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Bhopal:राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन वैज्ञानिकों के साथ छात्रों का फेस टू फेस संवाद, हुए वर्कशाप
Sat, 04 Jan 2025 07:19 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 04 Jan 2025 07:19 PM IST
सार
31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन फेस टू फेस वर्कशॉप और स्टूडेंट्स के प्रोजेक्ट्स पर फोकस रहा। हैंड्स ऑन एक्टिविटीज पर भीड़ रही।
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31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दूसरे दिन विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन और देश के वैज्ञानिकों के साथ बाल वैज्ञानिकों का फेस टू फेस सवांद हुआ। जिसमें विद्यार्थियों ने अपने सवाल पूछें। देश भर से आए विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया गया। विद्यार्थियो ने मॉडल्स और पोस्टर के माध्यम से अपने कार्यो के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दूसरे दिन विज्ञान शिक्षकों के लिए "आहार क्रांति पोषण एवं आहार से कुशल स्वास्थ्य" विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। साथ रोबोटिक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। हैंड्स ऑन एक्टिविटीज पर भारी भीड़ देखी गई।
भोजन को पोषण के लिए खाएं या दवा के रूप में खाएं
मनोहर शिवन ने कहा कि युवा पीढ़ी को शारीरिक गतिविधियां अपनाकर और संतुलित आहार का सेवन करके अपने स्वास्थ्य को बनाए रखना चाहिए। सागर भिंडे, गुजरात विश्वविद्यालय के प्रशिक्षक, ने "आहार क्रांति" की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन को पोषण के लिए खाएं या दवा के रूप में खाएं, अन्यथा दवा ही आपका भोजन बन जाएगी। उन्होंने युवाओं में आहार संबंधी विकार, सोशल मीडिया के प्रभाव और पोषण के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया।
पापुलर साइंस लेक्चर के अंतर्गत विशेषज्ञ डॉ. आनंद मधुकर, टीईआरआई स्कूल ऑफ एडवांस स्टडीज, नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर, ने सतत विकास और जलवायु परिवर्तन जागरूकता पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने 2015 में पेरिस सम्मेलन के दौरान स्थापित 17 वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि जल, ऊर्जा और कृषि जैसे संसाधनों का कुशल उपयोग और जलवायु नीतियों का क्रियान्वयन भविष्य के लिए आवश्यक है। पापुलर साइंस लेक्चर के अंतर्गत भारतीय नवप्रवर्तन फाउंडेशन अहमदाबाद के निदेशक डॉ अरविन्द रानाडे ने खगोल शास्त्र और विज्ञान के बारे में रोचक जानकारी देते हुए विस्तार से ग्रहों, तारों, सौर मंडल, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण, भारत में खगोल विज्ञान का विकास विषय पर विस्तार से बताया।
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शिक्षाप्रद और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के लिए एक विज्ञान फिल्म शो प्रदर्शित किया गया, जिसने उनकी रुचि को बढ़ाया। इसके अलावा, प्रकृति से संबंधित सांप-सीढ़ी खेल ने न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों को भी खूब आनंदित किया। इस अवसर पर जीव जंतु प्रदर्शनी, चीता और बाघ के बारे में जानकारी देती प्रदर्शनी, क्राफट, पर्यावरण प्रदर्शनी, आकाशीय बिजली से बचाव प्रदर्शनी, लोकगीत द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता, कागज से टोपी निर्माण को भी विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा सराहा गया। टेलिस्कोप द्वारा आकाश दर्शन किया गया। एकलव्य फाउंडेशन भोपाल द्वारा विभिन्न विज्ञान पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का प्रदर्शन किया गया
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भोजन को पोषण के लिए खाएं या दवा के रूप में खाएं
मनोहर शिवन ने कहा कि युवा पीढ़ी को शारीरिक गतिविधियां अपनाकर और संतुलित आहार का सेवन करके अपने स्वास्थ्य को बनाए रखना चाहिए। सागर भिंडे, गुजरात विश्वविद्यालय के प्रशिक्षक, ने "आहार क्रांति" की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन को पोषण के लिए खाएं या दवा के रूप में खाएं, अन्यथा दवा ही आपका भोजन बन जाएगी। उन्होंने युवाओं में आहार संबंधी विकार, सोशल मीडिया के प्रभाव और पोषण के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया।
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पापुलर साइंस लेक्चर के अंतर्गत विशेषज्ञ डॉ. आनंद मधुकर, टीईआरआई स्कूल ऑफ एडवांस स्टडीज, नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर, ने सतत विकास और जलवायु परिवर्तन जागरूकता पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने 2015 में पेरिस सम्मेलन के दौरान स्थापित 17 वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि जल, ऊर्जा और कृषि जैसे संसाधनों का कुशल उपयोग और जलवायु नीतियों का क्रियान्वयन भविष्य के लिए आवश्यक है। पापुलर साइंस लेक्चर के अंतर्गत भारतीय नवप्रवर्तन फाउंडेशन अहमदाबाद के निदेशक डॉ अरविन्द रानाडे ने खगोल शास्त्र और विज्ञान के बारे में रोचक जानकारी देते हुए विस्तार से ग्रहों, तारों, सौर मंडल, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण, भारत में खगोल विज्ञान का विकास विषय पर विस्तार से बताया।
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शिक्षाप्रद और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के लिए एक विज्ञान फिल्म शो प्रदर्शित किया गया, जिसने उनकी रुचि को बढ़ाया। इसके अलावा, प्रकृति से संबंधित सांप-सीढ़ी खेल ने न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों को भी खूब आनंदित किया। इस अवसर पर जीव जंतु प्रदर्शनी, चीता और बाघ के बारे में जानकारी देती प्रदर्शनी, क्राफट, पर्यावरण प्रदर्शनी, आकाशीय बिजली से बचाव प्रदर्शनी, लोकगीत द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता, कागज से टोपी निर्माण को भी विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा सराहा गया। टेलिस्कोप द्वारा आकाश दर्शन किया गया। एकलव्य फाउंडेशन भोपाल द्वारा विभिन्न विज्ञान पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का प्रदर्शन किया गया
