एमपी: बैतूल में सूखे का संकट गहराया, 50% पानी वाले जलाशय सिर्फ पेयजल के लिए रिजर्व; क्या बोले हेमंत खंडेलवाल?
बैतूल में कम बारिश से जलाशयों में पानी की कमी के कारण सूखे का संकट गहरा गया है। 50 प्रतिशत पानी वाले जलाशय पेयजल के लिए रिजर्व रहेंगे, जबकि 75 प्रतिशत वाले जलाशयों से रबी में एक बार सिंचाई होगी।
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बैतूल जिले में इस साल कम बारिश के कारण सूखे का संकट गहराने लगा है। जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम है, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। हालात को देखते हुए बुधवार को जिले के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की अहम बैठक हुई। बैठक में रबी सीजन में जलाशयों के पानी के उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
बैठक में तय किया गया कि जिन जलाशयों में 50 प्रतिशत ही पानी बचा है, उन्हें पूरी तरह पेयजल के लिए रिजर्व रखा जाएगा। इन जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जाएगा। वहीं, जिन जलाशयों में 75 प्रतिशत पानी उपलब्ध है, वहां से किसानों को रबी सीजन में केवल एक बार सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जलाशयों के पानी में पहली प्राथमिकता पेयजल की होगी और इसके बाद ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
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इसके साथ ही किसानों से कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन करने की अपील की जा रही है। गेहूं और चना जैसी फसलों में पानी की अधिक जरूरत होती है। ऐसे में किसानों को दलहन और कम पानी वाली फसलों की ओर जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि सीमित जल संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सके।
इधर, बैतूल जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी तेज हो गई है। इस संबंध में सरकार से चर्चा चल रही है। बैतूल विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पिछले 20 साल में पहली बार जिले में पानी को लेकर इतनी भयावह स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि इस बार जिले में मानसून कमजोर रहा, जिसके कारण जलाशय पूरी तरह नहीं भर पाए।
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संकट की इस स्थिति में जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। किसानों को हरसंभव मदद दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही पेयजल संकट से निपटने के लिए भी पहले से योजना बनाई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से पानी का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की है।
