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भोपाल में जेल और हिरासत में पीटा, मौत: कोर्ट का 7 साल बाद TI, जेलर, डॉक्टर समेत 8 पर हत्या का केस दर्ज करने आदेश 

Fri, 13 May 2022 09:25 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Fri, 13 May 2022 09:25 AM IST
सार

राजधानी भोपाल में कोर्ट ने 7 साल पुराने हिरासत में मारपीट के मामले में जेलर, डॉक्टर, टीआई, सब इंस्पेक्टर और चार सिपाहियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपियों को 27 जून को कोर्ट के सामने पेश समन जारी किया है।

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Bhopal Jail and beaten up in custody, death: Order to file murder case on 8 including TI, Jailor, Doctor in 7 year old case
भोपाल में कोर्ट ने पुलिस, डॉक्टर, जेलर समेत 8 पर हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में कोर्ट ने 7 साल पुराने हिरासत में मारपीट के मामले में जेलर, डॉक्टर, टीआई, सब इंस्पेक्टर और चार सिपाहियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपियों को 27 जून को कोर्ट के सामने पेश समन जारी किया है।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भोपाल स्नेहा सिंह ने मृतक मोहसीन के केस में फैसला सुनाया। इसमें आरोपी तत्कालीन टीटी नगर थाने के टीआई मनीष राज भदौरिया, एसआई डीएल यादव, सेंट्ल जेल के जेलर हमीदिया अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आनंद साह, क्राइ म ब्रांच भोपाल के सिपाही एहसान, मुरली, दिनेश, चिरौंजी पर हत्या तथा साक्ष्य मिटाने, षड्यंत्र करने की धारा में केस दर्ज करने के आदेश दिए गए है। पीड़त पक्ष के तरफ से वकील यावर खान ने पैरवी की। सभी को कोर्ट ने समन जारी कर 27 जून को पेश होने के लिए कहा है।

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यह है मामला

क्राइम ब्रांच के सिपाही एहसान, मुरली, दिनेश व चिरौंजी ने मोहसीन को 4 जून 2015 को लूट के एक प्रकरण में पकड़ा और थाने ले गए। मृतक की मां सीमा ने बताया कि अगले दिन मिलने जाने पर मोहसीन ने बताया कि चारों सिपाही ने उसके साथ रात भर मारपीट की। उसे करंट लगाया गया, रात भर हेलमेट पहना कर और हाथ-पैर को रस्सी से बांध कर रखा गया। सीमा से मोहसीन को छोड़ने के लिए रुपयों की मांग की गई। फिर उसे टीटी नगर थाने को सौंप दिया गया, जहां भी टीआई और एसआई ने उसके साथ मारपीट की।  यहां से मोहसीन को जेल भेद दिया गया, जहां उसके साथ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आनंद साह और जेलर ने मारपीट की। डॉक्टर ने जानबूझकर इलाज नहीं किया। डॉक्टर ने कूटरचित पागल होने के पर्चे बनाकर उसे 23 जून को ग्वालियर भेज दिया गया। जहां उसी दिन उसकी मौत हो गई। मोहसीन के परिजनों ने मामले की जांच की मांग की।

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जांच रिपोर्ट जेल और पुलिस के खिलाफ

वकील यावर खान ने बताया कि 6 फरवरी 2017 को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विपीन्द्र यादव ने मोहसीन के मामले में जांच प्रतिवेदन पेश किया। इसमें सामने आया कि गिरफ्तारी के समय मोहसीन शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य था। हिरासत के साथ उसके साथ मारपीट करना पाया गया। उसे कोई प्राण घातक बीमारी भी नहीं होना पाया गया। साथ ही रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मोहसीन को ग्वालियर भेजते समय जेल की सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

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