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Bhopal News: थम नहीं रहा याचिका लगाने और उनके खारिज होने का सिलसिला, वक्फ मामले में फिर खारिज हुई याचिका
Sat, 11 May 2024 07:21 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 11 May 2024 07:21 PM IST
सार
वक्फ मामले में याचिका लगाने और उनके खारिज होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। वहीं, एक बार फिर वक्फ मामले में लगाई याचिका खारिज हो गई।
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वक्फ याचिका खारिज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सप्ताह भर पहले एक मामले को लेकर खारिज की गई याचिका के जवाब में दोबारा नई याचिका दाखिल कर दी गई। नतीजा इसको भी पहले की तरह बेरंग वापस करते हुए खारिज का ठप्पा लगा दिया है। उज्जैन के एक वक्फ से जुड़ी इस याचिका को खारिज करते हुए पिछली बार न्यायाधीश महोदय ने नाराजगी भी जाहिर की थी।
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उज्जैन स्थित वक्फ दरगाह मदार गेट की कमेटी को लेकर लंबे समय से विवादों की स्थिति बनी हुई है। इतने ही समय से यहां बार-बार अदालत में दस्तक दी जा रही है। इंदौर हाईकोर्ट ने ताजा याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को इसको खारिज कर दिया है। याचिका वक्फ दरगाह मदार गेट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रियाज खान ने लगाई थी। उनकी आपत्ति इस बात को लेकर थी कि मप्र वक्फ बोर्ड ने उनके स्थान पर फैजान खान की नियुक्ति नियमविरुद्ध तरीके से कर दी है। रियाज की आपत्ति में यह भी शामिल है कि नवनियुक्त अध्यक्ष फैजान खान को पदभार ग्रहण की जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह भी उचित नहीं है।
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पिछली बार लगी थी फटकार
जानकारी के मुताबिक, करीब चार साल पहले पद से हटाए गए रियाज खान अब तक कई याचिकाएं लगा चुके हैं। इससे पहले WP 15567/2021 और RP 888/2022 के मामले में अदालत ने रियाज खान की याचिकाओं को तथ्यहीन और अनावश्यक करार दिया है। उन्होंने पिछली बार फैसला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील को फटकार भी लगाई थी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था आप बार-बार अदालत आकर अदालत का समय खराब न करें।
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मामला बड़ी आमदनी का या वर्चस्व का
सूत्रों का कहना है कि वक्फ दरगाह मदार गेट की संपत्ति में बड़ी संख्या में कमर्शियल दुकानें हैं। जिनसे किराए के रूप में बड़ी आमदनी होती है। वक्फ एक्ट के मुताबिक, किसी भी मुतवल्ली को संबंधित वक्फ की आमदनी से महज सात प्रतिशत वक्फ बोर्ड को जमा करना हो है। जबकि बाकी राशि संपत्ति के रखरखाव, मरम्मत और सुधार कार्यों में लगाना होती है। इधर, वक्फ कमेटी से जुड़े अधिकांश पदाधिकार इस नियुक्ति को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर चले हैं। यही वजह है कि जब भी कोई कामती बदली जाती है, उसको लेकर विवाद के हालात खड़े हो जाते हैं।
इनका कहना है
विवाद जैसी कोई स्थिति नहीं है। रियाज खान हमारे बड़े भी हैं और वक्फ मामलों की जानकारी में सीनियर भी। अब वक्फ बोर्ड से लेकर अदालत तक ने उन्हें इस काम से अलग कर दिया है। वक्फ हित में वे पद पर रहे बिना भी कर सकते हैं। उन्हें अदालत और बोर्ड दोनों के आदेश का पालन करना चाहिए।
फैजान खान, नवागत अध्यक्ष, वक्फ दरगाह मदार गेट
