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Bhopal: एम्स में शुरू होगा कैंसर अनुसंधान केंद्र, 5 दिवसीय ईएमइंडिया-24 के समापन में पहुंचे राज्यपाल मंगूभाई

Sun, 11 Aug 2024 06:25 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 11 Aug 2024 06:25 PM IST
सार

राजधानी भोपाल स्थित एम्स में जल्द ही कैंसर अनुसंधान केंद्र शुरू किया जाएगा। एम्स में आयोजित 20वें अखिल भारतीय आपातकालीन चिकित्सा सम्मेलन (ईएमइंडिया-24) का रविवार को समापन हुआ। 


 

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Cancer research center to be started in AIIMS, Governor Mangubhai arrived at the closing ceremony of 5-day EMI
एम्स भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स भोपाल में आयोजित 20वें अखिल भारतीय आपातकालीन चिकित्सा सम्मेलन (ईएमइंडिया-24) का रविवार 11 अगस्त को भव्य समापन हुआ। पांच दिन चले इस सम्मेलन के अंतिम दिन एक बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर कोर्स का उद्घाटन मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने किया। इस अवसर पर सांसद आलोक शर्मा भी मौजूद रहे। राज्यपाल, मंगू भाई पटेल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का एक ऐसा क्षेत्र है,जो हर पल चुनौती पूर्ण होता है,चाहे वह दुर्घटनाएं हो प्राकृतिक आपदाएं हो या फिर अन्य आपातकालीन स्थितियां। इन सभी में त्वरित और सटीक चिकित्सा सेवा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। इस क्षेत्र में नवीनतम तकनीक और प्रोटोकॉल का उपयोग करके हम कई जीवन बचा सकते हैं और मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ अजय सिंह के नेतृत्व में एम्स भोपाल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि अन्य प्रदेश के लोगों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
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कैंसर अनुसंधान केंद्र से मिलेगा बेहतर इलाज
भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में दुर्घटना कभी भी घट सकती है। ऐसे में बेसिक लाइफ सपोर्ट की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है और इस प्रयास के लिए एम्स भोपाल को बहुत बहुत बधाई। एम्स के निदेशक डॉ अजय सिंह का समर्पण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए उनकी काम करने की भावना निश्चित ही सराहनीय है। श्री शर्मा ने कहा कि उन्होंने एम्स भोपाल में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर को एम्स भोपाल में मर्ज करने के लिए प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को दिया है और आशा करते हैं कि जल्द ही इस पर काम होगा। इसके अलावा एम्स भोपाल में एक कैंसर अनुसंधान केंद्र भी शुरू किया जाए जिससे लोगों का बेहतर इलाज किया जा सकेगा।
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देश विदेश से 750 स ज्यादा प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा 
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि इस ईएमइंडिया-24 सम्मलेन में 750 से भी ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जिसमें न केवल देश से बल्कि विदेश से भी विशेषज्ञों ने भाग लिया। राज्यपाल महोदय का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आपके सहयोग और मार्गदर्शन से एम्स भोपाल आगे बढ़ रहा है। प्रो. सिंह ने वन स्टेट वन हेल्थ पॉलिसी की चर्चा करते हुए कहा कि इसके लागू होने से मध्य प्रदेश, स्वस्थ प्रदेश बनकर देश में पहला ऐसा राज्य बनेगा जो वन स्टेट वन हेल्थ की पॉलिसी को लागू करेगा। आने वाले दिनों में 150 बिस्तरों का ट्रॉमा और क्रिटिकल केयर यूनिट बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले 2 सालों में एम्स में मरीजों का भरोसा काफी बढ़ा है, जिसका परिणाम है कि यहां की ओपीडी में हर रोज 5600 से भी ज्यादा मरीज इलाज करवाने आते हैं।
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एम्स भोपाल के अध्यक्ष डॉ सुनील मलिक ने कहा कि इंसान के जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता। सही समय पर बेसिक लाइफ सपोर्ट देकर इंसान के जीवन को बचाया जा सकता है। यह जरूरी है कि हर व्यक्ति बीएलएस में पारंगत हो और इसके लिए एक जन जागरण अभियान की आवश्यकता है।


ढाई सौ लोगों को सिखाएंगे लाइफ सपोर्ट और सीपीआर कोर्स
ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉक्टर यूनुस ने सर्टिफाइड बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर कोर्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें ढाई सौ से भी अधिक लोगों को जीवन रक्षक तरीकों को सिखाया जाएगा और यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी बनती है। इन जीवन रक्षक बातों को सीख कर लोग समुदाय में जाकर और लोगों को भी सिखा सकेंगे। सुबह साढ़े सात बजे भोपाल बाइसिकल राइडर्स ग्रुप के सहयोग से एक साइकिल रैली का भी आयोजन किया गया। इंडसैम के सीईओ डॉ. सागर सी. गलवणकर ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। डॉक्टर सागर ने कहा कि हमें अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए इस तरह की गतिविधियां करते रहना चाहिए। इससे न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि लोगों में एक जागरूकता भी आती है। रैली में लगभग 300 साइकिलिस्ट ने हिस्सा लिया। 14 किलोमीटर लंबी इस साइकिल रैली के द्वारा लोगों को इंजरी से बचने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही आपातकालीन स्थिति में मरीज की किस प्रकार से सहायता करें ताकि उसका जीवन बचाया जा सके। इसके अलावा दिनभर इमरजेंसी मेडिसिन से संबंधित विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिसमें 8 मेडिकल कॉलेज के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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