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किस 'रहस्यमय' बीमारी से एक एक कर मर रहे व्यापमं के आरोपी

Mon, 29 Jun 2015 05:13 PM IST
Updated Mon, 29 Jun 2015 05:13 PM IST
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25 accused killed of mysterious illness in vyapam scam from madhya pradesh

मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले ने एक हजार अवैध भर्तियों के खुलासे के कारण बेशक देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा हो लेकिन फिलहाल यह हाईप्रोफाइल घोटाला इसके आरोपियों की एक-एक कर मौत के कारण कुख्यात हो चुका है।

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अधिकारिक आंकडों पर यकीन करें तो अभी तक 25 लोग एक के बाद एक रहस्यमय परिस्थितियों में मौत की नींद सो चुके हैं। जबकि विपक्ष की मानें तो 40 से ज्यादा लोग इस घोटाले की भेंट चढ़ चुके हैं।
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इनमें से ज्यादातर की मौत किसी रहस्यमय बीमारी के कारण हुई है लेकिन हैरतअंगेज रूप से अभी तक यह पता नहीं लग पाया है कि यह बीमारी है क्या।

इस बीमारी का पता भी मौत से एक दो दिन पहले ही चलता है और इससे पहले की कोई कुछ समझ पाए आरोपी मौत की नींद सो चुका होता है।

48 घंटे में दो आरोपियों की रहस्यमय बीमारी से मौत

25 accused killed of mysterious illness in vyapam scam from madhya pradesh

पिछले 48 घंटे में व्यापमं के दो आरोपियों की लगातार मौत के बाद एक बार फिर यह मामला गर्मा गया है। मरने वालों के बारे में दावा किया जा रहा है कि दोनों की मौत 'किसी' बीमारी से हुई है। इनमें से इंदौर जेल में बंद डॉ नरेन्द्र तोमर की तो जेल में बंद रहने के दौरान ही मौत हो गई।

उन्हें किसी बीमारी के कारण तबियत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई। बीमारी क्या थी इस पर साफ साफ न जेल प्रशासन बोल रहा है न अस्पताल। नरेन्द्र के भाई ने आरोप लगाया है कि उसने एक दिन पहले ही अपनी बहन से बात की थी और उस समय अपनी बीमारी के बारे में कुछ नहीं बताया था, वह पूर्णतः स्वस्‍थ लग रहा था।

वहीं ग्वालियर निवासी राजेन्द्र आर्या भी व्यापमं घोटाले में आरोपी थे और सालभर से जमानत पर रिहा चल रहे थे। बताया जाता है कि वह किसी काम से कोटा गए हुए थे, जहां से बीमारी की हालत में वह घर लौट रहे ‌थे। घर पहुंचते-पहुंचते उन्होंने भी दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार आर्या के घरवालों ने यह तो बताया कि वह किसी बीमारी से पीड़ित थे लेकिन बीमारी कौन सी थी इसके बारे में वह नहीं बता सके।

ऐसे में सवाल इसलिए भी खड़ा होता है कि अगर उन्हें ऐसी गंभीर बीमारी थी जिससे उनकी मौत हो सकती थी तो वो अकेले कोटा कैसे और क्यों गए? दोनों की मौत बेशक किसी बीमारी से ही हुई लेकिन कौन-सी इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के आरोपी बेटे की भी हुई संदिग्‍ध मौत

25 accused killed of mysterious illness in vyapam scam from madhya pradesh

इससे पहले सबसे सनसनीखेज मौत हुई थी मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की, जो लखनऊ में सरकारी बंगले में मृत पाए गए थे। व्यापमं घोटाले में आरोपी शैलेश्‍ा यादव की मौत भी किसी अज्ञात बीमारी से ही हुई थी लेकिन किससे यह आज तक राज बना हुआ है।

पहले भी कई लोग इसी तरह 'रहस्यमय' बीमारी के कारण मौत की नींद सो चुके हैं लेकिन इस बीमारी के बारे में आज तक कोई पता नहीं लगा सका है। गौरतलब है कि इस कुख्यात घोटाले में कुल 2530 लोग आरोपी बनाए गए थे।

इनमें से दो हजार के करीब आरोपी गिरफ्तार किए गए, जबकि 500 से ज्यादा अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जांच कर रही एसआईटी के अनुसार इनमें से 25 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि विपक्ष 41 मौतों का दावा कर रहा है।

माना जा रहा है कि घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा कई सफेदपोश भी शामिल हैं, जिन्हें बचाने के लिए भरसक प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में यह कहना भी गलत नहीं होगा कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटी मछलियों को हमेशा के लिए खामोश किया जा रहा हो।

विपक्ष इस घोटाले में सीधे मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और उनके परिवार पर आरोप लगा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तो कई बार प्रेस कान्फ्रेंस कर घोटाले से जुड़े कथित सबूत पेश कर मुख्यमंत्री और उनके परिवार की घोटाले में संलिप्तता का दावा कर चुके हैं।

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यह था व्यापमं घोटाला

25 accused killed of mysterious illness in vyapam scam from madhya pradesh

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा कहते हैं कि व्यापमं घोटाला शिवराज सिंह चौहान के राज का महाघोटाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस महाघोटाले में शंका की सुई जैसे-जैसे बड़े सफेदपोशों की ओर घूमेगी, इससे जुड़े लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का सिलसिला चलता रहेगा।

असल में व्यापमं यानि व्यावसायिक परीक्षा मंडल का काम प्रदेश में उन नियुक्तियों को करना था जिन्हें प्रदेश लोक सेवा आयोग नहीं करता। इसके अलावा सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में दाखिले के लिए भी व्यापमं ने परीक्षा करवाई।

बताया जाता है कि व्यापमं द्वारा करवाई गई 1000 नियुक्तियां फर्जी लोगों को दी गई थी। इसके अलावा मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में भी बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से एडमिशन दिए गए थे। व्यापमं में घोटाला करने वाला रैकेट कई स्तर पर फर्जीवाड़ा करता था।

मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में तो फर्जी लोगों को पेपर साल्व करने के लिए बैठाया जाता था जबकि विभिन्न नौकरियों के रिजल्ट में असली और उत्तीर्ण कैंडीडेट को हटाकर दूसरों के नाम रख दिए जाते थे।

पूर्व शिक्षामंत्री और आईपीएस थे घोटाले के सूत्रधार

25 accused killed of mysterious illness in vyapam scam from madhya pradesh

मामले की शुरूआत मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में बैठे फर्जी छात्रों की गिरफ्तारी से हुई थी जिसके बाद घोटाले के सूत्रधार डा. जगदीश सागर का पता चला। पुलिस उस तक पहुंची तो पता चला कि सारा खेल व्यापमं के ऑफिस से ही 'बड़े लोगों' की शह पर चलता है।

पुलिस ने जब कार्रवाई की थी उसे भी नहीं पता था कि उसके हाथ मध्यप्रदेश के इस सबसे बड़े घोटाले के सूत्रधारों तक पहुंचने वाले हैं। बाद में सागर की जानकारी के बाद ही पुलिस ने एमपी के पूर्व शिक्षामंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं के परीक्षा नियंत्रक डा. पंकज त्रिवेदी को गिरफ्तार किया।

इसके अलावा व्यापमं से ही जुड़े पीएमटी घोटाले में अरविंदो मेडिकल कालेज के चेयरमैन डा. विनोद भंडारी और आईपीएस अधिकारी आरके शिवहरे भी जेल जा चुके हैं।

जांच में पता चला है कि व्यापमं का परीक्षा नियंत्रक डा. पंकज त्रिवेदी सीधे शिक्षामंत्री लक्ष्मीकांत के निर्देश पर फर्जी नियुक्तियों को अंजाम देता था। इसकी लिस्ट भी उसे शिक्षामंत्री के बंगले से मिलती थी।

वहीं मध्यप्रदेश के गृहमंत्री बाबुलाल गौर ने यह कहकर मामले को हल्का करने का प्रयास किया कि सभी मौत नेचुरल हैं इनमें जांच की कोई जरूरत नहीं हैं। लेकिन वह इस बात का जवाब शायद ही दे पाएं कि नेचुरल मौत से शायद ही देश में किसी घोटाले के आरोपी एक के बाद एक खामोश मौत की नींद सो गए हैं।

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