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Bhopal Iztima: कल से भोपाल में चार दिन का मजहबी समागम, सैकड़ों निकाह होंगे, तैयारी पूरी; जानें क्या नया?

Thu, 28 Nov 2024 03:35 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: उदित दीक्षित Updated Thu, 28 Nov 2024 03:35 PM IST
सार

भोपाल में शुक्रवार सुबह फजिर की नमाज के बाद चार दिवसीय समागम का आगाज हो जाएगा।हमानों की जरूरतों और सुविधा के लिहाज से इज्ज़िमगाह पर सारी तैयारियों चाक चौबंद कर दी गई हैं।

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Bhopal Iztima News: Hundreds of Nikahs today four-day religious gathering to begin tomorrow
इस बार इज्तिमा में बाइक एंबुलेंस की सुविधा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

77 साल पुरानी आलमी तबलीगी इज्तिमा की तहरीर एक बार फिर दोहराने के लिए तैयार है। शुक्रवार सुबह फजिर की नमाज के बाद होने वाले बयान के साथ इस चार दिवसीय समागम का आगाज हो जाएगा। दोपहर में यहां नमाज ए जुमा अदा होगी। शाम को असिर की नमाज के सादगी के साथ सैकड़ों निकाह होंगे। इस बीच देश दुनिया से आए उलेमाओं के तकरीर और बयान का सिलसिला भी जारी रहेगा। देशभर से आईं हजारों जमाते अपनी आदम गुरुवार रात से देना शुरू कर देंगी। विदेशों से आए मेहमान भी अपनी कागजी खानापूर्ति करने के बाद समागम का हिस्सा बन जाएंगे। मेहमानों की जरूरतों और सुविधा के लिहाज से इज्ज़िमगाह पर सारी तैयारियों चाक चौबंद कर दी गई हैं।

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यह होगा पहली बार 
आलमी तबलीगी इज्तिमा के दौरान शामिल होने वाले लाखों जमातियों में बुजुर्ग और बीमार भी होते हैं। इसके मद्देनजर किसी मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहली बार बाइक एम्बुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। इज़्तिमा मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ उमर हफीज ने बताया कि इज्तिमा पांडालों से दूर खड़ी रहने वाली एंबुलेंस तक पहुंचने में बीमारों को अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस जरूरत के लिहाज से इस साल यह नई सुविधा शुरू की जा रही है। डॉ उमर ने बताया कि मोटर साइकिल के साथ एक स्ट्रेचर को अटैच करके खास तौर से यह बाइक एम्बुलेंस मोडिफाइड करवाई गई है। इसमें मरीज को लेटाने की सुविधा के साथ फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा भी जोड़ी है। जरूरत के लिहाज से इसमें ऑक्सीजन की व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से समय पर किसी मरीज को एंबुलेंस तक पहुंचाया जा सकेगा। जिससे उन्हें तत्काल अस्पताल तक पहुंचा कर मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जा सके। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इज्ज़िमगाह पर एलोपैथिक, आयुर्वैदिक, यूनानी आदि पद्धति के इलाज के लिए कई मेडिकल कैंप भी मौजूद रहेंगे।
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एक व्यवस्था, जो छिटक रही 
आलमी तबलीगी इज्तिमा के आयोजन को लेकर प्रदेश सरकार का हमेशा सकारात्मक रवैया रहा है। सड़क, पानी, बिजली समेत सुरक्षा आदि के प्रबंध में उच्च प्राथमिकता से यहां व्यवस्था दी जाती रही हैं। इसके अलावा 77 बरस के इस आयोजन में हर साल यहां आने वाले उलेमाओं से सरकार के शीर्ष नेताओं के मिलने और उनसे दुआएं लेने का रिवाज भी कायम रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा गंभीरता इस आयोजन को लेकर दिखाई है। वे हर साल उलेमाओं से मुलाकात के लिए भी पहुंचते थे और व्यवस्था पर भी उनकी गहरी रुचि और नजर रहा करती थी।
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मुख्यमंत्री नहीं आए
वर्ष 2017 के इज्तिमा के दौरान ऐन एक दिन पहले इज्ज़िमगाह पहुंचने के लिए उनके लिए खासतौर से हेलीपेड भी बनाया गया था। लेकिन, इसके बाद अगले साल चुनावी आचार संहिता के चलते वे इस आयोजन में नहीं पहुंच पाए। फिर सरकार बदल और इसके बाद कोविड की वजह से किए गए इज्तिमा के छोटे आकार ने भी किसी मुख्यमंत्री को उलेमाओं तक जाने से रोक लिया। इसके बाद से लगातार अब तक कोई भी मुख्यमंत्री इज्तिमागाह नहीं पहुंचा है। इस साल भी मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव फिलहाल विदेश यात्रा पर लंदन में हैं। ऐसे में उनके भी उलेमाओं से मुलाकात के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। हालांकि, तैयारियों के दौर में उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर को जरूर इज्तिमागाह भेजा था। साथ ही व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन को ताकीद कर रखी है।

बदल रही एक व्यवस्था 
इज्तिमा में शामिल होने के लिए देशभर से बड़ी तादाद में जमाती पहुंचते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश से बड़ी तादाद में आने वाले जमातियों के लिए एक स्पेशल ट्रेन भी आती रही है। कोविड के दौर में यह सिलसिला थम गया था। जिसके बाद से अब आंध्र प्रदेश से आने वाले जमाती अपनी निजी बसें लेकर यहां पहुंच रहे हैं। इज्तिमा का मजमा इकट्ठा होने से पहले पंडालों तक सामान पहुंचा देने वाली यह बसें  पूरे समय पार्किंग में रहती हैं। दुआ ए खास होने और पूरा मजमा खाली होने के बाद इन बसों को यहां से निकाला जाता है।


एक पैगाम सादगी का
करीब 77 बरस के इज़्तिमा के दौरान महंगी शादियों, दहेज जैसी बुराइयों और बड़ी दावतों पर बड़े खर्च को रोकने के लिए सादगी वाले निकाह भी इज़्तिमा के दौरान होते हैं। शुरुआती दौर में कम संख्या के साथ शुरू हुआ निकाह का सिलसिला अब सैकड़ों में है। इस साल इज़्तिमा में होने वाले निकाह की तादाद 350 से ज्यादा बताई जा रही है। इस लिहाज से अगर औसत निकाला जाए तो अब तक यहां 10 हजार से ज्यादा निकाह हो चुके हैं। लाखों लोगों की दुआओं के साथ होने वाले इस निकाह की कागजी खानापूर्ति लंबे अरसे तक शाहजहानाबाद हल्के के निकाहख्वाह काजी मुन्ने मियां अंजाम देते रहे हैं। उनके इंतकाल से कुछ समय पहले से उनके सहयोग के लिए हाफिज जुनैद अहमद भी जुड़ गए थे। आम दिनों में ली जाने वाली निकाह रजिस्ट्रेशन फीस में भी मसाजिद कमेटी कुछ रियायत देती है।

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