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Cough Syrup: कफ सिरप में 486 गुना अधिक जहर,किडनी फेल व ब्रेन सूजन से बच्चों की मौत,तमिलनाडु की जांच में खुलासा
Wed, 08 Oct 2025 10:06 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 08 Oct 2025 10:06 PM IST
सार
तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में सामने आया है कि कफ सिरप को बनाने में जिस केमिकल का इस्तेमाल किया गया, वह फार्मास्यूटिकल उपयोग के योग्य ही नहीं था। इसके अलावा उसमें मौजूद जहरीले रसायनों की मात्रा तय सीमा से 486 गुना ज्यादा पाई गई।
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खांसी सिरप (सांकेतिक)
- फोटो : संवाद
विस्तार
मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से अब तक 20 से ज्यादा मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा। छिंदवाड़ा, बैतूल, पांढुर्णा और नागपुर से लगातार मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दवा बनाने वाली कंपनी ने बिना किसी परीक्षण के बेहद घटिया स्तर का रासायनिक पदार्थ इस्तेमाल किया था। यह वही सिरप है, जिसे पीने के बाद बच्चों की किडनी फेल और ब्रेन में सूजन आई, और उनकी मौत हो गई। तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में सामने आया है कि कफ सिरप को बनाने में जिस केमिकल का इस्तेमाल किया गया, वह फार्मास्यूटिकल उपयोग के योग्य ही नहीं था। इसके अलावा उसमें मौजूद जहरीले रसायनों की मात्रा तय सीमा से 486 गुना ज्यादा पाई गई।
बिना बिल और टेस्ट, खरीदा गया 100 किलो केमिकल
श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी के मालिक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने 50-50 किलो के दो बैग, यानी कुल 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था। यह खरीदी बिना किसी बिल या रिकॉर्ड के की गई। न तो इसे रजिस्टर में दर्ज किया गया, न ही उसकी गुणवत्ता जांची गई। जांच अधिकारियों को बताया गया कि भुगतान कभी कैश, तो कभी G-Pay के जरिए किया गया। यह केमिकल मार्च 2025 में चेन्नई की एक कंपनी सनराइज बायोटेक से खरीदा गया था। यह स्पष्ट रूप से नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड था, यानी दवा बनाने के लिए अनुपयुक्त। इसके बावजूद न कोई लैब टेस्ट किया गया, न ही इसके विषाक्त तत्वों की जांच कराई गई।
जहर की मौजूदगी 486 गुना ज्यादा पाई गई
लैब रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे बेहद जहरीले तत्व मौजूद थे, और इनकी मात्रा मानक सीमा से 486 गुना अधिक थी। एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “यह मात्रा न सिर्फ एक छोटे बच्चे के लिए बल्कि हाथी जैसे बड़े जानवर की भी किडनी और मस्तिष्क को नष्ट करने में सक्षम है।
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यह भी पढ़ें-नेता प्रतिपक्ष का बड़ा आरोप, बच्चों की मौत के आंकड़े छुपा रही सरकार,बच्चों को बेहतर इलाज की मांग
दस्तावेज छिपाने का भी प्रयास
जांच टीम जब निरीक्षण के लिए कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर पहुंची तो वहां प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं मिला। इससे संदेह गहराया कि कंपनी ने साक्ष्य मिटाने के लिए केमिकल को जल्दबाजी में नष्ट कर दिया। अधिकारियों का मानना है कि जानबूझकर दस्तावेजों को छिपाने का प्रयास किया गया। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल अथॉरिटी ने कहा है कि यह जांच जनता की सुरक्षा से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर प्रक्रिया है, क्योंकि इस तरह के केमिकल से बनी दवाएं बच्चों ही नहीं, बड़ों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें-छिंदवाड़ा दौरे पर आ सकते हैं राहुल गांधी, कफ सिरप से बच्चों की मौत पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
SR-13 बैच की 589 बॉटलें मिलीं
जांच के दौरान श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के गोदाम से SR-13 बैच नंबर वाली 60 एमएल की 589 बॉटलें बरामद की गईं। इन्हें छिंदवाड़ा भेजा जाना था। इसी बैच की दवा पीने के बाद कई बच्चों की किडनी फेल हो गई और उन्हें ब्रेन स्वेलिंग (सूजन) की समस्या हुई। सिरप का निर्माण मई 2025 में किया गया था और इसकी एक्सपायरी अप्रैल 2027 है।
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बिना बिल और टेस्ट, खरीदा गया 100 किलो केमिकल
श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी के मालिक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने 50-50 किलो के दो बैग, यानी कुल 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था। यह खरीदी बिना किसी बिल या रिकॉर्ड के की गई। न तो इसे रजिस्टर में दर्ज किया गया, न ही उसकी गुणवत्ता जांची गई। जांच अधिकारियों को बताया गया कि भुगतान कभी कैश, तो कभी G-Pay के जरिए किया गया। यह केमिकल मार्च 2025 में चेन्नई की एक कंपनी सनराइज बायोटेक से खरीदा गया था। यह स्पष्ट रूप से नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड था, यानी दवा बनाने के लिए अनुपयुक्त। इसके बावजूद न कोई लैब टेस्ट किया गया, न ही इसके विषाक्त तत्वों की जांच कराई गई।
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जहर की मौजूदगी 486 गुना ज्यादा पाई गई
लैब रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे बेहद जहरीले तत्व मौजूद थे, और इनकी मात्रा मानक सीमा से 486 गुना अधिक थी। एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “यह मात्रा न सिर्फ एक छोटे बच्चे के लिए बल्कि हाथी जैसे बड़े जानवर की भी किडनी और मस्तिष्क को नष्ट करने में सक्षम है।
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दस्तावेज छिपाने का भी प्रयास
जांच टीम जब निरीक्षण के लिए कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पर पहुंची तो वहां प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं मिला। इससे संदेह गहराया कि कंपनी ने साक्ष्य मिटाने के लिए केमिकल को जल्दबाजी में नष्ट कर दिया। अधिकारियों का मानना है कि जानबूझकर दस्तावेजों को छिपाने का प्रयास किया गया। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल अथॉरिटी ने कहा है कि यह जांच जनता की सुरक्षा से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर प्रक्रिया है, क्योंकि इस तरह के केमिकल से बनी दवाएं बच्चों ही नहीं, बड़ों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
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SR-13 बैच की 589 बॉटलें मिलीं
जांच के दौरान श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के गोदाम से SR-13 बैच नंबर वाली 60 एमएल की 589 बॉटलें बरामद की गईं। इन्हें छिंदवाड़ा भेजा जाना था। इसी बैच की दवा पीने के बाद कई बच्चों की किडनी फेल हो गई और उन्हें ब्रेन स्वेलिंग (सूजन) की समस्या हुई। सिरप का निर्माण मई 2025 में किया गया था और इसकी एक्सपायरी अप्रैल 2027 है।
