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जीरो बजट गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें : राज्यपाल
Wed, 30 Sep 2020 10:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 30 Sep 2020 10:43 PM IST
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश में गौ आधारित प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। इसके लिए सभी कृषि विश्वविद्यालयों में टेस्टिंग लैब स्थापित करने की आवश्यकता है। जिससे कृषि उत्पादों का प्रमाणीकरण आसानी से हो सके। वह बुधवार को राष्ट्रीय नीति आयोग की ओर से आयोजित ‘जीरो बजट गौ आधारित प्राकृतिक कृषि’ विषयक वेबिनार को संबोधित कर रही थीं।
राज्यपाल ने कहा कि किसानों ने सिंचाई के लिए सोलर पंप के उपयोग को बढ़ावा दिया है, लेकिन रात में सोलर पंप के पैनल खराब कर दिए जा रहे हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने नीति आयोग को इन पैनलों का बीमा कराने का भी सुझाव दिया। उन्होेंने बताया कि किसान शिकायत करते हैं कि मंडियों में उनसे मंडी शुल्क के अतिरिक्त भी शुल्क वसूला जाता है। इसलिए इस समस्या के समाधान की भी जरूरत है।
वेबिनार में केंद्रीय कृषि राज्ययमंत्री कैलाश चौधरी, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया और नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश सरवाल ने भी विचार रखे।
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खेती का लेखाजोखा रखें किसान
राज्यपाल ने कहा कि किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राकृतिक विधि से उत्पादित खाद्यान्नों को बेचने की है। इसलिए नीति आयोग को चाहिए कि किसानों के लिए बाजार उपलब्ध कराए। साथ ही, उन्होंने किसानों को उद्यमियों की तरह एक रजिस्टर रखकर उसमें अपनी खेती का लेखाजोखा रखने के लिए कहा। जिससे पता चल सके कि उन्हें कितनी लागत आई और फसल बेचने पर कितनी आय हुई।
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राज्यपाल ने कहा कि किसानों ने सिंचाई के लिए सोलर पंप के उपयोग को बढ़ावा दिया है, लेकिन रात में सोलर पंप के पैनल खराब कर दिए जा रहे हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने नीति आयोग को इन पैनलों का बीमा कराने का भी सुझाव दिया। उन्होेंने बताया कि किसान शिकायत करते हैं कि मंडियों में उनसे मंडी शुल्क के अतिरिक्त भी शुल्क वसूला जाता है। इसलिए इस समस्या के समाधान की भी जरूरत है।
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वेबिनार में केंद्रीय कृषि राज्ययमंत्री कैलाश चौधरी, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया और नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश सरवाल ने भी विचार रखे।
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खेती का लेखाजोखा रखें किसान
राज्यपाल ने कहा कि किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राकृतिक विधि से उत्पादित खाद्यान्नों को बेचने की है। इसलिए नीति आयोग को चाहिए कि किसानों के लिए बाजार उपलब्ध कराए। साथ ही, उन्होंने किसानों को उद्यमियों की तरह एक रजिस्टर रखकर उसमें अपनी खेती का लेखाजोखा रखने के लिए कहा। जिससे पता चल सके कि उन्हें कितनी लागत आई और फसल बेचने पर कितनी आय हुई।