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एमपी के 12 जिलों में 20 से 59% कम बारिश: सोयाबीन-मक्का पर मार, किसान बोले- गेहूं की जगह चना लगाने की नौबत

Fri, 09 Oct 2026 02:46 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 09 Oct 2026 02:46 PM IST
सार

प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में कमी 12% रही। 12 जिलों में 20 से 59% तक कम बारिश दर्ज की गई है। किसानों ने मक्का में नुकसान और गिरते भूजल स्तर की समस्या बताई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने फसल सर्वे, राहत पैकेज और जलाशयों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने की मांग की है।

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12 districts in MP record 20–59% rainfall deficit: Soybean and maize crops hit hard; farmers say they may be f
कम बारिश से खराब हुई फसल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश की कमी ने किसानों के सामने रबी की फसल का संकट खड़ा कर दिया है। प्रदेश में पूरे सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश हुई, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी 12% तक रही। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से 20 से 59% तक कम बारिश दर्ज की गई है। अब सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे कराने की तैयारी कर रही है। इस बीच किसानों ने खरीफ फसलों में नुकसान, गिरते भूजल स्तर और सिंचाई के पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए राहत, वैकल्पिक फसलों के बीज और सिंचाई व्यवस्था की मांग की है। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा के किसान लखन गौर सोयत के मुताबिक, क्षेत्र में कम बारिश के कारण इस बार मक्का की फसल प्रभावित हुई है।
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लागत बढ़ी और उत्पादन में आई कमी
किसान लखन गौर के मुताबिक फसल आड़ी होने से लागत बढ़ गई और उत्पादन भी कम हुआ। अब नलकूपों का जलस्तर गिरने से आगामी रबी सीजन में गेहूं की बोनी और सिंचाई को लेकर चिंता है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी नहीं है, उन्हें गेहूं के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। गौर ने पंचायत स्तर पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को चने की जेजी 52, जेजी 18 और जेजी 24 जैसी किस्मों के बीज प्राथमिकता से दिए जाएं, ताकि पानी की कमी के बीच भी किसान रबी की फसल ले सकें।
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नेताप्रतिपक्ष ने सीएम को लिखा पत्र
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने, खरीफ फसलों का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है। सिंघार के अनुसार, धार में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 42% कम बारिश हुई है। इससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची और रबी की बोनी के लिए सिंचाई का संकट गहराने की आशंका है। सिंघार ने बाग विकासखंड में पाइपलाइन के जरिए नर्मदा नदी का पानी जलाशयों तक पहुंचाने की मांग भी की है। उमंग सिंघार ने धार के अलावा प्रदेश के दूसरे प्रभावित जिलों में भी सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार राहत देने की मांग की है। अब चुनौती सिर्फ खरीफ फसलों में हुए नुकसान का पता लगाने की नहीं, बल्कि रबी सीजन में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए समय पर बीज और सिंचाई के विकल्प उपलब्ध कराने की भी है।
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प्रदेश का औसत सुधरा, लेकिन कई जिलों में कमी बरकरार
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, पूरे मानसून सीजन में प्रदेश की बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई, लेकिन कई जिलों में कमी बनी रही। अगस्त की शुरुआत में प्रदेश सामान्य से 19% पीछे था। बाद में हुई बारिश से औसत में सुधार आया, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं बरसा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर में सामान्य से करीब 50%, धार में 39%, रतलाम में 34% और इंदौर व उज्जैन में 26-26% कम बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में भी कमी रही, जबकि सागर, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई। बारिश की कमी का असर सोयाबीन, मूंग, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों पर कितना पड़ा, यह खेतों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद ही स्पष्ट होगा। सोयाबीन में नमी की कमी से फलियों के विकास और दाने भरने पर असर पड़ सकता है, जबकि मक्का की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल बारिश के आंकड़ों के आधार पर पूरे जिले या प्रदेश में फसल नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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सर्वे के बाद तय होगी नुकसान की स्थिति
कम बारिश वाले 12 जिलों में सर्वे के जरिए फसलों की स्थिति और संभावित नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। किसानों की मांग है कि सर्वे में देरी न हो और नुकसान के आकलन के साथ राहत, बीज तथा सिंचाई के इंतजाम भी किए जाएं। मानसून की विदाई के बाद पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अगले तीन दिन गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले पांच दिन मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। ऐसे में कम बारिश वाले पश्चिमी जिलों में रबी की बोनी से पहले मिट्टी की नमी और सिंचाई के उपलब्ध साधनों का आकलन किसानों के लिए अहम होगा।
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