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Anuppur: मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई आस्था की डुबकी, पूजा-अर्चना कर प्राप्त किया पुण्य लाभ
Sun, 14 Jan 2024 07:12 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sun, 14 Jan 2024 07:12 PM IST
सार
पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व बह्मा, विष्णु, महेश, गणेश सहित आदि शक्ति और सूर्य की उपासना एवं आराधना का पावन व्रत माना जाता है।
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नर्मदा घाट में जुटे श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
सूर्यदेव उत्तरायण की पौराणिक मान्यताओं का मकर संक्रांति का पावन पर्व रविवार को श्रद्धा और हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। 14 जनवरी को जिले की पवित्रनगरी अमरकंटक के नर्मदा सहित जिला मुख्यालय के सोन-तिपान नदी संगम पर श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। राजेन्द्रग्राम, कोतमा, जैतहरी, राजनगर, बिजुरी सहित अन्य क्षेत्रों से गुजरती नर्मदा, सोन, जुहिला, तिपान, केवई सहित अन्य नदियों के घाटों पर भी लोगों ने स्नानकर इष्टदेवों की विशेष पूजा अर्चना की।
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मकरसंक्रांति के अवसर पर जिले के अनेक स्थानों पर मेले का भी आयोजन किया गया है। पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व बह्मा, विष्णु, महेश, गणेश सहित आदि शक्ति और सूर्य की उपासना एवं आराधना का पावन व्रत माना जाता है। संत महर्षियों के अनुसार इनके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है। संकल्प शक्ति बढ़ती है, ज्ञान का विकास होता है। मकर संक्रांति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है।
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अन्य मान्यताओं में गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में मिली थीं। इसलिए मकर संक्राति पर गंगा-सागर में मेला लगता है।
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मकर संक्रांति पर्व के मौके पर रविवार की सुबह पावन नगरी अमरकंटक में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा उद्गम कुंड में डुबकी लगाकर माता नर्मदा का पूजन अर्चन किया। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया। प्रदेश की जीवनदायिनी नदी मां नर्मदा का उद्गम स्थल होने के कारण इस दिन यहां देश-प्रदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालु एवं पर्यटक पूजा अर्चना के साथ मेले में पहुंचे। इन दिनों अमरकंटक में अत्याधिक ठंड पड़ती है, जिसके कारण दूधधारा, कपिलधारा से निकलने वाली दूधिया भाप पर्यटकों के आकर्षित करती है।
कुबेरेश्वरधाम में तिल-गुड़ के 51 सौ लड्डू और पांच क्विंटल खिचड़ी का वितरण
सीहोर में हर साल की तरह इस साल भी जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को मकर संक्रांति महापर्व का दो दिवसीय कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया। इस मौके पर सुबह 51 सौ से अधिक लड्डू और करीब पांच क्विंटल से अधिक खिचड़ी का भोग लगाकर यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को वितरण किया। सोमवार को भी धाम पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा और यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को तिल-गुड़ के लडडू और खिचड़ी का वितरण का सिलसिला चलता रहेगा।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने उड़ाई पतंग
रविवार को सुबह मंदिर परिसर के पीछे भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा अचानक पहुंचे। यहां पर पहले से ही बच्चे पतंग उड़ा रहे थे, उनके अनुरोध पर कुछ देर के लिए पतंगबाजी की। पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ यहां पर मौजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सुबह आरती की और उसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
भागवत भूषण पंडित मिश्रा ने कहा कि मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है, इस दिन सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू करता है। इसलिए इस दिन को सूर्योत्तरायण भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है, इसलिए मकर संक्रांति को सूर्य देवता का पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है।
