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भोपाल: राजधानी के तालाबों पर एनजीटी की सख्ती, अतिक्रमण पर अफसरों की जवाबदेही तय करने के निर्देश
Wed, 16 Sep 2026 07:33 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 16 Sep 2026 07:33 PM IST
सार
भोज वेटलैंड और भोपाल के जल निकायों के अतिक्रमण मामले में एनजीटी ने सख्ती दिखाई। सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए सिर्फ अतिक्रमणकारियों ही नहीं, लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, तालाबों की सीमा तय करने और जिला-वार मैपिंग के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
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एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोज वेटलैंड और भोपाल के जल निकायों में अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को सख्त टिप्पणी की। अधिकरण ने कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण गंभीर मामला है और केवल अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जिन अधिकारियों की लापरवाही या निष्क्रियता से अवैध निर्माण और कब्जे की स्थिति बनी, उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। यह सुनवाई आर्या श्रीवास्तव बनाम भारत संघ एवं अन्य और राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य मामलों में हुई। राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा।
सरकारी जमीन पैतृक संपत्ति नहीं
एनजीटी ने कहा कि सरकारी जमीन की सुरक्षा संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी है। अधिकारियों की निष्क्रियता से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन किसी व्यक्ति या अधिकारी की पैतृक संपत्ति नहीं है, जिस पर अवैध बस्तियों या निर्माण को मनमाने तरीके से अनुमति दी जा सके। अधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता। साथ ही अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार तंत्र की जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।
तालाबों की सीमा तय करना जरूरी
भोज वेटलैंड और जल निकायों की वास्तविक सीमा तय करने के लिए फुल टैंक लेवल और फुल रिजर्वायर लेवल के आधार पर सीमांकन के पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। एनजीटी के अनुसार सीमा स्पष्ट होने के बाद जल निकायों के भीतर या आसपास हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण की पहचान कर कार्रवाई करना आसान होगा। अधिकरण ने सरकारी जमीन, जल निकायों और वेटलैंड क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति के जिला-वार स्वतंत्र सत्यापन और मैपिंग पर भी जोर दिया। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता बताई गई।
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यह भी पढ़ें-ओवैसी की सभा के बाद सियासत गरम, अब हिन्दू संगठन ने 5 अक्टूबर को टी. राजा की सभा की मांगी अनुमति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई प्रतिवेदन की अंतरिम रिपोर्ट पेश की। बोर्ड ने विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। एनजीटी ने निर्देश दिया कि विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले तैयार कर प्रस्तुत की जाए। दोनों मामलों की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दौरान संबंधित विभागों की विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मार्च 2025 में प्रकाशित आंकड़ों का भी उल्लेख किया। इसमें देश में करीब 5,46,089.45 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण के अधीन होने की जानकारी दी गई है।
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सरकारी जमीन पैतृक संपत्ति नहीं
एनजीटी ने कहा कि सरकारी जमीन की सुरक्षा संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी है। अधिकारियों की निष्क्रियता से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन किसी व्यक्ति या अधिकारी की पैतृक संपत्ति नहीं है, जिस पर अवैध बस्तियों या निर्माण को मनमाने तरीके से अनुमति दी जा सके। अधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता। साथ ही अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार तंत्र की जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।
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तालाबों की सीमा तय करना जरूरी
भोज वेटलैंड और जल निकायों की वास्तविक सीमा तय करने के लिए फुल टैंक लेवल और फुल रिजर्वायर लेवल के आधार पर सीमांकन के पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। एनजीटी के अनुसार सीमा स्पष्ट होने के बाद जल निकायों के भीतर या आसपास हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण की पहचान कर कार्रवाई करना आसान होगा। अधिकरण ने सरकारी जमीन, जल निकायों और वेटलैंड क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति के जिला-वार स्वतंत्र सत्यापन और मैपिंग पर भी जोर दिया। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता बताई गई।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई प्रतिवेदन की अंतरिम रिपोर्ट पेश की। बोर्ड ने विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। एनजीटी ने निर्देश दिया कि विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले तैयार कर प्रस्तुत की जाए। दोनों मामलों की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दौरान संबंधित विभागों की विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मार्च 2025 में प्रकाशित आंकड़ों का भी उल्लेख किया। इसमें देश में करीब 5,46,089.45 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण के अधीन होने की जानकारी दी गई है।
