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Shahdol: हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीण घर छोड़ने को मजबूर, पार्क प्रबंधन व वन विभाग नहीं उठा रहा ठोस कदम
Mon, 12 Jun 2023 04:58 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 12 Jun 2023 04:58 PM IST
सार
हाथियों की दहशत के कारण लोग घर छोड़ पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी वन विभाग और बांधवगढ़ नेशनल पार्क प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।
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शहडोल के ग्रामीण इलाकों में हाथियों की दहशत है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के ब्योहारी विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में इन दिनों जंगली हाथियों का आतंक है। हाथियों की दहशत के कारण यहां रहने वाले लोग घर छोड़ पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी वन विभाग और बांधवगढ़ नेशनल पार्क प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।
बता दें कि ब्योहारी क्षेत्र के कुछ गांवों की सीमा बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सटी हुई है। इन गांवों मे रेउसा, गोरीघाट व पथरहा शामिल है। जहां जंगली हाथियों ने फिर से डेरा जमा लिया है। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों को हर पल खतरा बना रहता है। ग्रामीणों द्वारा इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी जा चुकी है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
जंगली हाथियों की वजह से ग्रामीणों की रात दहशत में बीतती है। लोग अपने परिवार के साथ घर छोड़कर दूसरी जगह रहने मजबूर हैं। हाथी प्रभावित इन गांवों में जंगली हाथियों का मूवमेंट लगातार बना हुआ है। इसके बाद भी पार्क प्रबंधन व वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। आए दिन हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में घुस आते हैं और बड़े पैमाने पर ग्रामीणों का नुकसान करते हैं। पिछली बरसात में भी हाथियों ने इन गांव में बड़े पैमाने पर नुकसान किया था, जिसका मुआवजा अब तक ग्रामीणों को नहीं दिया गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के मूवमेंट की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी जाती है तो वह कोई जवाब नहीं देते हैं। बीट प्रभारी को इस संबंध में बताया गया तो उनका कहना है कि वे निलंबित हैं कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथी कभी भी आ जाते हैं। हमारी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं और मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। पूरा परिवार दहशत में रात गुजारता है। कब कहां से हाथी आ जाए और उनके ऊपर हमला कर दे कहा नहीं जा सकता है ।
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बता दें कि ब्योहारी क्षेत्र के कुछ गांवों की सीमा बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सटी हुई है। इन गांवों मे रेउसा, गोरीघाट व पथरहा शामिल है। जहां जंगली हाथियों ने फिर से डेरा जमा लिया है। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों को हर पल खतरा बना रहता है। ग्रामीणों द्वारा इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी जा चुकी है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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जंगली हाथियों की वजह से ग्रामीणों की रात दहशत में बीतती है। लोग अपने परिवार के साथ घर छोड़कर दूसरी जगह रहने मजबूर हैं। हाथी प्रभावित इन गांवों में जंगली हाथियों का मूवमेंट लगातार बना हुआ है। इसके बाद भी पार्क प्रबंधन व वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। आए दिन हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में घुस आते हैं और बड़े पैमाने पर ग्रामीणों का नुकसान करते हैं। पिछली बरसात में भी हाथियों ने इन गांव में बड़े पैमाने पर नुकसान किया था, जिसका मुआवजा अब तक ग्रामीणों को नहीं दिया गया।
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ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के मूवमेंट की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी जाती है तो वह कोई जवाब नहीं देते हैं। बीट प्रभारी को इस संबंध में बताया गया तो उनका कहना है कि वे निलंबित हैं कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथी कभी भी आ जाते हैं। हमारी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं और मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। पूरा परिवार दहशत में रात गुजारता है। कब कहां से हाथी आ जाए और उनके ऊपर हमला कर दे कहा नहीं जा सकता है ।
