खुशखबरी: प्रशिक्षित युवाओं को गांव में ही मिलेगा कमाई का मौका
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प्रदेश सरकार ने कौशल विकास मिशन और स्वयं सहायता समूह से जुड़े युवाओं की आय बढ़ाने के लिए खास पहल की है। गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बन रहे शत-प्रतिशत शौचालयों के सत्यापन का काम इन्हें दिया जाएगा। इससे ये प्रतिदिन 250 से 300 कमा सकेंगे। भविष्य में इन्हें दूसरे कार्यों के सत्यापन का अवसर देने की भी संभावना तलाशी जा सकती है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर दो अक्तूबर 2019 को देश को खुले में शौच जाने से मुक्त करने का संकल्प लिया है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में लाखों की संख्या में शौचालय बनवाए जा रहे हैं।
खुले में शौच की आदत खत्म करने के प्रयास भी साथ-साथ चल रहे हैं। शौचालय निर्माण की फर्जी रिपोर्टिंग व इस काम में अनियमितता न हो, इसके लिए इसका लगातार सत्यापन भी कराया जाना है। कई बार शौचालय निर्माण की फर्जी रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
शौचालयों के सत्यापन की नई नीति
शासन ने शौचालयों के सत्यापन की नीति बनाई है। इसमें खासतौर से यह ध्यान रखा गया है कि सत्यापन करने वाले लोग स्वतंत्र हों। यानी इनका पंचायतीराज महकमे से कोई लेना-देना न हो।
लिहाजा, थर्ड पार्टी के रूप में कौशल विकास मिशन, आजीविका मिशन के तहत गठित समूह के सदस्यों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) व नेहरू युवा केंद्र (एनवाईके) से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित कर शौचालयों के निर्माण का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने का फैसला किया गया है।
इन प्रशिक्षित व्यक्तियों को रोज 250 से 300 रूपये मानदेय के रूप में दी जा सकेगी या प्रति शौचालय 2 से 2.50 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह व्यवस्था प्रतिदिन कम से कम 100 शौचालयों का सत्यापन करने पर ही स्वीकृत होगी।
जिले चाहें तो इनके द्वारा रोजाना सत्यापित किए जाने वाले शौचालयों की संख्या बढ़ा भी सकते हैं। प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों व जिला स्वच्छ भारत मिशन मैनेजमेंट कमेटी को इस बाबत विस्तृत दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।
कमेटी के निर्देशन में होगा सत्यापन
शासन ने कहा है कि शौचालयों के सत्यापन के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों केसत्यापन के लिए नोडल अधिकारी नामित करेगी। नामित अफसरों के साथ प्रशिक्षित व्यक्तियों को इस काम में लगाया जाएगा। जिला स्वच्छ भारत मिशन मैनेजमेंट कमेटी शासन के निर्देशों के मुताबिक व्यवस्था करेगी। परियोजना की निगरानी व मूल्यांकन पर खर्च होने वाली रकम प्रशासनिक मद के अंतर्गत उपलब्ध है।
बिजनौर और वाराणसी में सफल रहा प्रयोग
शौचालय निर्माण और उनके प्रयोग का सत्यापन कौशल विकास मिशन व अन्य के अंतर्गत प्रशिक्षित व्यक्तियों से कराने की पहल बिजनौर और वाराणसी में की जा चुकी है। इन जिलों में प्रति शौचालय सत्यापन के लिए दो से ढाई रुपये का भुगतान हो रहा है। सरकार ने यही फॉर्मूला प्रदेश स्तर पर आजमाने का फैसला किया है।
मंडल स्तर पर कमेटी भी करेगी सत्यापन
शासन ने मंडल स्तर पर संयुक्त टीम गठित कर जिलों में बन रहे शौचालयों का क्रॉस सत्यापन कराने का भी फैसला किया है। इस सत्यापन अधिकारी के साथ कौशल विकास मिशन व अन्य संस्थाओं से प्रशिक्षित युवकों की ड्यूटी लगाई जा सकेगी। इन्हें मंडल स्तर पर निर्धारित प्रशासनिक खर्च से भुगतान होगा। यदि रकम कम पड़ेगी तो सरकार राज्य स्तर के प्रशासनिक मद से उपलब्ध कराएगी।
हर शौचालय की होगी अलग आईडी
शासनादेश जारी होने की तिथि 25 नवंबर से पूर्व व इसके बाद बनने वाले शौचालयों को अलग-अलग कोड दिया जाएगा। हर शौचालय की अलग आईडी होगी। शौचालयों पर कई सूचनाएं मसलन जिला, ब्लॉक व ग्राम पंचायत का नाम, निर्माण का वर्ष, लाभार्थी व पिता या पति का नाम, लाभार्थी क्रमांक व कोड अनिवार्य रूप से लिखना होगा।