 05:19 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों से सिंचाई के लिए शुल्क लेने पर सरकार को घेरा है। उन्होंने निर्णय को बेतुका बताते हुए प्रदेश सरकार को किसान विरोधी करार दिया है। इस संबंध में ट्वीट किए हैं।
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कमलनाथ ने शनिवार को शिवराज सिंह सरकार पर झूठी घोषणाओं का आरोप लगाया।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किसानों से सिंचाई के लिए शुल्क लेने पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार को घेरा है। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार में किसानों को खेती के लिए खाद नहीं, बीज नहीं, बिजली नहीं, पानी नहीं, फसल ख़राब होने पर मुआवज़ा नहीं, फसल बीमा नहीं और अब सिंचाई परियोजनाओं से यानी नहरों से पानी का उपयोग करने पर किसानो को 500 रुपये प्रति एकड़ का शुल्क देना होगा।
पूर्व सीएम ने कहा कि जो खुद को किसान पुत्र बताते हैं। जो खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात करते हैं, जो किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कर सत्ता में आए थे, वह आज किसानों पर इस तरह का भार डाल कर उनकी कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। खेती की लागत को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। किसान को पानी, बिजली, खाद, बीज उपलब्ध कराना सरकार का कर्तव्य व दायित्व है, लेकिन अब सरकार अपने इस कर्तव्य व दायित्व से भी पीछे हट रही है। अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी शुल्क लेकर दिया जाएगा।
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कमलनाथ ने कहा कि इसके पीछे कारण सिंचाई परियोजना के रखरखाव व दुरुस्तीकरण का दिया जा रहा है, क्या अब सरकार सिंचाई परियोजना के रखरखाव व दुरुस्तीकरण का खर्च भी किसानो से ही लेगी? मध्य प्रदेश में पहले से ही किसानों की फसलें ओलावृष्टि और अति वर्षा से खराब हो चुकी हैं। उसे अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, फसल बीमा तक नही मिला है, मिला है तो सिर्फ़ भाषण। आज किसान कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। वह आत्महत्या को मजबूर है। उसकी खेती घाटे का धंधा बन चुकी है। उसकी लागत बढ़ती जा रही है। उसे समय पर खाद-बीज नहीं मिल रहा है। उसके लिए उसे कई-कई माह तक सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है और अब एक और बेतुका निर्णय लेकर सरकार ने बता दिया है कि उसकी सोच पूरी तरह से किसान विरोधी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस निर्णय का विरोध करती है और हम सरकार से मांग करते हैं कि इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। हम किसानों के साथ खड़े हैं और इस बेतुके व किसान विरोधी निर्णय का सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध करेंगे।
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पूर्व सीएम ने कहा कि जो खुद को किसान पुत्र बताते हैं। जो खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात करते हैं, जो किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कर सत्ता में आए थे, वह आज किसानों पर इस तरह का भार डाल कर उनकी कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। खेती की लागत को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। किसान को पानी, बिजली, खाद, बीज उपलब्ध कराना सरकार का कर्तव्य व दायित्व है, लेकिन अब सरकार अपने इस कर्तव्य व दायित्व से भी पीछे हट रही है। अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी शुल्क लेकर दिया जाएगा।
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कमलनाथ ने कहा कि इसके पीछे कारण सिंचाई परियोजना के रखरखाव व दुरुस्तीकरण का दिया जा रहा है, क्या अब सरकार सिंचाई परियोजना के रखरखाव व दुरुस्तीकरण का खर्च भी किसानो से ही लेगी? मध्य प्रदेश में पहले से ही किसानों की फसलें ओलावृष्टि और अति वर्षा से खराब हो चुकी हैं। उसे अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, फसल बीमा तक नही मिला है, मिला है तो सिर्फ़ भाषण। आज किसान कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। वह आत्महत्या को मजबूर है। उसकी खेती घाटे का धंधा बन चुकी है। उसकी लागत बढ़ती जा रही है। उसे समय पर खाद-बीज नहीं मिल रहा है। उसके लिए उसे कई-कई माह तक सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है और अब एक और बेतुका निर्णय लेकर सरकार ने बता दिया है कि उसकी सोच पूरी तरह से किसान विरोधी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस निर्णय का विरोध करती है और हम सरकार से मांग करते हैं कि इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। हम किसानों के साथ खड़े हैं और इस बेतुके व किसान विरोधी निर्णय का सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध करेंगे।
