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एमपी में 9 साल बाद कैंपस में चुनावी हलचल: ABVP को डीयू की जीत से जोश, राहुल के इंदौर दौरे से NSUI भी सक्रिय
Mon, 21 Sep 2026 07:05 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:05 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव की वापसी की संभावना के बीच एबीवीपी और एनएसयूआई ने तैयारियां तेज कर दी हैं। डीयू में एबीवीपी की तीन पदों पर जीत और इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद छात्र राजनीति की गतिविधियां बढ़ी हैं। अब चुनाव की तारीख और प्रक्रिया के आधिकारिक ऐलान का इंतजार है।
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छात्र संघ चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब नौ साल से थमी छात्र राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश और सरकार की ओर से सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने के प्रावधान के बाद अब छात्र संगठनों ने कैंपस में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि अभी चुनाव की तारीख और मतदान की पूरी प्रक्रिया को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन एबीवीपी और एनएसयूआई ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2017 के बाद से नहीं हुए हैं। 3 अगस्त को जबलपुर हाईकोर्ट में सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान बताया था। इसके बाद अदालत ने प्रदेश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। जरूरत पड़ने पर चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासनिक सहयोग लेने की व्यवस्था भी आदेश में रखी गई है।
चुनाव की तारीख साफ नहीं, संगठनों ने कैंपस पकड़ना शुरू किया
सरकार की ओर से सितंबर का प्रावधान सामने आने के बावजूद अभी तक चुनाव की तारीख, मतदान का तरीका और छात्रसंघ गठन की पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट आदेश का इंतजार है। इसी बीच छात्र संगठन नए विद्यार्थियों तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं। दोनो संगठन नए विद्यार्थियों के बीच सदस्यता अभियान और संपर्क बढ़ाया जा रहा है। एबीवीपी की गतिविधियां भी तेज हुई हैं। कांग्रेस ने भी पहले ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए 13 चुनाव प्रभारी नियुक्त किए हैं, जिन्हें कैंपस और छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
डीयू चुनाव परिणाम से एबीवीपी में बढ़ा उत्साह
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के हालिया परिणामों ने मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों की गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है। 2026 के डूसू चुनाव में एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव समेत चार में से तीन केंद्रीय पद जीते। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे। एनएसयूआई को केंद्रीय पैनल में कोई पद नहीं मिला। एमपी में छात्रसंघ चुनाव की संभावनाओं के बीच एबीवीपी के लिए यह परिणाम अपने संगठनात्मक अभियान को लेकर उत्साह बढ़ाने वाला घटनाक्रम है। वहीं एनएसयूआई के लिए प्रदेश में होने वाले संभावित चुनावों से पहले संगठन और कैंपस स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत करने की चुनौती है।
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राहुल के दौरे के बाद एनएसयूआई भी सक्रिय
दूसरी ओर 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम ने भी प्रदेश की छात्र राजनीति को चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं समेत कई मुद्दे उठाए। कार्यक्रम से पहले एनएसयूआई ने भोपाल में एबीवीपी को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया था। संगठन ने इसे छात्रों के मुद्दों पर संवाद का अवसर बताया था। अब छात्रसंघ चुनाव की संभावना के बीच एनएसयूआई की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। कांग्रेस पहले ही चुनाव की तैयारियों के लिए प्रदेश में जिम्मेदारियां बांट चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कॉलेज परिसरों में छात्र संगठनों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।
असली पेंच अभी चुनाव की प्रक्रिया पर
छात्र संगठनों की तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल चुनाव किस तरीके से होंगे, इस पर है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुनाव, प्रत्याशियों की प्रक्रिया और मतदान की तारीख को लेकर अंतिम सरकारी निर्देश अभी सामने नहीं आए हैं। यही वजह है कि संगठन तैयारी के साथ-साथ शासन के आदेश का भी इंतजार कर रहे हैं। एबीवीपी ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मुलाकात कर छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना तत्काल जारी करने की मांग की थी। संगठन ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रत्यक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनाव कराने की मांग भी रखी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में डोल ग्यारस से होगा गणेश विसर्जन: कल से घाटों पर पहुंचेगीं प्रतिमाएं, 25 को निकलेगा बड़ा चल समारोह
9 साल बाद फिर लौटेगा चुनावी माहौल?
अगर सरकार के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव होंगे। इस बीच छात्र राजनीति की दो प्रमुख धाराएं एबीवीपी और एनएसयूआई पहले से ही कैंपस में सक्रिय हो गई हैं। अब नजर सरकार की अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम पर है। तारीख और प्रक्रिया घोषित होते ही कैंपस में सदस्यता, प्रत्याशी चयन, प्रचार और छात्र मुद्दों को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
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चुनाव की तारीख साफ नहीं, संगठनों ने कैंपस पकड़ना शुरू किया
सरकार की ओर से सितंबर का प्रावधान सामने आने के बावजूद अभी तक चुनाव की तारीख, मतदान का तरीका और छात्रसंघ गठन की पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट आदेश का इंतजार है। इसी बीच छात्र संगठन नए विद्यार्थियों तक पहुंच बनाने में जुट गए हैं। दोनो संगठन नए विद्यार्थियों के बीच सदस्यता अभियान और संपर्क बढ़ाया जा रहा है। एबीवीपी की गतिविधियां भी तेज हुई हैं। कांग्रेस ने भी पहले ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए 13 चुनाव प्रभारी नियुक्त किए हैं, जिन्हें कैंपस और छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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डीयू चुनाव परिणाम से एबीवीपी में बढ़ा उत्साह
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के हालिया परिणामों ने मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों की गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है। 2026 के डूसू चुनाव में एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव समेत चार में से तीन केंद्रीय पद जीते। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे। एनएसयूआई को केंद्रीय पैनल में कोई पद नहीं मिला। एमपी में छात्रसंघ चुनाव की संभावनाओं के बीच एबीवीपी के लिए यह परिणाम अपने संगठनात्मक अभियान को लेकर उत्साह बढ़ाने वाला घटनाक्रम है। वहीं एनएसयूआई के लिए प्रदेश में होने वाले संभावित चुनावों से पहले संगठन और कैंपस स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत करने की चुनौती है।
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राहुल के दौरे के बाद एनएसयूआई भी सक्रिय
दूसरी ओर 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम ने भी प्रदेश की छात्र राजनीति को चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं समेत कई मुद्दे उठाए। कार्यक्रम से पहले एनएसयूआई ने भोपाल में एबीवीपी को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया था। संगठन ने इसे छात्रों के मुद्दों पर संवाद का अवसर बताया था। अब छात्रसंघ चुनाव की संभावना के बीच एनएसयूआई की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। कांग्रेस पहले ही चुनाव की तैयारियों के लिए प्रदेश में जिम्मेदारियां बांट चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कॉलेज परिसरों में छात्र संगठनों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।
असली पेंच अभी चुनाव की प्रक्रिया पर
छात्र संगठनों की तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल चुनाव किस तरीके से होंगे, इस पर है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चुनाव, प्रत्याशियों की प्रक्रिया और मतदान की तारीख को लेकर अंतिम सरकारी निर्देश अभी सामने नहीं आए हैं। यही वजह है कि संगठन तैयारी के साथ-साथ शासन के आदेश का भी इंतजार कर रहे हैं। एबीवीपी ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मुलाकात कर छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना तत्काल जारी करने की मांग की थी। संगठन ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रत्यक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनाव कराने की मांग भी रखी।
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9 साल बाद फिर लौटेगा चुनावी माहौल?
अगर सरकार के अकादमिक कैलेंडर के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव होंगे। इस बीच छात्र राजनीति की दो प्रमुख धाराएं एबीवीपी और एनएसयूआई पहले से ही कैंपस में सक्रिय हो गई हैं। अब नजर सरकार की अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम पर है। तारीख और प्रक्रिया घोषित होते ही कैंपस में सदस्यता, प्रत्याशी चयन, प्रचार और छात्र मुद्दों को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
