{"_id":"633a55bec2a21b7a012eb22d","slug":"youth-used-to-join-pfi-after-seeing-training-and-fun-ib-interrogated-ahmed-baig-nadvi-for-four-hours","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नदवी का कबूलनामा: ट्रेनिंग और मौज-मस्ती देख पीएफआई से जुड़ते थे युवक, ये बड़ा सच जानकर हो जाएंगे आप भी हैरान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदवी का कबूलनामा: ट्रेनिंग और मौज-मस्ती देख पीएफआई से जुड़ते थे युवक, ये बड़ा सच जानकर हो जाएंगे आप भी हैरान
Mon, 03 Oct 2022 09:13 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 03 Oct 2022 09:13 AM IST
सार
मो. अहमद बेग नदवी से आईबी अधिकारियों की पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। वो युवकों को प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक सुविधाएं देते थे और अन्य युवकों को पीएफआई से जोड़ने के लिए तरह-तरह के जाल बिछाते थे।
विज्ञापन
मो. अहमद बेग।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पीएफआई से युवकों को जोड़ने के लिए उसके सदस्य कई तरह की आधुनिक सुविधाएं देते थे। प्रशिक्षण के दौरान व बाद में घूमने-फिरने का इंतजाम करते थे। ताकि अन्य युवक भी तेजी से जुड़ें। प्रशिक्षण के लिए दूसरे जिलों के ट्रेनिंग सेंटर पर भेजा जाता था। वहां लग्जरी सुविधाएं दी जाती थीं। प्रशिक्षण ले रहे युवकों से अपने दोस्तों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुविधाओं के फोटो भेजने के निर्देश भी रहते थे।
यह बात ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष व एसडीपीआई के सक्रिय सदस्य मो. अहमद बेग नदवी ने रिमांड के दूसरे दिन पूछताछ में कुबूलीं। उससे इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने चार घंटे तक पूछताछ की। पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम से उसके करीबी रिश्ते हैं। दोनों मिलकर यूपी में बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहे थे।
इस खुलासे के बाद ही अहमद बेग को मदेयगंज पुलिस ने रिमांड पर लिया था। रविवार को एसीपी, आईबी के अफसरों ने अहमद बेग से उसके नेटवर्क के बारे में कई सवाल किये। अहमद बेग ने कुबूला कि उसके उन्मादी भाषण भी यू-टयूब के जरिये प्रशिक्षण ले रहे युवकों को सुनाए जाते थे। इससे ब्रेनवॉश की कोशिश रहती थी।
विज्ञापन
आईबी अफसरों के अनुसार, अहमद बेग से जब ये पूछा गया कि लखनऊ से अब तक पकड़े गए अन्य आठ लोगों से संपर्क था या नहीं। इस पर वह चुप रहा। बाद में कुबूला कि सिर्फ वसीम से ही मिला है। दो लोगों से व्हाटसएप कॉल के जरिये बात हुई थी। उम्मीद है कि सोमवार को एनआईए की टीम पूछताछ करेगी। इसके बाद उसे बहराइच ले जाएंगे।
विज्ञापन
यह बात ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष व एसडीपीआई के सक्रिय सदस्य मो. अहमद बेग नदवी ने रिमांड के दूसरे दिन पूछताछ में कुबूलीं। उससे इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने चार घंटे तक पूछताछ की। पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम से उसके करीबी रिश्ते हैं। दोनों मिलकर यूपी में बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहे थे।
विज्ञापन
इस खुलासे के बाद ही अहमद बेग को मदेयगंज पुलिस ने रिमांड पर लिया था। रविवार को एसीपी, आईबी के अफसरों ने अहमद बेग से उसके नेटवर्क के बारे में कई सवाल किये। अहमद बेग ने कुबूला कि उसके उन्मादी भाषण भी यू-टयूब के जरिये प्रशिक्षण ले रहे युवकों को सुनाए जाते थे। इससे ब्रेनवॉश की कोशिश रहती थी।
विज्ञापन
आईबी अफसरों के अनुसार, अहमद बेग से जब ये पूछा गया कि लखनऊ से अब तक पकड़े गए अन्य आठ लोगों से संपर्क था या नहीं। इस पर वह चुप रहा। बाद में कुबूला कि सिर्फ वसीम से ही मिला है। दो लोगों से व्हाटसएप कॉल के जरिये बात हुई थी। उम्मीद है कि सोमवार को एनआईए की टीम पूछताछ करेगी। इसके बाद उसे बहराइच ले जाएंगे।
सरकार को गलत साबित करने के लिए करा रहे थे जनमत संग्रह
सरकार व उसकी नीतियों को गलत साबित करने के लिए पीएफआई नए तरीके से विरोध कर रहा था। इसके लिए पीएफआई की एक टीम सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती थी। वह सरकार की नीतियों व योजनाओं के संबंध में जानकारी जुटाती और सक्रिय सदस्यों के बीच में भेजकर जनमत संग्रह कराती थी। पीएफआई इसके जरिये सरकार को गलत साबित करने में जुटा था। इसके कई प्रमाण पकड़े गये सदस्यों के मोबाइल से मिले हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पीएफआई ने सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ने के लिए एक विशेष सेल का गठन किया था। इसे टेक्नोक्रेट सोशल मीडिया का नाम दिया था। इससे जुड़े सदस्य आधा दर्जन से अधिक यू-ट्यूब न्यूज चैनल चला रहे थे। 350 से अधिक सोशल मीडिया ग्रुप संचालित कर रहे थे। इन पर सरकार की योजनाओं की डिटेल डालते थे और मुस्लिम विरोधी करार देते।
इसके बाद सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह कराने के लिए कुछ समय तक वोटिंग कराते थे। यू-ट्यूब चैनल पर कुछ मुस्लिम नेताओं को बैठाकर बहस भी कराते थे। इसके प्रसारण के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते थे।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पीएफआई के सक्रिय सदस्य उलेमा काउंसिल की मदद से धार्मिक उन्माद फैलाने वाले वीडियो तैयार करते थे। लोगों तक संदेश आसानी से पहुंचे, इसके लिए हर गांव व मोहल्लों में कई ग्रुप बना रखे थे। ऐसे ज्यादातर ग्रुप एडमिन ही संचालित करता था। इन ग्रुपों में ज्यादातर अहमद बेग नदवी के भड़काऊ वीडियो ही वायरल किए गए थे।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पीएफआई ने सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़ने के लिए एक विशेष सेल का गठन किया था। इसे टेक्नोक्रेट सोशल मीडिया का नाम दिया था। इससे जुड़े सदस्य आधा दर्जन से अधिक यू-ट्यूब न्यूज चैनल चला रहे थे। 350 से अधिक सोशल मीडिया ग्रुप संचालित कर रहे थे। इन पर सरकार की योजनाओं की डिटेल डालते थे और मुस्लिम विरोधी करार देते।
इसके बाद सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह कराने के लिए कुछ समय तक वोटिंग कराते थे। यू-ट्यूब चैनल पर कुछ मुस्लिम नेताओं को बैठाकर बहस भी कराते थे। इसके प्रसारण के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते थे।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पीएफआई के सक्रिय सदस्य उलेमा काउंसिल की मदद से धार्मिक उन्माद फैलाने वाले वीडियो तैयार करते थे। लोगों तक संदेश आसानी से पहुंचे, इसके लिए हर गांव व मोहल्लों में कई ग्रुप बना रखे थे। ऐसे ज्यादातर ग्रुप एडमिन ही संचालित करता था। इन ग्रुपों में ज्यादातर अहमद बेग नदवी के भड़काऊ वीडियो ही वायरल किए गए थे।