फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Cm Shivraj singh chouhan announced to enact a law for life imprisonment against stone pelters

मध्यप्रदेश में अब पत्थरबाजों की खैर नहीं, जानें नए कानून में क्या होंगे सख्त प्रावधान

Sat, 09 Jan 2021 05:29 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 09 Jan 2021 05:29 PM IST
सार

  • पत्थरबाज ने किसी का घर, दुकान, गाड़ी तोड़ी या जलाई तो उसी से होगी वसूली, 
  • संपत्ति नीलाम की जाएगी, क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए सरकार खुद लड़ेगी केस 
  • पैसे चुकाने पर देरी हुई तो लगेगा ब्याज, क्रिमिनल कोर्ट में होगी सुनवाई

विज्ञापन
Cm Shivraj singh chouhan announced to enact a law for life imprisonment against stone pelters
शिवराज सिंह चौहान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मध्यप्रदेश में पत्थरबाजों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। इस कानून के तहत सरकारी संपत्ति के साथ प्रदर्शनकारी, दंगाई या पत्थरबाज यदि किसी निजी व्यक्ति के घर, दुकान, गाड़ी या अन्य किसी वस्तु को भी नुकसान पहुंचाते हैं तो इसकी भरपाई उन्हीं से होगी।

विज्ञापन


ऐसा नहीं करने वाले लोगों के खिलाफ राज्य सरकार खुद अदालत में लड़ाई लड़कर पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति दिलवाएगी। इसके साथ ही दंगाइयों और प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले या किसी उग्र आंदोलन को हवा देने वालों से भी नुकसान की वसूली की जाएगी। गृह विभाग ने पत्थरबाजों के खिलाफ कानून का प्रारंभिक ड्राफ्ट शुक्रवार को तैयार कर लिया। अगले सप्ताह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे अंतिम रूप दे सकते हैं। इसके बाद ड्राफ्ट मंजूरी के लिए कैबिनेट में जाएगा।
विज्ञापन


नया कानून क्यों... पुराने में न पत्थरबाजी का जिक्र, न जवाबदेही
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने विधि विभाग के प्रमुख सचिव और आईजी सीआईडी के साथ शुक्रवार को बैठक की। इस दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में बने पत्थरबाजी कानून का परीक्षण किया गया। जम्मू-कश्मीर के एक्ट पर भी बात हुई, लेकिन वह मप्र के हिसाब से कारगर नहीं था, इसलिए उत्तर प्रदेश के कानून के प्रमुख प्रावधान लेकर मध्यप्रदेश अपना एक्ट बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अभी एक अधिनियम प्रीवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी 1984 है, जिसमें पांच साल की सजा का प्रावधान है। इसके साथ भारतीय दंड संहिता में भी बलवी, दंगा आदि के बारे में जिक्र है, लेकिन पत्थरबाजी का उल्लेख नहीं है। साथ ही सिविल लाइबिलिटी और रिकवरी भी तय नहीं है। 

हर जिले में क्लेम ट्रिब्यूनल बनेगा...
पीड़ित व्यक्तियों को नुकसान की भरपाई के लिए हर जिले में दावा अधिकरण बनेगा। इसमें एडिशनल कलेक्टर रैंक का अधिकारी होगा। उसे दावा निर्धारण करने का अधिकार होगा।  इसे बाद में कोर्ट में चैलेंज भी किया जा सकेगा।

हड़ताल, दंगा, बंद, हिंसात्मक प्रदर्शन और पत्थर बाजी करने वाले एक्ट के दायरे में आएंगे।सरकारी के साथ निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को सजा होगी। क्षति पहुंचाई गई संपत्ति और वस्तु की भरपाई आरोपियों से ही वसूली के जरिए की जाएगी। नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति ने राशि नहीं दी तो उसकी संपत्ति की नीलामी से पैसा लिया जाएगा।


असेसर की नियुक्त होगी जो इन मामलों में जज या मजिस्ट्रेट को सलाह देने के साथ आरोपी द्वारा किए गए नुकसान का आकलन भी करेगा।यदि प्रदर्शनकारी एक से अधिक हैं तो क्षतिपूर्ति का पैसा चुकाने की जिम्मेदारी समान रूप से सभी पर आएगी। पैसा देने में देरी की गई तो ब्याज भी अधिरोपित होगा।ऐसे मामलों की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं, क्रिमिनल कोर्ट में होगी।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed