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Bhopal:हमीदिया में हुई लाइव सिटिंग डिलीवरी,प्रसूति ने कहा का नहीं हुआ दर्द, प्राकृतिक डिलीवरी पर हुई कार्यशाला

Tue, 10 Dec 2024 09:14 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Tue, 10 Dec 2024 09:14 PM IST
सार

राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आयोजित कार्यशाला में लाइव सिटिंग डिलीवरी कराई गई। यहां दो दिवसीय प्रकृतिक तरीके से डिलीवरी कराने को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

 

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Bhopal: Live sitting delivery took place in Hamidia, pregnant woman said that she did not feel any pain, works
कार्यशाला में पहुंचे विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देशभर में सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ाते केसों को कम करने के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान देशभर की 35 डॉक्टरों को प्राचीन तरीकों से होने वाली सिटिंग डिलीवरी की जानकारी दी गई। दूसरे दिन बुधवार को एक प्रसूति की लाइव सिटिंग डिलीवरी कराई गई। इसके बाद महिला ने कहा कि इस दौरान उन्हें काफी कम दर्द महसूस हुआ। इस दौरान प्रशिक्षक डॉ पूनम शिवकुमार,डॉ सुची जैन, डॉ बंगाल ने प्रशिक्षण और लाइव प्रदर्शन दिखाने में शानदार काम किया।
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सिजेरियन डिलीवरी में आएगी कमी 
गांधी मेडिकल कॉलेज की महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की एचओडी डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि दूसरे दिन वैकल्पिक प्रसव का लाइव प्रदर्शन किया गया। बैठी हुई स्थिति में महिला का प्रसव किया गया। जिसके बाद वह बहुत खुश थी, उसकी प्रतिक्रिया थी कि उसे कम दर्द और कम टांके लगे। उन्होंने बताया कि डॉ प्रीति कुमार मुख्य व्यक्ति हैं जिन्होंने जीएमसी भोपाल में इस कार्यशाला को करवाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से सीजेरियन की दर में कमी आएगी। जानकारी के मुताबिक यह कार्यशाला फोग्सी के अध्यक्ष डॉ. जयदीप टैंक और डॉ. प्रीति कुमार के प्रयासों के कारण संभव हुई।
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यह आर्ट ऑफ डिलीवरी है
फॉक्सी की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में 35 चिकित्सकों ने प्राकृतिक तरीके से डिलीवरी करने के तरीके सीखे हैं। अब यह ट्रेनर देश भर में जाकर दूसरे चिकित्सकों को प्राकृतिक तरीके से डिलीवरी करने के तरीके बताएंगे। इन दो दिनों में मुख्य तौर पर सीटिंग डिलीवरी पर फोकस किया गया। सिजेरियन डिलीवरी कम होंगे जिससे कॉम्प्लिकेशन भी कम होंगे। यह आर्ट ऑफ डिलीवरी है। पहले हमारे देश में इसी प्रकार से डिलीवरी कराई जाती थी बीच में कुछ वजह से इसमें ब्रेक आया है, लेकिन एक बार फिर से इस तरह के प्रयास किया जा रहे हैं। निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश शासन का भी इसमें सहयोग मिल रहा है आगे भी मिलेगा जिससे मध्य प्रदेश में सिजेरियन डिलीवरी को काम किया जाएगा और नॉर्मल डिलीवरी पर फोकस किया जाएगा।
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