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Bhopal News: भोपाल में इंजीनियरिंग का कमाल, 40 करोड़ की हाई-टेक बिल्डिंग तैयार लेकिन परिषद हॉल बनाना भूल गए
Tue, 18 Nov 2025 08:17 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 18 Nov 2025 08:17 PM IST
सार
भोपाल में सरकारी इंजीनियरिंग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। नगर निगम ने लिंक रोड-1 पर 40 करोड़ रुपये खर्च कर आठ मंजिला आधुनिक मुख्यालय तो खड़ा कर दिया, लेकिन सबसे जरूरी परिषद मीटिंग हॉल बनाना ही छोड़ दिया।
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निगम का नया भवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश की राजधानी में सरकारी प्लानिंग की एक और चौंकाने वाली चूक सामने आई है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से 8 मंजिला आधुनिक मुख्यालय तो तैयार कर दिया, लेकिन इस पूरी ग्रीन-बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में सबसे जरूरी हिस्सा परिषद का मीटिंग हॉल बनाना ही छोड़ दिया गया।
ग्रीन बिल्डिंग बनी, ऑफिस एक छत के नीचे आए-लेकिन हॉल नहीं
निगम का नया मुख्यालय ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर बनाया गया है। इसके शुरू होने के बाद शहर के 10 से ज्यादा दफ्तर एक ही जगह शिफ्ट हो जाएंगे। सोलर पैनल लगाने का काम जारी है, फोन-इंटरनेट केबल बिछाई जा रही है और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर लगाया जा रहा है। कई खूबियों वाली इस बिल्डिंग में सबसे बड़ा दोष यह निकला कि यहां परिषद का मीटिंग हॉल ही शामिल नहीं किया गया। अब इसके लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर पास में अलग से हॉल बनाने की तैयारी है। डिजाइन में यह हिस्सा शुरू से नहीं था।
यह भी पढ़ें- भोपाल में 800 वर्गफीट के मकान में 108 मतदाता,कांग्रेस ने लगाया गंभीर आरोप,अधिकारी बोल कर रहे हैं जांच
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मीटिंग हॉल बनने तक बैठकें आईएसबीटी में होंगी
जब तक नया हॉल तैयार नहीं होता, तब तक परिषद की बैठकें आईएसबीटी में आयोजित की जाएंगी। जांच में यह सामने आया कि आरंभिक प्लान में ही हॉल को शामिल नहीं किया गया था। जिम्मेदारों के अनुसार, बिल्डिंग की मूल लागत 22 करोड़ थी, लेकिन काम बढ़ते-बढ़ते बजट 40 करोड़ तक पहुंच गया।
यह भी पढ़ें-भोपाल में नवंबर की सबसे ठंडी रात दर्ज, 84 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, चार दिन शीतलहर का अलर्ट
निगम अध्यक्ष की सफाई
निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन में तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते परिषद हॉल को पहले चरण में शामिल नहीं किया गया। अब पास की जमीन लेकर नया हॉल बनाया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्किंग की वजह से फ्रंट ढंकने पर आपत्ति उठी है और सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते थे। शहर में यह मामला इंजीनियरिंग और प्लानिंग में हो रही लापरवाहियों का ताज़ा उदाहरण बन गया है, जिसने सरकारी निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ग्रीन बिल्डिंग बनी, ऑफिस एक छत के नीचे आए-लेकिन हॉल नहीं
निगम का नया मुख्यालय ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर बनाया गया है। इसके शुरू होने के बाद शहर के 10 से ज्यादा दफ्तर एक ही जगह शिफ्ट हो जाएंगे। सोलर पैनल लगाने का काम जारी है, फोन-इंटरनेट केबल बिछाई जा रही है और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर लगाया जा रहा है। कई खूबियों वाली इस बिल्डिंग में सबसे बड़ा दोष यह निकला कि यहां परिषद का मीटिंग हॉल ही शामिल नहीं किया गया। अब इसके लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर पास में अलग से हॉल बनाने की तैयारी है। डिजाइन में यह हिस्सा शुरू से नहीं था।
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मीटिंग हॉल बनने तक बैठकें आईएसबीटी में होंगी
जब तक नया हॉल तैयार नहीं होता, तब तक परिषद की बैठकें आईएसबीटी में आयोजित की जाएंगी। जांच में यह सामने आया कि आरंभिक प्लान में ही हॉल को शामिल नहीं किया गया था। जिम्मेदारों के अनुसार, बिल्डिंग की मूल लागत 22 करोड़ थी, लेकिन काम बढ़ते-बढ़ते बजट 40 करोड़ तक पहुंच गया।
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निगम अध्यक्ष की सफाई
निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन में तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते परिषद हॉल को पहले चरण में शामिल नहीं किया गया। अब पास की जमीन लेकर नया हॉल बनाया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्किंग की वजह से फ्रंट ढंकने पर आपत्ति उठी है और सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते थे। शहर में यह मामला इंजीनियरिंग और प्लानिंग में हो रही लापरवाहियों का ताज़ा उदाहरण बन गया है, जिसने सरकारी निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
