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उग्र हुआ इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन: भोपाल में सड़कों पर उतरे डॉक्टर, हमीदिया तक लगा लंबा जाम; एंबुलेंस भी फंसी
Tue, 08 Sep 2026 12:18 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:18 PM IST
सार
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन उग्र हो गया है। डॉक्टर सड़क पर बैठे हैं, जिससे पॉलिटेक्निक चौराहे से हमीदिया तक लंबा जाम लगा है और एंबुलेंस भी फंसी। हमीदिया में ओपीडी-ओटी प्रभावित हैं, जबकि इमरजेंसी चालू है। डॉक्टर अब घायल साथियों के मुआवजे, दोषियों पर कार्रवाई और पुलिस से माफी की मांग कर रहे हैं।
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सड़कों पर उतरे इंटर्न डॉक्टर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन मंगलवार को और उग्र हो गया। रातभर सड़क पर डटे डॉक्टर सुबह भी प्रदर्शन करते रहे। डॉक्टरों के सड़क पर बैठने से पॉलिटेक्निक चौराहे से हमीदिया अस्पताल तक लंबा जाम लग गया। जाम में मरीजों को लेकर आ रही एंबुलेंस भी फंस गईं। नर्मदापुरम से मरीज विनोद को लेकर आई एंबुलेंस जाम में फंस गई। एंबुलेंस में मरीज होने के बावजूद रास्ता साफ नहीं हो सका। इससे मरीज और उसके परिजन परेशान होते रहे। प्रदर्शन के कारण अस्पताल पहुंचने वाले अन्य मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हमीदिया में ओपीडी-ओटी प्रभावित
आंदोलन का असर हमीदिया अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर भी पड़ा है। नियमित ओपीडी और निर्धारित ऑपरेशन का बहिष्कार किया जा रहा है। कुछ डॉक्टर ओपीडी में मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। इससे अस्पताल की नियमित व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में इलाज दिया जा रहा है।
सड़क पर डॉक्टर, शहर में जाम
कमला पार्क के पास डॉक्टरों के सड़क पर बैठने से रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने कई रास्तों पर डायवर्जन किया। पुराने शहर की ओर जाने वाले रास्तों पर भी लोगों को परेशानी हुई। स्कूल बस और एंबुलेंस समेत कई वाहन जाम में फंसे। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने एंबुलेंस को रास्ता दिया। डॉक्टरों ने सड़क पर ही दोपहर का खाना खाया। पुलिस उन्हें सड़क खाली करने के लिए समझाती रही, लेकिन डॉक्टर मांगें पूरी होने तक हटने को तैयार नहीं हुए।
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उपमुख्यमंत्री से बातचीत, लेकिन लिखित आदेश पर अड़े डॉक्टर
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मामले में मुख्यमंत्री के लौटने के बाद चर्चा की जाएगी। सोमवार के प्रदर्शन में वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश और पुलिस कार्रवाई के मामले में कार्रवाई होने के बाद ही वे आंदोलन खत्म करेंगे।
वाटर कैनन के बाद बढ़ा विवाद
सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के आरोप लगाए, जबकि पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट पर धक्कामुक्की की स्थिति बनने के बाद वाटर कैनन चलाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन ने भी वाटर कैनन के इस्तेमाल को गलत बताया है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सरकार मांगें मानती है तो वे तत्काल काम पर लौटने को तैयार हैं। फिलहाल सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन लिखित आदेश नहीं मिलने तक आंदोलन खत्म होने के आसार नहीं हैं।
हमीदिया में मरीज घंटों कतार में
हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह प्रभावित रही। डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। कई मरीज तीन-चार घंटे तक कतार में खड़े रहे। पर्चे बनना बंद होने से परेशानी और बढ़ गई। जिन मरीजों के पर्चे बन चुके थे, उन्हें मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर देख रहे। एक ओर अस्पताल की नियमित ओपीडी और ओटी प्रभावित हैं, दूसरी ओर अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्ते पर जाम लगे रहे। एंबुलेंस के फंसने से आंदोलन का असर सीधे मरीजों तक पहुंच गया है।
स्टाइपेंड के साथ अब लाठीचार्ज पर भी जवाब
इंटर्न डॉक्टरों की मांग अब सिर्फ स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद डॉक्टरों ने घायल साथियों को मुआवजा, लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और पुलिस से माफी की मांग भी शुरू कर दी है। डॉक्टरों का कहना है कि वे करीब दो महीने से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन, अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने की कोशिश के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी खोला मोर्चा
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भोपाल के सचिव डॉ. अविनाश ठाकुर ने कहा कि प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री निवास तक मार्च के दौरान छात्रों पर वॉटर कैनन और लाठी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस कर रहे छात्रों पर इस तरह बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। प्रदेश का चिकित्सक समुदाय इंटर्न डॉक्टरों के साथ खड़ा है। मांगें नहीं मानी गईं और घायल डॉक्टरों को मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
ये भी पढ़ें- दिल्ली पीजी हादसा: जान गंवाने वाले अक्षत का पार्थिव शरीर पहुंचा कटनी, इकलौते बेटे को देख बिलख पड़े माता-पिता
ऑपरेशन भी प्रभावित
जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने से निर्धारित ऑपरेशन पर भी असर पड़ा।मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भोपाल के सचिव डॉ. अविनाश ठाकुर ने कहा कि ऑपरेशन टले हैं। जूनियर डॉक्टर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में कई ऑपरेशन में उनकी जरूरत होती है।
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हमीदिया में ओपीडी-ओटी प्रभावित
आंदोलन का असर हमीदिया अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर भी पड़ा है। नियमित ओपीडी और निर्धारित ऑपरेशन का बहिष्कार किया जा रहा है। कुछ डॉक्टर ओपीडी में मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। इससे अस्पताल की नियमित व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में इलाज दिया जा रहा है।
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सड़क पर डॉक्टर, शहर में जाम
कमला पार्क के पास डॉक्टरों के सड़क पर बैठने से रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने कई रास्तों पर डायवर्जन किया। पुराने शहर की ओर जाने वाले रास्तों पर भी लोगों को परेशानी हुई। स्कूल बस और एंबुलेंस समेत कई वाहन जाम में फंसे। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने एंबुलेंस को रास्ता दिया। डॉक्टरों ने सड़क पर ही दोपहर का खाना खाया। पुलिस उन्हें सड़क खाली करने के लिए समझाती रही, लेकिन डॉक्टर मांगें पूरी होने तक हटने को तैयार नहीं हुए।
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उपमुख्यमंत्री से बातचीत, लेकिन लिखित आदेश पर अड़े डॉक्टर
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मामले में मुख्यमंत्री के लौटने के बाद चर्चा की जाएगी। सोमवार के प्रदर्शन में वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश और पुलिस कार्रवाई के मामले में कार्रवाई होने के बाद ही वे आंदोलन खत्म करेंगे।
वाटर कैनन के बाद बढ़ा विवाद
सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के आरोप लगाए, जबकि पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट पर धक्कामुक्की की स्थिति बनने के बाद वाटर कैनन चलाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन ने भी वाटर कैनन के इस्तेमाल को गलत बताया है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सरकार मांगें मानती है तो वे तत्काल काम पर लौटने को तैयार हैं। फिलहाल सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन लिखित आदेश नहीं मिलने तक आंदोलन खत्म होने के आसार नहीं हैं।
हमीदिया में मरीज घंटों कतार में
हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह प्रभावित रही। डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। कई मरीज तीन-चार घंटे तक कतार में खड़े रहे। पर्चे बनना बंद होने से परेशानी और बढ़ गई। जिन मरीजों के पर्चे बन चुके थे, उन्हें मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर देख रहे। एक ओर अस्पताल की नियमित ओपीडी और ओटी प्रभावित हैं, दूसरी ओर अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्ते पर जाम लगे रहे। एंबुलेंस के फंसने से आंदोलन का असर सीधे मरीजों तक पहुंच गया है।
स्टाइपेंड के साथ अब लाठीचार्ज पर भी जवाब
इंटर्न डॉक्टरों की मांग अब सिर्फ स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद डॉक्टरों ने घायल साथियों को मुआवजा, लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और पुलिस से माफी की मांग भी शुरू कर दी है। डॉक्टरों का कहना है कि वे करीब दो महीने से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन, अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने की कोशिश के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी खोला मोर्चा
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भोपाल के सचिव डॉ. अविनाश ठाकुर ने कहा कि प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री निवास तक मार्च के दौरान छात्रों पर वॉटर कैनन और लाठी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस कर रहे छात्रों पर इस तरह बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। प्रदेश का चिकित्सक समुदाय इंटर्न डॉक्टरों के साथ खड़ा है। मांगें नहीं मानी गईं और घायल डॉक्टरों को मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
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ऑपरेशन भी प्रभावित
जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने से निर्धारित ऑपरेशन पर भी असर पड़ा।मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन भोपाल के सचिव डॉ. अविनाश ठाकुर ने कहा कि ऑपरेशन टले हैं। जूनियर डॉक्टर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में कई ऑपरेशन में उनकी जरूरत होती है।
