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Bhopal: भोपाल में कांग्रेस जिला अध्यक्ष के लिए प्रबल दावेदार रह गए पीछे, पुराने अध्यक्ष रिपीट, नेताओं की चली
Sat, 16 Aug 2025 07:47 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 16 Aug 2025 07:47 PM IST
सार
भोपाल में दोनों ही जिला अध्यक्षों शहर प्रवीण सक्सेना और ग्रामीण अनोखी मान सिंह पटेल को रिपीट कर दिया गया है। जबकि कई प्रबल दावेदार मैदान में थे। ऐसा माना जा रहा था कि अगर संगठन सृजन का असर रहा तो जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे।
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प्रवीण सक्सेना और अनोखी मानसिंह पटेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश भर में जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। प्रदेश के कई जिला अध्यक्षों को बदला गया है। वहीं कई जिला अध्यक्ष रिपीट भी हुए हैं। भोपाल में दोनों ही जिला अध्यक्षों शहर प्रवीण सक्सेना और ग्रामीण अनोखी मान सिंह पटेल को रिपीट कर दिया गया है। जबकि कई प्रबल दावेदार मैदान में थे। ऐसा माना जा रहा था कि अगर संगठन सृजन का असर रहा तो जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे। कांग्रेस सूत्रों की माने तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की मांग पर यहां पुराने दोनों ही अध्यक्षों को रिपीट कर दिया गया है। कुछ नेताओं का कहना है कि प्रवीण सक्सेना और अनोखी पटेल दोनो ही पटवारी के करीबी हैं जिसका उन्हें फायदा मिला। जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि उनको अध्यक्ष बने ज्यादा समय नहीं हुआ था इसलिए दोबारा मौका दिया गया है।
भोपाल से ये दिग्गज के प्रबल दावेदार
राजधानी भोपाल में जिला अध्यक्ष की दौड़ में कई दिग्गज शामिल थे जिसमें प्रमुख रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष मोनू सक्सेना और वर्तमान विधायक आतिफ अकील दौड़ में शामिल थे। नरेला विधानसभा से मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले मनोज शुक्ला भी जिला अध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे। इनके अलावा पूर्व पार्षद अमित शर्मा, प्रकाश चौक जो की पूर्व में कार्यकारी जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। साजिद अली, राहुल राठौर समेत कई युवा दावेदारी कर रहे थे। लेकिन सबको पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर से प्रवीण सक्सेना को अध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं ग्रमीण अध्यक्ष की बात करें तो यहां केवल तीन दावेदार थे। अनोखी मानसिंह पटेल को भी कम समय मिला था इसलिए उन्हें दोबारा मौका दिया गया है।
यह भी पढ़ें-एमपी कांग्रेस के 71 जिला अध्यक्षों का एलान, 18 दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को गुना की जिम्मेदारी
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मोनू सक्सेना को हटाकर बनाया था प्रवीण को अध्यक्ष
गौरतलब है कि प्रवीण सक्सेना को भोपाल शहर का जिला अध्यक्ष उस समय बनाया गया था जब उनके भाई संजीव सक्सेना दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से दावेदारी कर रहे थे । इस दौरान उन्होंने पूरी ताकत लगाई थी ऐसा माना जा रहा था कि पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की जगह उन्हें चुनाव लड़ाया जा सकता है, लेकिन पार्टी ने समझौता किया और संजीव सक्सेना के भाई प्रवीण सक्सेना को जिला अध्यक्ष बनाया। और उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ली थी। ऐसे में प्रवीण सक्सेना का कार्यकाल बहुत छोट था उनके रिपीट होने की यह भी एक बड़ी वजह मनी जा रही है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में भारी सुरक्षा के बीच बीच सड़क पर बीटेक छात्र की चाकू से गोदकर हत्या, आरोपी की तलाश जारी
बीजेपी बोली- संगठन सृजन एक नाटक नौटंकी सिद्ध हुआ
कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की लिस्ट के बाद बीजेपी ने भी हमला बोला है। प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी का जिला अध्यक्ष चयन के लिए संगठन सृजन एक नाटक नौटंकी सिद्ध हुआ जमीनी नेता कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा यह सब झूठी बाते बनकर रह गई पूर्व की तरह नेताओं के हस्तक्षेप से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हुई वही इस बार जीतू पटवारी द्वारा सभी वरिष्ठ नेताओं के किनारे लगा दिया गया। जहां दिग्विजय सिंह के बेटे,भतीजे प्रदेश का नेतृत्व करना चाहते थे उन्हें जीतू पटवारी ने जिला अध्यक्ष बनाकर एक जिले तक सीमित कर दिया। ओमकार मरकाम जैसे CEC के सदस्य को भी एक जिले तक सीमित कर दिया। यह जीतू पटवारी ने संगठन सृजन के नाम पर अपने सभी विरोधियों का विसर्जन कर दिया है। पूरी तरह गुटबाजी के आधार पर ही कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का चयन हुआ है।
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भोपाल से ये दिग्गज के प्रबल दावेदार
राजधानी भोपाल में जिला अध्यक्ष की दौड़ में कई दिग्गज शामिल थे जिसमें प्रमुख रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष मोनू सक्सेना और वर्तमान विधायक आतिफ अकील दौड़ में शामिल थे। नरेला विधानसभा से मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले मनोज शुक्ला भी जिला अध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे। इनके अलावा पूर्व पार्षद अमित शर्मा, प्रकाश चौक जो की पूर्व में कार्यकारी जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। साजिद अली, राहुल राठौर समेत कई युवा दावेदारी कर रहे थे। लेकिन सबको पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर से प्रवीण सक्सेना को अध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं ग्रमीण अध्यक्ष की बात करें तो यहां केवल तीन दावेदार थे। अनोखी मानसिंह पटेल को भी कम समय मिला था इसलिए उन्हें दोबारा मौका दिया गया है।
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मोनू सक्सेना को हटाकर बनाया था प्रवीण को अध्यक्ष
गौरतलब है कि प्रवीण सक्सेना को भोपाल शहर का जिला अध्यक्ष उस समय बनाया गया था जब उनके भाई संजीव सक्सेना दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से दावेदारी कर रहे थे । इस दौरान उन्होंने पूरी ताकत लगाई थी ऐसा माना जा रहा था कि पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की जगह उन्हें चुनाव लड़ाया जा सकता है, लेकिन पार्टी ने समझौता किया और संजीव सक्सेना के भाई प्रवीण सक्सेना को जिला अध्यक्ष बनाया। और उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ली थी। ऐसे में प्रवीण सक्सेना का कार्यकाल बहुत छोट था उनके रिपीट होने की यह भी एक बड़ी वजह मनी जा रही है।
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बीजेपी बोली- संगठन सृजन एक नाटक नौटंकी सिद्ध हुआ
कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की लिस्ट के बाद बीजेपी ने भी हमला बोला है। प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी का जिला अध्यक्ष चयन के लिए संगठन सृजन एक नाटक नौटंकी सिद्ध हुआ जमीनी नेता कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा यह सब झूठी बाते बनकर रह गई पूर्व की तरह नेताओं के हस्तक्षेप से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हुई वही इस बार जीतू पटवारी द्वारा सभी वरिष्ठ नेताओं के किनारे लगा दिया गया। जहां दिग्विजय सिंह के बेटे,भतीजे प्रदेश का नेतृत्व करना चाहते थे उन्हें जीतू पटवारी ने जिला अध्यक्ष बनाकर एक जिले तक सीमित कर दिया। ओमकार मरकाम जैसे CEC के सदस्य को भी एक जिले तक सीमित कर दिया। यह जीतू पटवारी ने संगठन सृजन के नाम पर अपने सभी विरोधियों का विसर्जन कर दिया है। पूरी तरह गुटबाजी के आधार पर ही कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का चयन हुआ है।
