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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Balaghat News ›   The spate of deaths in Balaghat shows no signs of abating; two young children have died due to malaria.

बालाघाट में दो और मासूमों की मौत: बैगा आदिवासी क्षेत्रों में आंकड़ा 29 पहुंचने का दावा; व्यवस्था पर उठे सवाल

Sat, 29 Aug 2026 08:56 PM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट Published by: बालाघाट ब्यूरो Updated Sat, 29 Aug 2026 08:56 PM IST
सार

बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में दो और मासूमों की मौत से हड़कंप है। काजल में मलेरिया की पुष्टि हुई थी। हिमांशु का झोलाछाप से इलाज चल रहा था। दावा है कि 18 मई से अब तक बच्चों की मौत का आंकड़ा 29 पहुंच गया है।

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The spate of deaths in Balaghat shows no signs of abating; two young children have died due to malaria.
बालाघाट जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को दो और बच्चों की मौत की खबर सामने आई। परसवाड़ा ब्लॉक के मोहनपुर निवासी 10 वर्षीय काजल और बैहर ब्लॉक के गोगाटोला-भंडेरी निवासी 2 वर्षीय हिमांशु ने दम तोड़ दिया। काजल की जांच में मलेरिया की पुष्टि हुई थी।

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जानकारी के अनुसार, काजल की तबीयत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए पहले बालाघाट ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे गोंदिया रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं हिमांशु के परिजन उसका घर पर ही एक झोलाछाप से इलाज करा रहे थे।

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इन दो मौतों के बाद जिले के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला और गंभीर हो गया है। दावा किया जा रहा है कि 18 मई से अब तक बच्चों की मौत का आंकड़ा 29 तक पहुंच गया है। इससे पहले धामनगांव की 4 वर्षीय माही मरकाम और मोहनपुर बैगाटोला के 4 वर्षीय लवकुश की मौत भी सामने आ चुकी है।

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लगातार हो रही मौतों के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और बच्चों को मिल रहे पोषण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। गंदे पानी, मलेरिया और अन्य बीमारियों के बीच कुपोषित बच्चों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशासन ने पहले कार्रवाई करते हुए अधिकारियों पर कार्रवाई की थी और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने दो अधिकारियों को निलंबित भी किया था, लेकिन इसके बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है।

संयोग से शनिवार को ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट दौरे पर पहुंचे। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों का भ्रमण किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, पोषण और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर चर्चा करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा भी दिलाया।

हालांकि, मुख्यमंत्री के दौरे वाले दिन ही दो और मासूमों की मौत की खबर सामने आने से स्थिति को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत का सिलसिला कब रुकेगा और स्वास्थ्य व पोषण व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे।

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