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तेज चिल्लाने से हमेशा के लिए जा सकती है आपकी आवाज

Thu, 16 Apr 2015 03:34 PM IST
मनीष्ा कुमार सिंह/अमर उजाला, लख्ानऊ
मनीष्ा कुमार सिंह/अमर उजाला, लख्ानऊ Updated Thu, 16 Apr 2015 03:34 PM IST
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Your voice can be gone on speaking loud

आवाज आपकी पहचान है और ईश्वर का दिया एक  तोहफा। इसके बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है, पर आवाज के साथ कोई छेड़छाड़ और मिमिक्री करना भारी पड़ सकता है। आवाज के साथ छेड़छाड़ होने पर सबसे अधिक नुकसान वोकल कॉर्ड को होता है।

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वोकल कॉर्ड में कुछ ऐसे तार होते हैं, जिनके ऊपर बनावटी दबाव पड़ने से आवाज हमेशा के लिए बदल सकती है। वर्ल्ड वायस डे के मौके पर डॉक्टरों की सलाह है कि अपनी पहचान को संजोकर रखें और आवाज का विशेष ख्याल रखें।
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किसी तरह की दिक्कत होने पर तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट की सलाह लें क्योंकि जरा सी लापरवाही आपकी पहचान को बदल सकती है। गले में चोट लगने से भी आवाज बदल सकती है और किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार होने पर गंभीर परिस्थितियों में आवाज हमेशा के लिए जा सकती है।
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वर्ल्ड वायस डे हर वर्ष 16 अप्रैल को मनाया जाता है। वर्ल्ड वाइस डे 2015 की थीम द रियल सोशल मीडिया है, जिसका तात्पर्य है कि आवाज ही अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है।

तेज चिल्लाने से गले में हो सकती है ब्लीडिंग

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बलरामपुर अस्पताल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. हिमांशु प्रताप सिंह बताते हैं कि आवाज की परेशानी वाले मरीजों की संख्या ओपीडी में तेजी से बढ़ी है। सौ मरीजों में से पंद्रह से अठारह मरीज आवाज की परेशानी लेकर ओपीडी पहुंचते हैं।

वो बताते हैं कि तेज चिल्लाने से आवाज अचानक बदल जाती है और उसे वापस लाने में समय लग सकता है। डॉ. हिमांशु की मानें तो जो व्यक्ति तेज बोलते हैं उसके साथ ऐसी परेशानी होने का खतरा अधिक रहता है। तेज चिल्लाने से वोकल कॉर्ड में रक्तस्त्राव होने से उसमें ब्लीडिंग हो जाती है।

ब्लीडिंग होने पर वोकल कॉर्ड में गांठ या मांस का थक्का बन जाता है, जिसकी वजह से आवाज बदलती है। आवाज को जान बूझकर बदलना भी नुकसान दायक है। ऐसी स्थिति में सुर तंत्रिका को नुकसान होता है और व्यक्ति समय के साथ अपनी वास्तविक आवाज से दूर हो जाता है।

बदली हुई आवाज को दिनचर्या में शामिल करने से वोकल नॉड्यूल बनने की संभावना अधिक रहती है। बोलने के तार में गांठ या मांस का थक्का बनने से परेशानी बढ़ जाती है। कई बार आवाज पतली हो जाती है, जो ऐसी लगती है मानो किसी लड़की की आवाज हो।

ऐसे होता है वोकल कॉर्ड पैरालिसिस

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डॉ. हिमांशु के अनुसार कई घटनाओं में आवाज चली जाती है, जिसे वोकल कॉर्ड ट्रॉमा के नाम से जाना जाता है। ऐसी स्थिति में एरिटोनायड डिस्लोकेशन हो जाता है यानी वोकल कॉर्ड और स्वर तंत्रिका के आसपास की कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ता है।

कई गंभीर परिस्थितियों में एडिमा जिसे सूजन के नाम से जाना जाता है। ऐसा होने पर भी आवाज बिगड़ सकती है। चोट अधिक हो या ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाए तो वोकल कॉर्ड पैरालिसिस का भी खतरा रहता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए खुद पर नियंत्रण बहुत जरूरी है।

डॉ. हिमांशु बताते हैं कि गले में इंफेक्शन, टीबी, चेस्ट इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन और सुर के तार में ट्यूमर होने पर डॉक्टरी सलाह जरूरी है। तेज चिल्लाने से बचना चाहिए क्योंकि ब्लीडिंग होने पर परेशानी हमेशा के लिए बढ़ सकती है। गले में बार-बार खराश हो रही है तो भी डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए क्योंकि बार-बार खराश होने से वोकल कॉर्ड में तनाव आने से नुकसान होता है।

सदमे से आवाज गई तो आ सकती है वापस

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केजीएमयू की ऑडियोलॉजिस्ट सुहानी शर्मा की मानें तो अचानक किसी को बड़ा सदमा लग जाए तो उसकी आवाज जा सकती है। तनाव या किसी तरह की मानसिक परेशानी पर भी आवाज जाने का खतरा रहता है।

किसी घटना के होने पर अनजान व्यक्ति को उसके बारे में अचानक जानकारी नहीं देनी चाहिए। अचानक जानकारी मिलने पर वो सदमे में चला जाता है और उसका मानसिक संतुलन इतना खराब हो जाता है कि वो बोलना भूल जाता है।

सौ में से तीन लोगों को इस तरह की समस्या हो सकती है। इस तरह के लोग बोलना तो चाहते हैं, लेकिन बोल नहीं पाते। कई परिस्थितियों में मरीज बोलता तो है, लेकिन आवाज की जगह सिर्फ सनसनाहट ही हो पाती है, जिसे समझ पाना मुश्किल होता है।

टीचर, सिंगर और नेताओं की आवाज हो सकती है खराब

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टीचर, सिंगर, राजनेता और वो लोग जो बहुत बोलते हैं उनको थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। क्योंकि बहुत बोलने से वोकल कॉर्ड की कोशिकाओं को नुकसान होता है और आवाज खराब होने का खतरा अधिक रहता है।

हालांकि ऐसे मामलों में पीड़ित को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के साथ स्पीच थेरेपी दी जाती है, जिससे उसकी आवाज वापस आ सकती है। अचानक किसी की आवाज चली गई है तो दो हफ्ते से छह महीने की थेरेपी में उसकी गई हुई आवाज को वापस लाया जा सकता है।

केजीएमयू की ऑडियोलॉजिस्ट सुहानी शर्मा बताती हैं कि  आवाज एक खास तरह की क्वालिटी और इसका बेहतर इस्तेमाल करना बहुत जरूरी होता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर बात करने से बचना चाहिए। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि बहुत अधिक शोर-शराबे वाली जगह पर लोग तेज बोलते हैं।

तेज बोलने की वजह से वोकल कॉर्ड बहुत तेजी से फंक्शन करता है और सही समय पर वोकल कॉर्ड तक ऑक्सीजन न पहुंचने से नुकसान होता है। बात करते वक्त जबड़े तो बहुत आगे-पीछे नहीं खींचे क्योंकि इससे भी व्यक्ति अपनी वास्तविक आवाज को खो सकता है और बनावटी आवाज को बोलने के लिए मजबूर हो जाता है।

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