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मध्य प्रदेश: फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे लोगों पर हो कार्रवाई, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Mon, 08 Nov 2021 08:57 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: सुभाष कुमार Updated Mon, 08 Nov 2021 08:57 PM IST
सार

आवेदक का आरोप है कि जिन लोगों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र व मूल निवासी लगाकर नौकरी हासिल की है, वे उप्र बांदा के निवासी है, लेकिन उन्होने अपने आप को अजयगढ़ का निवासी बताया।

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Action should be taken against people doing jobs on the basis of fake certificates, High Court issued notice and sought answer
जनहित याचिका बहादुरगंज निवासी देशराज प्रजापति की ओर से दायर की गई है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी करने संबंधी मामले में दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट होने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाले जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर मामले में राहत चाही गई है कि उक्त पूरे मामले की न्यायिक जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। चीफ जस्टिस आरव्ही मलिमथ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

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यह जनहित याचिका पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के बहादुरगंज निवासी देशराज प्रजापति की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि अजयगढ़ तहसील अंतर्गत पटवारी व स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों में करीब 80 से अधिक लोग फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे है। आवेदक का कहना है दो दशक पूर्व हुई शिकायत पर मुख्य सचिव ने पन्ना कलेक्टर को जांच के निर्देश दिये थे। 
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वर्ष 2004 में कलेक्टर ने अपनी जांच रिपोर्ट भेजते हुए कहा था कि सर्टिफिकेट फर्जी है, कार्रवाई की जानी चाहिये। जिसके बाद मुख्य सचिव ने एक स्क्रूटनी कमेटी गठित कर दी, जिसका हेड एसपी पन्ना को बनाया गया। आरोप है कि स्कू्रटनी कमेटी सभी दोषियों को बरी कर अपनी रिपोर्ट सीएस  को भेज दी, जिसके बाद उन्होने उक्त रिपोर्ट पर पन्ना कलेक्टर को किसी प्रकार की कार्रवाई न करने के निर्देश दिये। 
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आवेदक का आरोप है कि जिन लोगों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र व मूल निवासी लगाकर नौकरी हासिल की है, वे उप्र बांदा के निवासी है, लेकिन उन्होने अपने आप को अजयगढ़ का निवासी बताया। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि जब कलेक्टर ने अपनी जांच रिपोर्ट में फर्जी होना पाया था तो स्क्रूटनी कमेटी की रिपोर्ट में सभी को क्लीनचिट कैसे दे दी गई। उक्त पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए उक्त मामला दायर किया गया है। जिसमें मप्र शासन के प्रमुख सचिव, आयुक्त शेड्यूल कॉस्ट वेलफेयर विभाग, सचिव राज्य शेड्यूल कॉस्ट कमिश्रर, संभागायुक्त सागर, पन्ना कलेक्टर व एसपी को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार बाजपेयी ने पक्ष रखा।

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