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Bhopal News: अपनी विरासत रहे आबाद, शहर ने लगाई पुकार, इकबाल मैदान के लिए लगाएंगे कलेक्टर से गुहार

Mon, 16 Dec 2024 05:40 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 16 Dec 2024 05:40 PM IST
सार

भोपाल के ऐतिहासिक इकबाल मैदान पर प्रशासनिक पाबंदियां हटाने की मांग जोर पकड़ रही है। विरासत-ए-भोपाल मंच ने इसे पुनः सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए खोलने की अपील की है। पाबंदियों के कारण मैदान की दुर्दशा हो रही है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान खत्म होने का खतरा है। 

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Bhopal News: The city has made a call to keep its heritage alive, will appeal to collector for Iqbal Maidan
भोपाल के इकबाल मैदान के लिए शहर ने लगाई गुहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल की पहचान में शामिल इकबाल मैदान पिछले कई सालों से प्रशासनिक पाबंदियों में कैद है। राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लगी निषेधाज्ञा को लेकर शहर नाराज भी है और इसको पुनः बहाली के लिए प्रयास भी कर रहा है। इन्हीं फिक्र के साथ सामाजिक संस्था विरासत ए भोपाल ने शहर के बुद्धिजीवियों को जोड़ा। एक विस्तृत चर्चा के साथ एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मुलाकात करेगा। इस दौरान इकबाल मैदान को पुनः गतिविधियों से आबाद करने की मांग की जाएगी।
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विरासत-ए-भोपाल मंच ने भोपालवासियों की भावना को व्यक्त करते हुए इक़बाल मैदान पर लागू धारा 144 को हटाने की मांग की है। मंच इस संदर्भ में एक ज्ञापन कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा, जिसमें इस मैदान को पुनः सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए खोलने की अपील की जाएगी। इस मामले को लेकर जुटे शहर वासियों ने यह बात स्पष्ट की कि इक़बाल मैदान भोपाल के सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और इस मैदान का उपयोग समाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए किया जाना चाहिए।
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रहा है कार्यक्रमों का केंद्र
भोपाल शहर के मध्य स्थित इकबाल मैदान कभी खिरनी वाला मैदान के नाम से मशहूर रहा है। किसी जमाने में यहां मशहूर शायर अल्लामा इकबाल भी अपना समय बिता चुके हैं। भोपाल शीश महल में मेहमान बने इकबाल ने कई यादगार शेरों को आकार भी दिया है। बदलते दौर में इस मैदान के कायाकल्प के साथ यहां सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रमों का लंबा सिलसिला भी चला लेकिन पिछले कुछ सालों से इस मैदान को सभी तरह के कार्यक्रमों के लिए प्रतिबंधित कर रखा है।
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हो रहा है बदहाल
कार्यक्रमों से बनी रहने वाली चहल-पहल और यहां होते रहने वाले सुधार और जीर्णोद्धार काम अब रुक गए हैं। नतीजा यहां मंच से लेकर बनी हुई शफीर तक दुर्दशा का शिकार होने लगी है। इस मैदान की खूबसूरती के बाउंड्रीवॉल पर चस्पा किए गए। अलग-अलग शायरों के लिखे हुए शेर पट्टिका भी उखड़ने लगी हैं। यहां बाइक और कार सवारों की धमाचौकड़ी ने यहां के फर्श को भी गड्ढों से भर दिया है।

खत्म हो जाएगी विरासत
विरासत-ए-भोपाल मंच का कहना है कि प्रशासनिक अनदेखी ऐसे ही बरकरार रही तो आने वाले दिनों में शहर की यह खास पहचान अपना वजूद खो देगी।  
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