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Bhopal News: दंपतियों के लिए बड़ी राहत, संतान प्राप्ति से जुड़ी जांच, इलाज और आईवीएफ की सुविधा अब एम्स में

Mon, 24 Aug 2026 07:18 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 24 Aug 2026 07:18 PM IST
सार

संतान प्राप्ति में परेशानी का सामना कर रहे दंपतियों के लिए एम्स भोपाल में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर शुरू किया गया है। यहां महिला और पुरुष दोनों की जांच, परामर्श, आईवीएफ, अंडाणु-शुक्राणु व भ्रूण संरक्षण सहित उन्नत उपचार सुविधाएं मिलेंगी। केंद्र में सुरक्षित, वैज्ञानिक, किफायती और मरीज-केंद्रित उपचार पर जोर रहेगा।

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Bhopal News: Big relief for couples—facilities for fertility-related tests, treatment, and IVF are now availab
एम्स में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर का शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संतान प्राप्ति में परेशानी का सामना कर रहे दंपतियों के लिए एम्स भोपाल ने बड़ी सुविधा शुरू की है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर का सोमवार को शुभारंभ किया गया। यहां महिला और पुरुष दोनों में संतान प्राप्ति से जुड़ी समस्याओं की जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। केंद्र का उद्घाटन कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने किया। इस दौरान अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी, उप निदेशक (प्रशासन) संदेश जैन और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता सहित वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे।
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आईवीएफ से पहले समस्या की होगी जांच
केंद्र में मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार तय किया जाएगा। महिलाओं में अंडाणु बनने और अंडोत्सर्जन की निगरानी अल्ट्रासाउंड और हार्मोन जांच के जरिए की जाएगी। जरूरत पड़ने पर दवाओं से अंडोत्सर्जन की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाएगा। उपयुक्त मामलों में गर्भाशय के अंदर शुक्राणु पहुंचाने की प्रक्रिया की जाएगी। जिन मरीजों को अधिक उन्नत उपचार की जरूरत होगी, उनके लिए आईवीएफ की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
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अंडाणु-शुक्राणु से लेकर भ्रूण तक की सुविधा
आईवीएफ प्रक्रिया के तहत अंडाशय को दवाओं के जरिए तैयार करने, अंडाणु निकालने, प्रयोगशाला में अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन कराने तथा भ्रूण तैयार करने की सुविधा होगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाएगा। विशेष मामलों में शुक्राणु को सीधे अंडाणु में पहुंचाने की उन्नत प्रक्रिया भी की जाएगी। भ्रूण को नियंत्रित वातावरण वाली प्रयोगशाला में विकसित करने के साथ आवश्यक जांच की जाएगी।
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भ्रूण, अंडाणु और शुक्राणु भी सुरक्षित रख सकेंगे
चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार भ्रूण, अंडाणु और शुक्राणु के संरक्षण की सुविधा भी केंद्र में उपलब्ध होगी। पहले से संरक्षित भ्रूण को बाद में गर्भाशय में स्थानांतरित करने की सुविधा भी दी जाएगी।

पुरुषों की जांच और उपचार भी होगा
केंद्र में केवल महिलाओं का ही नहीं, बल्कि पुरुषों में संतान प्राप्ति से जुड़ी समस्याओं का भी मूल्यांकन और उपचार किया जाएगा। शुक्राणु की जांच, उसकी उपचार के लिए तैयारी और जरूरत के अनुसार अन्य विशेषज्ञों की मदद से उपचार की व्यवस्था रहेगी।

सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर
एम्स भोपाल के अनुसार उपचार के दौरान मरीज की सुरक्षा, गोपनीयता और सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी। उपचार मरीज की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तय होगा और संबंधित नियमों, चिकित्सकीय मानकों तथा नैतिक सिद्धांतों का पालन किया जाएगा।


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उपचार के साथ प्रशिक्षण और शोध को भी बढ़ावा
एम्स भोपाल का यह केंद्र केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सकीय प्रशिक्षण, शोध और उपचार की गुणवत्ता को बढ़ावा देने की योजना है। केंद्र को भविष्य में सुरक्षित, वैज्ञानिक, नैतिक, किफायती और मरीज-केंद्रित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

 
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