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मियां भोपाली के झोले-बतोले: ठंडी चाय पे गरम सियासत...

Sat, 16 Jul 2022 12:29 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 16 Jul 2022 12:29 PM IST
सार

नगरीय निकाय चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री को ठंडी चाय परोसना एक अधिकारी को महंगा पड़ गया।  

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Jhole Batole Column By Ajay Bokil officer removed for serving Cold Tea to CM
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, चाय पीने से ताजगी आने की तो सुनी थी, मगर एमपी में तो ‘ठंडी चाय’ भी सियासी उबाल मार गई। सीएम दोरे के वक्त ठंडी चाय परोसने पे एक एसडीएम ने फूड इनसपेक्टर को नोटिस थमा दिया। इसके बाद ‘ऊपर’ से हवा टाइट हुई तो जिला कलेक्टर ने  24 घंटे में नोटिस रद्द कर दिया। इस पे कांग्रेस ने ये केह के मजे लिए के मियां,  ‘मामा’ को चाय वाले इत्ती नफरत क्यों हे? कांगरेस के इस एक तीर में दो निशाने थे, सो बीजेपी की तरफ से कोई जवाब नई आया। खां, चाय इस मुल्क में सो साल से पी जा रई हे। अंगरेजों ने इसे हिंदुस्तान में मकबूल बनाने वास्ते खूब खटकरम करे। आज आलम ये हे कि हिंदुस्तानियों के चाय कुछ ऐसी मुंह लगी हे के छूटना तो दूर, इसकी बिना पे लोग पिरधानमंतरी तक बन रिए हें। 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेन्दर मोदी ने खुले आम बोला था कि उन्होंने बचपन में रेलवे स्टेशन पे चाय बेची हे। उसीका जलवा हे के वो आज मुल्क के इतने बड़े तखत पर जलवा अफरोज हें। अब तो चाय के बाद आटो रिकशा चलाने वाले भी गाल फुलाए घूम रिए हें। महाराष्ट्रा में एक जमाने में ऑटो चलाने वाले एकनाथ शिंदे मुखमंतरी बन गिए हें। 
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बहरहाल चाय का मियां, वो जलवा हेगा कि ठंडी-गरम पे भी नोटिस मिल रिया हेगा। मामला मधपिरदेश के खजुराहो का हे। सीएम शिवराजसिंह चोहान को रीवा जाते वक्त कुछ देर खजुराहो रूकना था। सो, अफसरों ने हुजूर के लिए चाय नाश्ते का इंतजाम करा हुआ था। सीएम जल्दी में थे, उन्होंने तो चाय की चुस्की भी नई ली, मगर इसके पेले अफसरों ने चाय टेस्ट करी तो वो ठंडी निकली। उफ्..इत्ता बड़ा गुनाह? लिहाजा राजनगर एसडीएम ने चाय पानी के इंतजाम में लगे फूड इनिसपेक्टर  को  नोटिस थमा दिया। उस आला अफसर ने तो खुद की खाल बचाने एसा करा था। ये खबर मीडिया में छपी तो बवाल मचा। मेसिज गया के ठंडी चाय सीएम की तोहीन हे। इसके बाद ‘भोपाल’ से हुकम आया कि मामला खतम करो। सो, कलेक्टर ने एसडीएम का नोटिस खारिज कर दिया। पूरे मामले के मजे खिलाफत में बेठी कांगरेस ने लिए। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने तंज कसा के ‘मामा’ को ‘चाय वाले’ से इत्ती नफरत क्यों हे? 
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यूं तो खां, एमपी में चाय ओर नेताओं के कई किस्से हेंगे। बुजुर्ग बताते हें के भोपाल में तो सत्तर साल पेले भी ठंडी ओर गरम चाय को लेके दिलचस्प वाकया हुआ था। उस जमाने में भोपाल अलग स्टेट थी। उसके सीएम कांग्रेस के डाॅ. शंकर दयाल शर्मा हुआ करते थे। तब विधानसभा का पेला चुनाव चल्लिया था। भोपाल के करीब बेरसिया जाते वक्त लोगों ने रास्ते में डाॅ. साहब को रोक लिया ओर उनसे चाय पीने का इसरार करने लगे। डाॅ. शरमा बोले कि खां, अभी जल्दी में हूं। चुनाव पिरचार पे जाना हे। लोटते वक्त चाय पी लूंगा। गांव वाले भी गजब के थे। रात तक डाॅ. साहब का इंतजार करते रिए। आधी रात हो गई। तब कहीं डाॅक्टर साहब उसी रस्ते लोट पाए। गांव वालों ने फिर अरज करी कि हुजूर अब तो चाय पी लो, जबई से चूल्हे पे धरी हे। डाॅ. साहब बोले कि खां, अगर जबई से चूल्हे पे धरी हे तो वो चाय जरूर पीएंगे। उबल-उबल के काली पड़ चुकी चाय डाॅ. साहब ने बड़ी खुशी से पी। 
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मियां, चाय में बड़ा दम हे। वो कई दफा दुश्मनी को दोस्ती में बदल देती हे। चाय की नाट बुरी रेती हेगी। चाय के चाहने वालों ने एक चोपाई तक बना डाली थी के ‘चित्रकूट के घाट पे भई लोगन की भीर, चाय-चाय चिल्ला रिए राजा रंक फकीर।‘ अब सवाल ये रिया के कलेक्टर ने ‘ऊपर’ के इशारे पर एसडीएम का नोटिस क्यों रद्द करा ? इसका जवाब ये हेगा के पिरशासनिक नोटिस का असर लोग सियासी हल्के में तलाशने लगे थे। डर था कि लोग चाय की बिना पे पीएम ओर सीएम को न भिड़ा दें। सो, ठंडी चाय का मामला तुरत-फुरत ठंडे बस्ते में डलवा दिया। चाय का क्या हे, मोका लगा तो  अगली बार गरम करके पी लेंगे।  


-बतोलेबाज
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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