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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Jhole-batole: Madarsas to be an election issue during MP assembly elections

मियां भोपाली के झोले-बतोले: मध्यप्रदेश में अब मदरसे भी होंगे चुनावी मुद्दा !

Sat, 24 Dec 2022 11:05 AM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 24 Dec 2022 11:05 AM IST
सार

मध्यप्रदेश में मदरसे भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने संकेत दिए हैं कि इन मदरसों में पढ़ाए जा रहे विषयों की जांच होगी। 

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Jhole-batole: Madarsas to be an election issue during MP assembly elections
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपना मधपिरदेश भी यूपी की राह पे चल रिया हे। सूबे में चल रिए तमाम मदरसे अब पिरदेश की शिवराज सरकार के निशाने पे हेंगे। हंगामा तब हुआ, जब ये खबर नमूदार हुई के विदिशा के एक कस्बे में हिंदू बच्चों का दाखिला हो गया हे ओर मदरसे इस्लाम की तालीम देने वाली ‘तालीमुल इस्लाम’ किताब पढ़ाई जा रई हेगी। इसके बाद सरकार के कान खड़े हुए के मदरसों में ये हिंदू बच्चे कहां से आ गए? इससे भी ज्यादा हेरानी इस बात पे हुई के ये मदरसा भी एक हिंदू शख्स ई चला रिया हे। इसके बाद पिरदेश के गिरह मंतरी नरोत्तम मिश्रा एक्टिव हुए ओर ऐलान कर दिया कि पिरदेश के तमाम मदरसों की जांच होगी के उनमें क्या पढ़ाया जा रिया हे।

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मियां, इस गड़बड़झाले का खुलासा हाल में पिरदेश के बाल आयोग के एक औचक निरीक्षण में खुलासा हुआ के विदिशा के तोपपुरा के मदरसा मरियम  में कुछ हिंदू बच्चों को 'तालीमुल इस्लाम' किताब पढ़ाई जा रई हे। जब सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारी से जांच कराई तो उजागर हुआ के इस मदरसे के 41 में से 27 बच्चे हिंदू हेंगे। इनमें भी 11 आदिवासी बच्चों का दाखिला फर्जी पाया गया। इन बच्चो के मां बाप का केना हे के ये बच्चे तो कभी मदरसा गए ई नई। उधर मदरसा संचालक, जो स्वयं एक हिंदू है, ने इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी अपने एक हिंदू शिक्षक पर डाल दी। इसके बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐलान किया कि अब तक मिली शिकायतों के आधार पर राज्य में संचालित सभी मदरसो की पाठ्य सामग्री की जांच कराई जाएगी। इसके लिए सम्बन्धित जिला अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके बाद पिरदेश की संसकिरती एवं धरमस्व मंतरी उषा ठाकुर ने बोला के अवैध मदरसों को बंद कर दिया जाएगा। इसके पहले भाजपा नेता जयभान सिंह पवैया ने मांग की थी कि प्रदेश में होना चाहिए। उन्होंने बोला के मदरसों में किसी  आपत्तिजनक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करा जाएगा। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तो यहां तक मांग कर दी कि प्रदेश में अवैध रूप से चल रहे मदरसों को तोड़ा जाए। यहां उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले मप्र के पड़ोसी सूबे यूपी में भी मदरसों का सर्वे हुआ था, जिसमें पाया गया था कि वहां साढ़े 7 हजार गैर मान्यता प्राप्त मदरसे चल रिए हें।
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खां, जहां तक एमपी की हेगी तो यहां चलने वाले मदरसों को मप्र राज्य मदरसा बोर्ड से मान्यता लेनी होती है। इन मदरसों में राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा तैयार कोर्स ई पढ़ाया जाता हे। अब जांच में आगे क्या निकलता हे  यह तो आगे की बात है, फिलहाल मदरसे और उनमें होने वाली पढ़ाई सियासी मुद्दा बन गई है। गिरह मंतरी के ऐलान के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सवाल िकया जब मदरसों की जांच की बात हो रही है तो सरस्वती शिशु मंदिरों के पाठ्यक्रमो की जांच भी होनी चाहिए। क्योंकि ये आरएसएस की आइडियालॉजी वाले स्कूल हैं। मसूद ने कहा कि जांच से यह तो पता चलेगा कि तीन साल से मदरसों को फंड नहीं मिल रिया। रहा सवाल मदरसों में पाठ्यक्रम की जांच का तो मप्र मदरसा बोर्ड में कुल 2689 मदरसे रजिस्टर्ड हैं। इनमें मप्र राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा तैयार कोर्स ई पढ़ाया जाता है। रजिस्टर्ड मदरसों में से एक शिक्षक वाले मदरसे को 72 हजार, दो शिक्षकों वाले मदरसे को एक लाख 44 हजार तथा तीन शिक्षकों वाले मदरसे को दो लाख 16 हजार रुपये का अनुदान बोर्ड द्वारा दिया जाता है। यानी जो भी गड़बड़ी है वो ज्यादातर अनरजिस्टर्ड मदरसों में है अोर सरकारी अनुदान हासिल करने के वास्ते हे। धार्मिक ध्रुवीकरण के मद्देनजर बीजेपी इस मुद्दे को अगले चुनाव तक जिंदा रखेगी, यह तय है। 
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-बतोलेबाज

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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