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Anuppur News: फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सरपंच-सचिव-पटवारी और तीन अन्य को 4 साल की जेल, जुर्माना भी ठोका

Fri, 22 Aug 2025 09:31 PM IST
अनूपपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर Published by: अनूपपुर ब्यूरो Updated Fri, 22 Aug 2025 09:31 PM IST
सार

फर्जी गोड जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में सरपंच, सचिव, पटवारी व तीन अन्य को चार-चार साल के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा प्रधान जिला न्यायाधीश ने सुनाई। लोक अभियोजक ने 17 साक्षी व 107 दस्तावेज पेश किए। 

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Sarpanch, secretary, patwari and 3 others sentenced to 4 years in jail in fake caste certificate case
जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय अनूपपुर की फोटो

विस्तार

आपराधिक षड्यंत्र रचकर गोड जाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने वाले आरोपी सरपंच, सचिव एवं हल्का पटवारी तथा फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वाले तीन अन्य आरोपियों को 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं जुर्माना की सजा जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाई है।

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लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला चचाई थाना क्षेत्र का है, जहां 27 अप्रैल 2014से 16 जुलाई 2019 के मध्य बसंतपुर दफाई अमलाई में सरपंच यदुराज पनिका, सचिव जितेन्द्र प्रजापति, हल्का पटवारी शैलेन्द्र शर्मा के साथ मिलकर तथा आपराधिक षड्यंत्र रचा। यह जानते हुए कि बसंतपुर काॅलरी की अभियुक्त रमा गिरी तथा उसकी पुत्रियां प्रियंका एवं मधु गोड जाति की नहीं हैं, षडयंत्र पूर्वक उसकी दोनों पुत्रियों प्रियंका और मधु का गोड जाति होने का ग्राम पंचायत से जाति प्रमाण पत्र व सेजरा का प्रतिवेदन बनाया गया। दस्तावेजों के आधार पर एसडीएम कार्यालय अनूपपुर कार्यालय से अभियुक्त प्रियंका एवं मधु की गोड जाति का फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया और शासकीय सुविधाओं का लाभ अर्जित किया तथा लोगों को हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी देकर पैसों की ब्लैकमेंलिग की।
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फरियादी श्रीनिवास तिवारी ने इस मामले पर शिकायत दर्ज कराई। इसमें अपराध दर्ज करते हुए मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से पैरवी करते हुए लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने न्यायालय के समक्ष 17 साक्षियों की साक्ष्य कराई एवं 107 दस्तावेजों को प्रदर्शित कराया। आरोपियों ने भी अपने पक्ष में 1 साक्ष्य एवं 08 दस्तावेज प्रस्तुत किए। न्यायालय प्रकरण की सुनवाई करते हुए और शासन की और पैरवी कर रहे लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा के रखे गए तर्कों और बहस एवं मामले की गम्भीरता एवं परिस्थितियों को देखते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने आरोपियों को चार वर्ष के सश्रम कारावास एवं दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया है। 

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