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Bhopal: बच्चों में दूर का कम दिखने की बीमारी को समय से पहले AI एप करेगा डिटेक्ट, एम्स, मैनिट के साथ बनाएगा ऐप

Thu, 21 Nov 2024 06:30 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 21 Nov 2024 06:30 PM IST
सार

स्कूली बच्चों में दूर का कम दिनखे की बीमारी मायोपिया आम होती जा रही है। इसकी समय पर पहचान नहीं होने के कारण बच्चों को चश्मा लग जाता है। इसकी समय में पहचान करने के लिए एम्स और मैनिट मिल कर AI आधारित एप बनाएगा। ICMR से डेढ़ करोड़ अनुदान मिला है।

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Bhopal: AI app will detect early detection of poor vision in children, will develop app in collaboration with
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आधुनिक युग में स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों में आंखों की बीमारी सामने आ रही है। लगातार नई-नई तकनीकों का उपयोग के कारण बीमारियां बढ़ रही है। बचपन से ही बच्चों में चश्मा लगना आम हो गया हैं। अब राजधानी भोपाल स्थित एम्स बच्चों में दूर का कम दिखने की बीमारी मायोपिया का समय से पता लगाने के लिए एआई आधारित एक ऐप बनाने जा रहे हैं। इसके लिए एम्स भोपाल को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से 1.5 करोड़ रुपए का अनुदान मिला है। इस ऐप को बनाने में करीब 3 साल का समय लगेगा। एम्स भोपाल और मैनिट साथ मिलकर इस ऐप को डेवलप करेगा।
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मैनिट के साथ तीन साल में पूरा होगा शोध
इस परियोजना की प्रमुख एम्स नेत्र रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. प्रीति सिंह ने बताया कि यह शोध मैनिट, भोपाल के सहयोग से तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा। इस अध्ययन का उद्देश्य डिजिटल युग में बढ़ते मायोपिया के मामलों को समझना है, जो बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और बाहरी गतिविधियों की कमी के कारण तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि मायोपिया का समय पर पता लगाने से इसके स्पीड को धीमा करने और रोकथाम के उपाय लागू करने में मदद मिलेगी।
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5 जिलों के स्कूली बच्चों का किया जाएगा सर्वेक्षण 
परियोजना के तहत पांच जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के आधार पर एक एआई आधारित डिजिटल ऐप विकसित किया जाएगा, जो मायोपिया के स्पीड का पूर्वानुमान लगाने और इसे शुरुआती चरण में प्रबंधित करने में मदद करेगा। यह परियोजना एम्स भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आधुनिक तकनीक और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान को एक साथ लाकर नई चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद करेगी।
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नेत्र रोग विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि नेत्र रोग विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल  रिसर्च से 1.5 करोड़ रुपये का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। इस राशि से स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया बढ़ाने की प्रगति और पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरण विकसित करना है। डॉ. अजय सिंह ने बताया कि मायोपिया एक ऐसा दृष्टि दोष है जिसमें दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं, जबकि पास की चीजें साफ दिखती हैं।


स्कूली बच्चों में मायोपिया एक बड़ी समस्या 
 प्रो. सिंह ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया के बढ़ते मामले एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हैं। एआई आधारित उपकरण का विकास इस समस्या को रोकने और शुरुआती चरण में प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और अनुसंधान के प्रति एम्स भोपाल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बच्चों में मायोपिया का समय पर समाधान कर हम उनके जीवन को बेहतर बना सकते हैं।


 
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