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Bhopal: आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले, MP के आदिवासी अंचलों को बना दिया शराब तस्करों का अभयारण्य

Tue, 22 Apr 2025 07:33 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Tue, 22 Apr 2025 07:33 PM IST
सार

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों, खासकर गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा से लगे झाबुआ, अलीराजपुर, धार और रतलाम जैसे जिलों को शराब तस्करी के सुरक्षित कॉरिडोर और शराब तस्करों के अभयारण्य बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया।

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Bhopal: National President of Tribal Congress said, Tribal areas of MP have been made a sanctuary for liquor s
विक्रांत भूरिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों, खासकर गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा से लगे झाबुआ, अलीराजपुर, धार और रतलाम जैसे जिलों को शराब तस्करी के सुरक्षित कॉरिडोर और शराब तस्करों के अभयारण्य बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया। भूरिया ने कहा कि समय-समय पर बड़ी मात्रा में पकड़ी जाने वाली शराब इस बात का सबूत है कि माफियाओं द्वारा कितने बड़े पैमाने पर इस कारोबार को चलाया जा रहा है। अंदरखाने से आने वाली खोजी खबरें बता रही हैं कि मध्यप्रदेश के इस दक्षिणी-पश्चिमी अंचल में माफियाओं द्वारा भारत के सबसे बड़े शराब तस्करी सिंडिकेट का संचालन किया जा रहा है, जिसका सालाना टर्नओवर लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। क्या बिना राज्य सरकार, उसके नुमाइंदों, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत या संरक्षण के माफिया ऐसा कर सकते हैं?  
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एक ट्रक शराब पकड़ी गई
भूरिया ने कहा कि जोबट में अभी पिछले हफ्ते ही एक ट्रक से लगभग एक करोड़ रुपये की शराब पकड़ी गई। ऐसी कितनी खेपें हर महीने दूसरे राज्यों को भेजी जा रही हैं, इसका केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। भूरिया ने कहा कि हम सरकार से यह पूछना चाहते हैं कि यदि धार्मिक स्थलों पर शराब बंदी की जा सकती है, मंदिर-मस्जिदों के पास शराब दुकानें नहीं खुल सकती तो फिर आदिवासी इलाकों की समृद्ध विरासत, आस्था और संस्कृति क्या सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखती! क्या सरकार आदिवासियों को शराब की लत लगाना चाहती है, क्या वह उन्हें शराब पिला-पिला कर उनके भविष्य और जीवन को खत्म कर देना चाहती है। भूरिया ने कहा कि मीडिया की रिपोर्ट्स साफ तौर पर यह बता रही हैं कि गुजरात बॉर्डर से लगे झाबुआ और आलीराजपुर में शराब तस्करी के लिए 7 कॉरिडोर बना दिए गए हैं। वहां शराब दुकानों को गुजरात बॉर्डर से 400 मीटर से लेकर 5 किलोमीटर तक की दूरी पर खोला गया है, जिससे सुगमता से शराब तस्करी की जा सके। यह सारे रास्ते आदिवासी बहुल क्षेत्र में आते हैं। हमारा स्पष्ट आरोप है कि यह आदिवासियों के भविष्य और जीवन को बर्बाद करने के साथ ही उन्हें बदनाम करने की एक घिनौनी साजिश है।
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गुजरात से लगे सीमावर्ती गांवों में13 करोड़ रुपए में दिया ठेका
भूरिया ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण तथ्य है कि गुजरात से लगे सीमावर्ती गांवों में एक-एक शराब दुकान का ठेका 13-13 करोड़ रुपए में दिया गया है। सरकार की गणना के अनुसार, इस लिहाज से एक-एक व्यक्ति को सालाना लगभग 1 लाख रुपये की शराब पीनी होगी, जबकि उन इलाकों में 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बीपीएल के नीचे है। स्पष्ट नज़र आ रहा है कि उक्त दुकानों के ठेकेदारों ने गुजरात में शराब तस्करी के लिए ही इतनी ऊंची बोलियां लगाई हैं और यदि ऐसा नहीं है तो फ़िर इसका मतलब यह है कि सरकार गरीब आदमी के हाथ से रोटी छीन कर, उनके हाथों में बोतल थमाने की घृणित और नापाक योजना पर काम कर रही है। असलियत क्या है, सरकार को स्पष्ट करना चाहिये!  

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महुआ शराब को छोड़कर अन्य शराबों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध
भूरिया ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हमारी संस्कृति और हमारे भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हम सरकार से यह स्पष्ट मांग करते हैं कि वहां महुआ से बनने वाली शराब को छोड़कर अन्य शराबों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि महुआ हमारी परंपरा है पर नकली विदेशी शराब हमारे युवाओं को बर्बाद कर रही है। नकली होलोग्राम के साथ भी कई दुकानों पर शराब बेचे जाने के मामले सामने आए हैं, जिससे जहरीली शराब का खतरा भी मंडरा रहा है। हद तो यह है कि जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तब केवल ड्राइवरों पर ही एफआईआर होती है, मालिकों और उनके संरक्षक नेताओं पर आखिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? भूरिया ने कहा कि हमारी दृढ़ मान्यता है कि शराब माफ़या की सरकार से मिलीभगत और सांठ-गांठ है, उन्हें सत्ता और प्रशासन का पूरा संरक्षण है, क्योंकि इसके बिना टेंडर से लेकर तस्करी तक, एक संगठित नेटवर्क के तौर पर काम कर पाना संभव ही नहीं है। 
 
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