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भोपाल में बोले पुरातत्वविद केके मुहम्मद: मंदिरों को तोड़कर बनाई गई कुतुब मीनार के पास बनी कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद

Tue, 19 Apr 2022 05:35 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 19 Apr 2022 05:35 PM IST
सार

कुतुब मीनार परिसर में बनी मस्जिद को लेकर मशहूर पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने बड़ा बयान दिया है। उनका दावा है कि ये मस्जिद 27 मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है। 

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Archaeologist KK Muhammad said in Bhopal: Quwwat-ul-Islam Mosque built near Qutub Minar after demolishing temples
प्रख्यात पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

प्रख्यात पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन विरासत को सहेजने के मामले में मौजूदा भाजपा सरकार के पास विजन की कमी है। विरासतों को सहेजने का काम ठप है। बटेश्वर में जो खंडहरों से 80 मंदिर बनकर तैयार हुए वे सब कांग्रेस शासन में खड़े हो सके।
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एक मीडिया हाउस से बातचीत में केके मुहम्मद ने कहा कि कुतुब मीनार के पास बनी कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण मंदिरों को तोड़कर किया गया। मैं काफी समय से बोल रहा हूं कि कुव्वत उल इस्लाम जो है, वह मंदिरों को तोड़ कर ही बनाई गई है। उसमें अगर आप जाएंगे तो बहुत सारी मूर्तियां उसमें आज भी मिलेंगी। उसमें गणेशजी और विष्णुजी और भी बहुत सारी मूर्तियां हैं। कुव्वत उल इस्लाम से पहले वहां शुद्ध रूप से हिंदू और जैन स्ट्रक्चर था। 27 मंदिरों को तोड़कर इसका निर्माण किया गया। मंदिरों को तोड़ने का काम 1192 में, जब हमला हुआ था तभी से शुरू हो गया था। जब पृथ्वीराज चौहान को मोहम्मद गौरी ने हराया था। कुतुब मीनार पूरी तरह से इस्लामिक स्ट्रक्चर है। कुतुब मीनार जैसा स्ट्रक्चर इन्होंने काजासिया पोश, सियापोस, काजा में बनाया था। कुतुब मीनार परिसर में जो कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद है। वह 1193 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 प्रचीन मंदिरों को ध्वस्त कर उन्हीं के पत्थरों से बनाई थी। अरबी में इसका शिलालेख भी मौजूद है। यहां सैकड़ों प्रतिमाएं दफन हैं। उन्होंने कम्युनिस्ट इतिहासकारों पर गलत इतिहास परोसने का भी आरोप लगाया।
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मोहम्मद ने कहा कि भारत सेक्युलर देश है तो इसकी सबसे बड़ी वजह हिंदू बहुल आबादी है। यदि मुस्लिम बहुल आबादी होती तो यह कभी सेक्युलर नहीं रह पाता। राम मंदिर निर्माण में देरी के लिए वामपंथी इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब, रोमिला थापक और आरए शर्मा जिम्मेदार हैं, उन्होंने ही मुस्लिमों को बरगलाया। जबकि मुसलमानों का बड़ा तबका राम मंदिर के लिए जमीन देने के लिए काफी पहले तैयार हो गया था।
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खरगोन और अन्य जगहों में हुई हिंसा के बारे में केके मोहम्मद ने कहा, 'कम्युनिस्ट बुरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं। उन लोगों ने हिन्दू-मुसलमानों में अलगाव पैदा किया। बाद में ऐसा लगा सब कुछ सही होगा। फिर उन्होंने उसे बिगाड़कर अलग तरीके से चला दिया, यह सब उसका ही दुष्परिणाम है'।
 
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