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Bhopal: पांच दिन से भोपाल में आमरण अनशन पर बैठी एएनएम की बिगड़ी तबीयत,बोलीं-नियुक्ति तक करते रहेंगे प्रदर्शन
Fri, 01 Aug 2025 08:33 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 01 Aug 2025 08:33 PM IST
सार
संविदा एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) की नियमित नियुक्ति को लेकर प्रदेश भर से आईं एएनएम भोपाल में स्वास्थ्य संचालनालय के सामने पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठी हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं ममता हिरवे खाना त्याग दिया है, इस कारण शुक्रवार को उनकी तबीयत बिगड़ गई।
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एएनएम का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश की संविदा एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) की नियमित नियुक्ति को लेकर प्रदेश भर से आईं एएनएम भोपाल में स्वास्थ्य संचालनालय के सामने पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठी हैं। ये महिलाएं धूप-बारिश की परवाह किए बिना अपनी मांगों को लेकर डटी हुई हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं ममता हिरवे खाना त्याग दिया है, इस कारण शुक्रवार को उनकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस कर्मियों ने उन्हें अस्पताल ले जाने को कहा लेकिन वे जाने को तैयार नहीं हुईं। उन्होने कहा है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी आंदोलन जारी रहेगा।
डिप्टी सीएम ने दिलाया था भरोसा
ममता हिरवे ने कहा कि हाईकोर्ट ने हमारे पक्ष में आदेश दिया था, फिर भी नियमित नियुक्ति नहीं दी गई। अब हमें प्रदर्शन से भी रोका जा रहा है। हिरवे ने बताया कि 5 जून 2025 को पांच दिन का धरना देने के बाद उप मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था। लेकिन एक महीना बीत चुका है और कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
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पहले नियुक्ति दी और बाद में निरस्त कर दिया
प्रदर्शनकारी एएमएम में से कई वे महिलाएं हैं जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी। 28 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए थे कि जिन एएनएम के पास 18 माह का डिप्लोमा है, उन्हें नियमित नियुक्ति दी जाए। इन लोगों ने परीक्षा दी, पास भी हुईं, लेकिन विभाग ने पहले नियुक्ति दी और बाद में उसे निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ महिलाओं ने फिर से कोर्ट में सामूहिक याचिका दायर की और कोर्ट ने दोबारा नियुक्ति का आदेश दिया।
यह भी पढ़ें- न्यायमूर्ति सप्रे ने भोपाल के 8 ब्लैक स्पॉट का लिया जायजा, आधिकरियों से पूछी एक्सीडेंट की वजह
पुलिस ने अभिषेक करने से रोका
हिरवे ने बताया कि आज हम लोगों ने सवान का महीना होने के कारण यहां अभिषेक करना चाहा लेकिन पुलिस ने हमें रोक दिया और हमारे द्वारा लाई गई पूजा सामग्री छिन ली। उन्होने आरोप लगाया कि बारिश के दौरान जब महिलाएं परिसर में अंदर जाना चाहती थीं, तो अधिकारियों ने गार्ड को निर्देश दिया कि कोई भी अंदर न आए। महिलाएं फिर भी शांति से प्रदर्शन कर रही हैं। बिना छत, भोजन और सुविधाओं के लगातार प्रदर्शन कर रहीं हैं।
यह भी पढ़ें- भोपाल में बिना हेलमेट नहीं मिला पेट्रोल, दूसरे का हेलमेट लेकर भराया पेट्रोल, कई लोगों को लौटाया
जाने क्या है विवाद
जानकारी के मुताबिक 2022-23 में संविदा ANM के लिए भर्ती निकाली गई थी। नए नियम में 24 माह का डिप्लोमा जरूरी कर दिया गया, जबकि पहले 18 माह वाला डिप्लोमा मान्य था। पुराने संविदा कर्मचारियों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 माह डिप्लोमा धारकों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिले। इसके बाद लगभग 400 ANM महिलाओं ने परीक्षा दी, उत्तीर्ण हुईं और चयनित भी। 124 महिलाओं को नियमित नियुक्ति दी गई। 6 महीने तक सेवा देने के बाद विभाग ने नियुक्तियां रद्द कर दीं। दोबारा कोर्ट गए, और वहां से भी फैसला उनके पक्ष में आया। बावजूद इसके आदेश लागू नहीं किए जा रहे।
प्रमुख मांगें
-सभी योग्य अभ्यर्थियों को तत्काल नियमित नियुक्ति आदेश दिए जाएं
-वेटिंग लिस्ट और मेरिट लिस्ट पारदर्शी तरीके से लागू हो
-पिछले आदेशों को निरस्त करने की प्रक्रिया रोकी जाए
-संविदा कर्मचारियों को आरक्षण और अनुभव के अंक दिए जाएं
-जिला आवंटन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए
-नौकरी दो या इच्छा मृत्यु की मंजूरी
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डिप्टी सीएम ने दिलाया था भरोसा
ममता हिरवे ने कहा कि हाईकोर्ट ने हमारे पक्ष में आदेश दिया था, फिर भी नियमित नियुक्ति नहीं दी गई। अब हमें प्रदर्शन से भी रोका जा रहा है। हिरवे ने बताया कि 5 जून 2025 को पांच दिन का धरना देने के बाद उप मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था। लेकिन एक महीना बीत चुका है और कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
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पहले नियुक्ति दी और बाद में निरस्त कर दिया
प्रदर्शनकारी एएमएम में से कई वे महिलाएं हैं जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी। 28 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए थे कि जिन एएनएम के पास 18 माह का डिप्लोमा है, उन्हें नियमित नियुक्ति दी जाए। इन लोगों ने परीक्षा दी, पास भी हुईं, लेकिन विभाग ने पहले नियुक्ति दी और बाद में उसे निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ महिलाओं ने फिर से कोर्ट में सामूहिक याचिका दायर की और कोर्ट ने दोबारा नियुक्ति का आदेश दिया।
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पुलिस ने अभिषेक करने से रोका
हिरवे ने बताया कि आज हम लोगों ने सवान का महीना होने के कारण यहां अभिषेक करना चाहा लेकिन पुलिस ने हमें रोक दिया और हमारे द्वारा लाई गई पूजा सामग्री छिन ली। उन्होने आरोप लगाया कि बारिश के दौरान जब महिलाएं परिसर में अंदर जाना चाहती थीं, तो अधिकारियों ने गार्ड को निर्देश दिया कि कोई भी अंदर न आए। महिलाएं फिर भी शांति से प्रदर्शन कर रही हैं। बिना छत, भोजन और सुविधाओं के लगातार प्रदर्शन कर रहीं हैं।
यह भी पढ़ें- भोपाल में बिना हेलमेट नहीं मिला पेट्रोल, दूसरे का हेलमेट लेकर भराया पेट्रोल, कई लोगों को लौटाया
जाने क्या है विवाद
जानकारी के मुताबिक 2022-23 में संविदा ANM के लिए भर्ती निकाली गई थी। नए नियम में 24 माह का डिप्लोमा जरूरी कर दिया गया, जबकि पहले 18 माह वाला डिप्लोमा मान्य था। पुराने संविदा कर्मचारियों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 18 माह डिप्लोमा धारकों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिले। इसके बाद लगभग 400 ANM महिलाओं ने परीक्षा दी, उत्तीर्ण हुईं और चयनित भी। 124 महिलाओं को नियमित नियुक्ति दी गई। 6 महीने तक सेवा देने के बाद विभाग ने नियुक्तियां रद्द कर दीं। दोबारा कोर्ट गए, और वहां से भी फैसला उनके पक्ष में आया। बावजूद इसके आदेश लागू नहीं किए जा रहे।
प्रमुख मांगें
-सभी योग्य अभ्यर्थियों को तत्काल नियमित नियुक्ति आदेश दिए जाएं
-वेटिंग लिस्ट और मेरिट लिस्ट पारदर्शी तरीके से लागू हो
-पिछले आदेशों को निरस्त करने की प्रक्रिया रोकी जाए
-संविदा कर्मचारियों को आरक्षण और अनुभव के अंक दिए जाएं
-जिला आवंटन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए
-नौकरी दो या इच्छा मृत्यु की मंजूरी
