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भोपाल: बेटियों के नाम दान जमीन बैंक में गिरवी रखकर लिया 2 करोड़ का लोन, वसूली रोकने के लिए कराया मुकदमा

Thu, 15 Oct 2026 09:20 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 15 Oct 2026 09:20 AM IST
सार

भोपाल में बेटियों के नाम दान की गई जमीन को अपनी संपत्ति बताकर बैंक में गिरवी रखने और दो करोड़ रुपये का लोन लेने के आरोप में ईओडब्ल्यू ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच के मुताबिक, बैंक का 2.07 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। वसूली की कार्रवाई के दौरान बेटियों की ओर से जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए अदालत में मुकदमा भी दायर किया गया था।

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Bhopal: Builder Pledges Daughters' Donated Land for Rs 2 Crore Loan, EOW Files Fraud Case
ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल में बेटियों के नाम दान की गई जमीन को अपनी संपत्ति बताकर बैंक में गिरवी रखने और दो करोड़ रुपये का लोन लेने के आरोप में ईओडब्ल्यू ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी के खिलाफ एफआईटार दर्ज की है। जांच के मुताबिक, बैंक का 2.07 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। वसूली की कार्रवाई के दौरान बेटियों की ओर से जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए अदालत में मुकदमा भी दायर किया गया था। बेटियों के नाम जमीन दान करने के बाद उसी जमीन को अपनी संपत्ति बताकर बैंक में गिरवी रखने और दो करोड़ रुपये का लोन लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लोन चुकाने में नाकाम रहने पर बैंक ने जब वसूली की कार्रवाई शुरू की तो जमीन पर बेटियों का मालिकाना हक बताते हुए अदालत में मुकदमा दायर कर दिया गया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मामले की जांच के बाद भोपाल के बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पंजाब नेशनल बैंक का 2 करोड़ 7 लाख 86 हजार 807 रुपये से अधिक का बकाया है। ईओडब्ल्यू ने 14 अक्टूबर 2026 को अपराध क्रमांक 106/2026 दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की है। जीशान अली मेसर्स रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कोलोनाइजर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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2013 में बेटियों को दान की थी जमीन
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक, भोपाल के बावड़ियाकलां गांव में स्थित 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन जीशान अली के नाम थी। उन्होंने 10 जुलाई 2013 को हिबानामे यानी दान के दस्तावेज के जरिए यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी थी। इनमें से दो बेटियां उस समय नाबालिग थीं। जांच में यह भी सामने आया कि जीशान अली ने 20 फरवरी 2018 को बैंक के चीफ मैनेजर को लिखे पत्र में जमीन बेटियों के नाम करने की बात स्वीकार की थी। 
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दो साल बाद बैंक से लिया दो करोड़ का लोन
जांच के अनुसार, जमीन बेटियों के नाम करने के बावजूद सितंबर 2015 में बैंक के सामने इसे जीशान अली की संपत्ति बताया गया। बैंक की कानूनी जांच रिपोर्ट में जमीन को विवाद और दूसरे दावों से मुक्त बताया गया था। रिपोर्ट में नाबालिगों के हित से जुड़ी जानकारी भी दर्ज नहीं थी। इसके बाद 24 सितंबर 2015 को रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के लिए दो करोड़ रुपये की ओवरड्राफ्ट सीमा मंजूर की गई। इस कर्ज के लिए जीशान अली, उनकी पत्नी नाजनीन अली और उनकी मां निकहत शमीम गारंटर बने। इसी जमीन को बैंक के पास गिरवी रखा गया। नवंबर 2015 में जमीन का बंधक विलेख भी पंजीकृत कराया गया। 


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नाबालिग बेटी की संपत्ति के लिए पहले ली थी अदालत से अनुमति
ईओडब्ल्यू की जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। फरवरी 2015 में जीशान अली और नाजनीन अली ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज एक दूसरे प्लॉट को बेचने के लिए जिला न्यायालय से अनुमति ली थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इससे पता चलता है कि उन्हें नाबालिग की संपत्ति के संबंध में अदालत की अनुमति लेने की प्रक्रिया की जानकारी थी। इसके बावजूद आरोप है कि बेटियों के नाम की जमीन को बैंक में गिरवी रखते समय हिबानामे की जानकारी नहीं दी गई और आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई। 

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बैंक की वसूली से पहले बेटियों ने दायर किया मुकदमा
जांच के अनुसार, वर्ष 2017 में कंपनी का लोन खाता एनपीए हो गया। बैंक ने कर्ज की वसूली के लिए SARFAESI कानून के तहत 3 जनवरी 2018 को मांग नोटिस जारी किया। हालांकि, इससे पहले ही 4 अक्टूबर 2017 को बेटियों की ओर से अदालत में दीवानी मुकदमा दायर कर दिया गया था। इसमें जमीन को बेटियों की संपत्ति बताते हुए बैंक की वसूली कार्रवाई पर आपत्ति की गई थी। यह मुकदमा खारिज होने के बाद 10 सितंबर 2018 को ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (DRAT), इलाहाबाद में अपील दायर की गई। बैंक ने अदालत में अपने जवाब में इस मुकदमे को जीशान अली की मिलीभगत से की गई कार्रवाई बताते हुए 'प्रॉक्सी लिटिगेशन' कहा था। 

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बैंक के पक्ष में फैसला, फिर भी नहीं लौटी रकम
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), जबलपुर ने 8 मार्च 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वसूली प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके बावजूद बैंक को अब तक 2,07,86,807.48 रुपये से अधिक की राशि वापस नहीं मिली है। ईओडब्ल्यू ने पंजाब नेशनल बैंक, उप-पंजीयक कार्यालय भोपाल, डीआरटी जबलपुर और डीआरएटी इलाहाबाद के रिकॉर्ड की जांच के बाद जीशान अली और नाजनीन अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपी की मां और कर्ज की गारंटर निकहत शमीम की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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