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किचन सामान की आड़ में फर्नीचर की खरीदी! 18 करोड़ के सिंगल ऑर्डर की शर्त से “चहेते” को फायदा पहुंचाने का खेल

Sun, 25 Jan 2026 04:28 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 25 Jan 2026 04:28 PM IST
सार

मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का किचन इक्यूपमेंट का टेंडर जारी होते ही सवाल खड़े हो गए हैं। टेंडर किचन के सामान का निकाला गया, लेकिन अधिकतर फर्नीचर का सामान मांगा गया है। हद तो यह है कि कुल 25 करोड़ के टेंडर के लिए 18 करोड़ के सिंगल ऑर्डर और 80 करोड़ के टर्नओवर की शर्त रखी गई है। 

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Furniture purchased under the guise of kitchen supplies! A single order worth 18 crore rupees is used to benef
मप्र पाठ्यपुस्तक निगम का कार्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा स्कूलों के रसोई घरों में लगने वाले उपकरणों की सप्लाई के लिए जारी किया गया टेंडर सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि किचन के सामान के नाम पर फर्नीचर और अन्य महंगे उपकरणों का टेंडर निकालकर अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की पूरी रणनीति तैयार की है। 23 जनवरी 2026 को जारी इस टेंडर में 116 स्कूलों में रसोईघर के उपकरण और 170 स्कूलों में किचन के बर्तनों की सप्लाई की जानी है। कुल टेंडर राशि ईएमडी के अनुसार करीब 25 करोड़ रुपये बताई जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसकी पात्रता के लिए निविदाकर्ता फर्म के 18 करोड़ रुपये के सिंगल ऑर्डर और 80 करोड़ के टर्नओवर की शर्त रखी गई है।
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मध्यम और छोटी फर्म ठेके से बाहर 
इस शर्त के कारण प्रदेश की अधिकांश मध्यम और लघु श्रेणी की तथा स्थानीय फर्में सीधे तौर पर बाहर हो गई हैं। यह कदम केंद्र और राज्य सरकार की छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति के बिलकुल विपरीत है। वहीं, जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी शर्त केवल किसी खास फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए रखी जा सकती है। 
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किचन सामान का अनुभव, मांगा फर्नीचर!
टेंडर की शर्तों में ठेका लेने की इच्छुक फर्म से अनुभव रसोई घर के उपकरणों की सप्लाई का मांगा गया है, जबकि सूची में शामिल सामानों को देखें तो उसमें वर्किंग टेबल, एग्जॉस्ट सिस्टम, वर्टिकल फ्रीज, वॉल माउंट सेफ, वाटर कूलर जैसे कई ऐसे आइटम शामिल हैं, जो सीधे तौर पर फर्नीचर या व्यावसायिक उपकरण की श्रेणी में आते हैं। सवाल उठ रहा है कि जब टेंडर किचन के सामान का निकाला गया है, तो इसमें फर्नीचर क्यों शामिल किया गया? 

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भंडार क्रय नियमों का भी उल्लंघन 
जानकारी के अनुसार भंडार क्रय नियमों में इस तरह के कार्य के लिए रेट कॉन्ट्रेक्ट का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद पाठ्यपुस्तक निगम ने रेट कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर टेंडर जारी कर दिया। यह मध्य प्रदेश सरकार के भंडार क्रय नियमों का खुला उल्लंघन है। 

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इस नियम का भी पालन नहीं
इतना ही नहीं, इतने बड़े टेंडर के लिए जहां प्री-बिड के बाद कम से कम 30 दिन का समय दिया जाना चाहिए, वहां केवल 10 फरवरी तक निविदा जमा करने की समय-सीमा तय की गई है। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि टेंडर पहले से तय फर्म को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

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हम टेंडरिंग अथॉरिटी, एमडी से बात कर लीजिए
टेंडर और उसकी पात्रता शर्तों के बारे में जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के जनरल मैनेजर संजीव त्यागी से बात की तो उन्होंने कहा कि हम टेंडरिंग अथॉरिटी हैं। सामान की खरीदी लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के माध्यम से होनी है। जहां तक रसोई घर की  जगह फर्नीचर मंगाने का सवाल है तो उसमें हमने सभी आइटम डाले हैं। यह सब कमेटी तय करती है। इसमें डीपीआई के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। वैसे भी यदि किसी को कोई आपत्ति है तो अभी प्री-बिड में बता सकता है। जहां तक सिंगल ऑर्डर 80 करोड़ की शर्त है, तो यह एक से डेढ़ महीने में सामान सप्लाई होना है। यह बिना ओईएम के नहीं होगा। आप एक बार हमारे एमडी से बात कर लीजिए। 

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हमारे पास पहली बार यह टेंडर आया 
उधर, मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी विनय निगम ने कहा कि हमारे पास पहली बार यह टेंडर आया है। पहले लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ही इसको जारी करता था। उनकी जरूरत के अनुसार ही हमने उसको पब्लिश किया है। अभी प्री-बिड में लोग लोग अपनी बात रखेंगे। टेक्निकल कमेटी के सामने भी कई चीजें आएंगी। उनको नियमों के अनुसार देखा जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

 
 
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