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मध्यप्रदेश: परंपरा के नाम पर फिर हुई पत्थरबाजी, 400 लोग घायल, जानिए क्या है यह गोटमार मेला
Wed, 08 Sep 2021 02:26 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 08 Sep 2021 02:26 PM IST
सार
इस मेले में हर साल जाम नदी के तट पर सदियों पुरानी परंपरा के तहत दो गांव के लोग एक दूसरे पर पथराव करते हैं। जिसके कारण सैकड़ों लोग घायल हो जाते हैं।
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गोटमार मेला
विस्तार
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में वार्षिक गोटमार मेले के दौरान पत्थरबाजी के कारण 400 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें दो लोग अधिक गंभीर रूप से घायल हैं। अधिकारियों के अनुसार जिले के पांढुर्ना कस्बे के पास इस वार्षिक पथराव मेले के लिए 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों और 35 डॉक्टरों की एक टीम को तैनात किया गया था। यहां ड्रोन कैमरों की माध्यम से भी स्थिति की निगरानी की गई थी। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ जीसी चौरसिया के अनुसार मंगलवार को गोटमार मेले के दौरान 400 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें ज्यादातर नाबालिग हैं जबकि दो गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार के लिए नागपुर भेजा गया है।
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क्या है यह गोटमार मेला
गोटमार मेले का आयोजन जाम नदी के दोनों किनारों पर सावरगांव और पांढुर्ना गांव के लोग जमा होते हैं तथा एक पेड़ जिसके ऊपर झंडा लगा होता है उसे नदी के बीच में रखा जाता है। दोनों पक्ष एक दूसरे पर पथराव करते हुए पेड़ की ओर दौड़ लगाते हैं और जो पक्ष पहले झंडा फहरा लेता है उसे विजेता घोषित किया जाता है।
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क्यों मनाया जाता है गोटमार मेला
कुछ स्थानीय निवासी का कहना है कि पांढुर्ना के युवक और सावरगांव की युवती के आपस में प्रेम संबंध था। एक दिन प्रेमी युवक ने सावरगांव पहुंचकर युवती को भगाकर पांढुर्ना लाना चाहा जैसे ही दोनों जाम नदी के बीच पहुंचे तो सावरगांव के लोगों को देख लिया तो उन्होंने प्रेमी युगल को रोकने के लिए पत्थर बरसाए। अपने गांव के लड़के पर हमला होते देख पांढुर्ना गांव के लोगों ने भी सावरगांव के लोगों पर पत्थर बरसाए।
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