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Bhopal: BMHRC में पल्मोनरी एम्बोलिज्म बीमारी का इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रक्रिया से इलाज, मरीज पूरी तरह स्वस्थ

Wed, 22 May 2024 07:10 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 22 May 2024 07:10 PM IST
सार

गैस पीड़ित एक मरीज के पल्मोनरी आर्टरी में खून का थक्का जम गया था, जिसका बीएमएचआरसी भोपाल में इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रक्रिया से सफल इलाज किया गया। मरीज अब पूरी तरह से ठीक है।

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Bhopal Pulmonary embolism disease treated with interventional radiology procedure in BMHRC
डॉक्टर्स टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक 55 वर्षीय गैस पीड़ित मरीज के फेफड़ों की धमनी में खून का थक्का जम गया था, जिसकी वजह से थोड़ा भी चलने पर उनकी सांस फूल रही थी और वह काफी गंभीर स्थिति में पहुंच गए थे। भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) में इस मरीज का रेडियोलॉजिकल इन्टरवेंशनल प्रक्रिया से छोटा सा चीरा लगाकर उपचार किया गया। मरीज की समस्या अब खत्म हो गई है।

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बीएमएचआरसी रेडियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राधेश्याम मीणा ने बताया कि मरीज सांस फूलने की शिकायत के साथ कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में आए थे। यहां जांच में पता चला कि उनकी फेफडों की धमनी पल्मोनरी आर्टरी में खून का थक्का जम गया है, जिसकी वजह से उन्हें सांस फूलने की शिकायत हो रही है। इसे पल्मोनरी थम्बो एम्बोलिज्म (पीई) कहा जाता है। यह एक घातक बीमारी है। इस बीमारी की मत्युदर करीब 20 से 30 प्रतिशत है।
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आमतौर पर ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती देकर दवा व इन्जेक्शन के माध्यम से खून का थक्का हटाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है और शरीर पर दवाओं के साइडइफेक्ट के खतरे भी बने होते हैं। रेडियोलॉजिकल इन्टरवेंशनल प्रक्रिया से मरीज के पैर की नस के रास्ते एक कैथेटर के जरिए पल्मोनरी आर्टरी में दवा पहुंचाई जाती है, जो वहां बने हुए खून के थक्के को नष्ट कर देती है। इस प्रक्रिया को कैथेटर डायरेक्टेड थ्रोम्बोलिसिस (CDT) कहा जाता है। बीएमएचआरसी में आए मरीज का भी इस प्रक्रिया से इलाज किया गया।
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कैसे होता है डीवीटी
शरीर की नसों में रक्त का प्रवाह रुक जाने से डीवीटी हो सकता है। आमतौर पर डीवीटी पैरों को प्रभावित करता है। जब खून का थक्का पैर की नसों से प्रवाहित होते हुए फेफड़ों की नसों में जाकर फंस जाता है, तो इसे पल्मोनरी थम्बो एम्बोलिज्म (पीई) कहा जाता है।

किन लोगों को अधिक खतरा
ऐसे लोग जो ज्यादा चल फिर नहीं पाते। शरीर का कम मूवमेंट कर पाते हैं। 60 वर्ष से अधिक बुजुर्ग लोगों में डीवीटी की शिकायत देखी जाती है। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीजों में या लंबे समय तक बेड रेस्ट करने के लिए मजबूर लोगों को यह बीमारी हो सकती है। एक्सीडेंट या सर्जरी की वजह से किसी नस के प्रभावित होने से प्रेग्नेंसी, मोटापा, धूम्रपान करने से। अनुवांशिक कारणों से भी ऐसा हो सकता है।


बीमारियों के इलाज में होने वाली जटिलताएं खत्म
बीएमएचआरसी भोपाल की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कहा है कि इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रक्रिया ने कई बीमारियों के इलाज में होने वाली जटिलताएं खत्म कर दी हैं। एक छोटा सा चीरा लगाकर बड़ी-बड़ी प्रक्रियाएं होने लगी हैं। बीएमएचआरसी का रेडियोलॉजी विभाग मरीजों को यह सुविधा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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