14 साल बाद यूं हुआ 'राम' का अपनों से 'मिलन', गले लगाते ही बह निकली आंसुओं की धार
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भगवान राम ने चौदह वर्ष का वनवास काटा और जब वो अयोध्या पहुंचे तो दीपोत्सव मनाया गया। कुछ इसी तरह की कहानी है बाराबंकी के राम मिलन की जो छह साल की उम्र में अपने परिवार से बिछड़ गया था और चौदह वर्ष बाद दीप उत्सव से पहले घर लौटा। परिवारीजन अपने कुल दीपक को पाकर खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
परिवार में जश्न का माहौल है। सात साल का बालक अब 20 साल का जवान युवक हो गया है। सोमवार को गुडंबा स्थित राजकीय पश्चातवर्ती संस्था के कार्यालय पहुंचकर परिवारीजनों ने अपने ‘राम’ को गले लगा लिया और दोनों ओर से खुशी के आंसुओं की धार बह निकली। बोले, कितना बड़ा हो गया है हमारा राम।
परिवार से बिछड़ने के बाद राम मिलन (20) पुत्र सुंदर का बचपन राजधानी के राजकीय बालगृह शिशु में गुजरा और किशोर अवस्था राजकीय बालगृह बालक में गुजरी। 18 साल बाद उसे गुडंबा स्थित राजकीय पश्चातवर्ती संस्था के भवन में आश्रय दिलाया गया था।
यहां उसकी बातचीत भवबियापुर टिकैत नगर बाराबंकी निवासी चौकीदार शिवाकांत से होती रहती थी। एक दिन चौकीदार ने उसका गांव पूछा तो उसने भवबियापुर बताया जिस पर चौकीदार ने पाश्चातवर्ती कर्मचारी को अवगत कराया। इसके बाद चौकीदार ने अपने गांव फोन कर जानकारी जुटाई और राम मिलन के परिवारीजनों से संपर्क किया।
बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता शर्मा ने बताया कि राम मिलन मानसिक रूप से थोड़ा सा कमजोर था और अपने घर का पता व माता-पिता का सही-सही नाम नहीं बता पाता था। उसे लेकर कई बार काउंसलिंग की गई। लेकिन अभी हाल में तैनात चौकीदार शिवाकांत भी राम मिलन के गांव भवबियापुर का निकल आया और उसने राम मिलन के परिवारीजनों को तलाशने में मदद की।
सदस्य संगीता शर्मा ने बताया, राम मिलन को 14 साल बाद परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है। बेटे को देखकर एक बार में ही परिवार वाले पहचान गए। चाचा के गले में बाहें डालकर बहुत देर तक माता-पिता की सूरत निहारता रहा। परिवारीजन उसे देख प्यार करते हुए कह उठे अरे इतना बड़ा हो गया मेरा राम।
अपने घर जाने की करता था जिद
मां रामदेई ने बताया कि राम मिलन परिवार के साथ 14 वर्ष पूर्व बाराबंकी से लखनऊ आया था और इसी दौरान वह हमसे बिछड़ गया था। बताया, 14 वर्ष बाद कुल का दीप अब हमारे घर में फिर रोशन होगा। 14 साल बाद मेरा बेटा मिला है। इसको किसी की नजर न लगे। वहीं परिवार के अन्य सदस्य भी राम मिलन के मिलने से खुशी के आंसू नहीं रोक पा रहे थे। वहीं राम मिलन भी सबके गले लगकर रोता रहा।
राम मिलन राजकीय बालगृह शिशु व राजकीय बालगृह बालक में लगातार रहने के बाद भी अपने घर जाने की जिद करता था। अपने गांव का टूटा-फूटा नाम बताता था। उसके बताए पते पर कई बार चाइल्ड लाइन टीम व बालगृहों की टीम ने पहुंचने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। चौकीदार की मदद से आखिरकार वह अपने परिवार से मिल पाया।