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लैंड पूलिंग एक्ट पर किसानों का प्रदर्शन: सीएम बोले-संवाद से ही निकलेगा हल, सरकार सबके हित में काम कर रही है

Mon, 15 Sep 2025 02:58 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Mon, 15 Sep 2025 02:58 PM IST
सार

Simhastha 2028 सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन में किसानों की जमीनों के स्थायी अधिग्रहण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया के प्रश्न पर कहा कि संवाद से ही हल निकलेगा। सरकार सबके हित में काम कर रही हैं। 

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Farmers' protest against Land Pooling Act tomorrow: CM said- Solution will come only through dialogue, governm
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसानों के 16 सितंबर के प्रदर्शन से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा भाव है कि सबसे संवाद करके सबके हित की बात सोचकर चले। महाकुम्भ में सुरक्षा व्यवस्था,बेहतर प्रबंधन के साथ स्थायी संरचना के काम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार काम कर रही है। सरकार सभी किसानों को साथ लेकर चल रही। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि विकास के क्रम को बराबर बनाए रखें, विकास के रास्ते पर सभी साथ चलते है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि लगातार हमारे विकास के कामों को सबका समर्थन मिलता हैं उसी भाव से हम चल रहे है।  
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उज्जैन में कल 500 टैक्टरों के साथ प्रदर्शन 
बता दें सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन में किसानों की जमीनों के स्थायी अधिग्रहण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने प्रदेशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारी प्रधानमंत्री के नाम अलग-अलग जिलों में कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपेंगे। मंगलवार यानी 16 सितंबर को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन होगा। किसान संघ की ओर से करीब 500 से ज्यादा ट्रैक्टरों की रैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा भी शामिल होंगे। मिश्रा यहां आंदोलन की आगे की रणनीति और चरणबद्ध कार्यक्रम का एलान कर सकते हैं।
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17 गावों की जमीन पर स्थायी अधिग्रहण किया जा रहा 
किसानों का कहना है कि सिंहस्थ क्षेत्र के लगभग 17 गांवों की जमीनों का स्थायी अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। वे चाहते हैं कि सरकार लैंड पूलिंग एक्ट पर पुनर्विचार करे और उनकी सहमति के बिना जमीन न ली जाए।

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पीएम के नाम किसानों की प्रमुख मांगें
- खेती में लगने वाले बीज, खाद, दवाइयों और यंत्रों से जीएसटी पूरी तरह हटाया जाए।
- आयात–निर्यात नीति किसानों के हित में बने, फसल तैयार होने पर आयात न किया जाए।
- कृषि यंत्र, बीज और दवाइयों पर जीएसटी की दर न्यूनतम रखी जाए।
- देश में जीएम बीजों (जीन परिवर्तित बीज) को किसी भी स्थिति में अनुमति न दी जाए।
- कपास पर हटाया गया आयात शुल्क दोबारा लागू किया जाए।
- जमीन अधिग्रहण केवल राष्ट्रीय महत्व और विकास योजनाओं के लिए हो, पूरे देश में एक समान कानून बने।
- किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हर जिले में नोडल अधिकारी और हेल्पलाइन नंबर की व्यवस्था की जाए।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और कृषि लोन प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और ऑनलाइन हो।
- बैंक अधिकारियों द्वारा अनावश्यक परेशानियां देने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- जैसे मुद्रा लोन तुरंत मिलता है, वैसे ही किसानों को भी तुरंत कृषि लोन मिले।
- खेती में लगने वाले डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
- हर ग्राम पंचायत में वर्षा मापक यंत्र लगाया जाए।
- प्रत्येक जिले में कृषि कॉलेज खोले जाएं और बच्चों को छोटी कक्षाओं से ही कृषि की पढ़ाई कराई जाए।
- सभी फसलों की खरीद पूरे साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाए।
- किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर10,000 प्रति हेक्टेयर किया जाए।
- जैविक खेती करने वालों को भी खाद सब्सिडी जितना प्रोत्साहन दिया जाए।
- फसल बीमा योजना में सैटेलाइट सर्वे की जगह खेत में जाकर नुकसान का आकलन (नेत्रांकन) किया जाए।
- किसानों को 5 लाख तक का कृषि ऋण (KCC) उपलब्ध कराया जाए।


 
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