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MP: कथक अश्वमेध का भव्य समापन, गुजरात की अनाहिता वानारे बनीं विजेता; देशभर की युवा प्रतिभाओं ने दी नृत्यांजलि
Sat, 19 Apr 2025 05:25 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 19 Apr 2025 05:25 PM IST
सार
MP: कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रायगढ़ घराने की प्रतिष्ठित नृत्यांगना गुरु अल्पना बाजपेई रहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्राचीन काल में कलाकारों को राजाश्रय प्राप्त होता था, उसी गरिमा से आज निर्झर कला संस्थान युवा प्रतिभाओं को मंच दे रहा है।
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कथक अश्वमेध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शास्त्रीय नृत्य परंपरा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले 'कथक अश्वमेध' के दूसरे संस्करण का भव्य समापन भोपाल के शहीद भवन सभागार में हुआ। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महायज्ञ था, जिसमें देशभर के युवा कलाकारों ने अपनी नृत्याहुतियां अर्पित कीं। निर्झर कला संस्थान, नागपुर द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से आए युवा प्रतिभागियों ने मंच पर अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुति दी। किसी ने लय और गति से दर्शकों को रोमांचित किया, तो किसी ने भावों की गहराई से मन मोह लिया।
प्रतियोगिता में बड़ौदा (गुजरात) की अनाहिता वानारे ने शानदार प्रदर्शन कर प्रथम स्थान हासिल किया। मनस्वी भोजने और रायपुर के शिवांश कुर्म संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि नागपुर के गनेश बोरकुटे को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इन कलाकारों की प्रस्तुतियों में परंपरा और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। समापन समारोह में शहीद भवन खचाखच भरा रहा। अतिथियों और निर्णायकों ने विजेताओं को ट्रॉफी, नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। पूरा माहौल एक सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रायगढ़ घराने की प्रतिष्ठित नृत्यांगना गुरु अल्पना बाजपेई रहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्राचीन काल में कलाकारों को राजाश्रय प्राप्त होता था, उसी गरिमा से आज निर्झर कला संस्थान युवा प्रतिभाओं को मंच दे रहा है। विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना नीलाक्षी खंडकर सक्सेना, कथक के 'ठाठ सम्राट' सुभाष चंद्र, और प्रख्यात तबला वादक व कथक के तालगुरु पंडित मनु राज पचौरी उपस्थित रहे।
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पढ़ें: नलखेड़ा क्षेत्र में आठ किसानों पर नरवाई जलाने की कार्रवाई, 25 हजार रुपये का लगा जुर्माना; जानें
सुभाष चंद्र ने कहा कि आज के छात्र भाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे मंच मिल रहे हैं। ये आयोजन अब समय की मांग बन चुके हैं। पंडित मनु राज पचौरी ने 'कथक अश्वमेध' को एक शक्तिशाली सांस्कृतिक ब्रांड बताया और कहा कि यह मंच उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। आयोजन के अंत में संस्थान के संस्थापक समीर नाफड़े ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ कला को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से वे उड़ान भर सकें। दर्शकों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जीवंत सांस्कृतिक पर्व में बदल दिया जो यह साबित करता है कि कथक न केवल जीवित है, बल्कि गौरव और गरिमा के साथ आगे बढ़ रहा है।
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प्रतियोगिता में बड़ौदा (गुजरात) की अनाहिता वानारे ने शानदार प्रदर्शन कर प्रथम स्थान हासिल किया। मनस्वी भोजने और रायपुर के शिवांश कुर्म संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि नागपुर के गनेश बोरकुटे को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इन कलाकारों की प्रस्तुतियों में परंपरा और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। समापन समारोह में शहीद भवन खचाखच भरा रहा। अतिथियों और निर्णायकों ने विजेताओं को ट्रॉफी, नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। पूरा माहौल एक सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया।
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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रायगढ़ घराने की प्रतिष्ठित नृत्यांगना गुरु अल्पना बाजपेई रहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्राचीन काल में कलाकारों को राजाश्रय प्राप्त होता था, उसी गरिमा से आज निर्झर कला संस्थान युवा प्रतिभाओं को मंच दे रहा है। विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना नीलाक्षी खंडकर सक्सेना, कथक के 'ठाठ सम्राट' सुभाष चंद्र, और प्रख्यात तबला वादक व कथक के तालगुरु पंडित मनु राज पचौरी उपस्थित रहे।
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सुभाष चंद्र ने कहा कि आज के छात्र भाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे मंच मिल रहे हैं। ये आयोजन अब समय की मांग बन चुके हैं। पंडित मनु राज पचौरी ने 'कथक अश्वमेध' को एक शक्तिशाली सांस्कृतिक ब्रांड बताया और कहा कि यह मंच उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहा है। आयोजन के अंत में संस्थान के संस्थापक समीर नाफड़े ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ कला को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से वे उड़ान भर सकें। दर्शकों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जीवंत सांस्कृतिक पर्व में बदल दिया जो यह साबित करता है कि कथक न केवल जीवित है, बल्कि गौरव और गरिमा के साथ आगे बढ़ रहा है।
