जिंदगी मास्टर क्लास: आपको पता है कि बिना चप्पल के रहने से गिर जाता है हीमोग्लोबिन? बदल सकती हैं फूड हैबिट
न्यूट्रिशियन कंसल्टेंट मधुश्री अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ की ओर से आयोजित पोषण पर आधारित जिंदगी मास्टर क्लास सीजन-4 के तहत कार्यशाला सत्र में बच्चों से रूबरू थीं।
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पोषण क्या होता है? संतुलित आहार किसे कहते हैं? क्या आप सब खुद को स्वस्थ मानते हैं? क्या आपको मालूम है कि बिना चप्पल पहने रहने से भी हीमोग्लोबिन कम हो सकता है? ऐसे कई सवालों के साथ यूनिसेफ की न्यूट्रिशियन कंसल्टेंट मधुश्री इटौंजा के रामा कान्वेंट स्कूल में छात्र-छात्राओं के बीच थे। वे अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ की ओर से आयोजित पोषण पर आधारित जिंदगी मास्टर क्लास सीजन-4 के तहत कार्यशाला सत्र में बच्चों से रूबरू थीं। उन्होंने कहा कि हर बच्चा यदि कोशिश करे तो खानपान की आदतें बदली जा सकती हैं। नियम से खाएं, पोषक खाएं और संतुलित खाएं।
मोमोज, चाऊमीन, मैगी नुकसानदायक तो है, पर अच्छी लगती है
सत्र में जब बच्चों से उनकी खानपान की आदतों पर बात शुरू हुई तो बच्चों ने कहा- मोमोज, चाऊमीन, मैगी नुकसानदायक तो हैं, पर अच्छी लगती है। हम रोक नहीं पाते। इस दौरान लगभग 200 के करीब बच्चों के साथ कुछ अभिभावक भी मौजूद थे। मधुश्री ने जब माताओं से बात की तो ज्यादातर ने यही बताया कि वे आलू के पराठे ही बनाती हैं। विशेषज्ञ ने उन्हें अलग-अलग सब्जियां भरकर, आटे में पालक-चुकंदर या उपलब्ध हरी सब्जियों को मिलाकर बनाने की सलाह दी। साथ ही सहजन और सोया बड़ी को भी खाने में शामिल करने की सलाह दी।
नुक्कड़ नाटक से बताया-जंक फूड के खतरे
आशीष, नजरीन, साक्षी, रोहिणी, सना, सोनम, रिशु, शगुन ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जंक फूड के खतरों के प्रति आगाह किया। जिंदगी मास्टर क्लास सीजन 4 के इस सत्र को सफल बनाने में स्कूल प्रबंधक प्रबंधक शिव चौहान व शिक्षक-शिक्षिकाएं अलका शुक्ला, सदफ तसनीम, अंजुम, सरिता द्विवेदी और रजनीश का योगदान रहा।