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किसानों से दो लाख मीट्रिक टन आलू खरीदेगी योगी सरकार, केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 09 Jan 2018 10:01 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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राज्य सरकार किसानों से इस साल करीब दो लाख मीट्रिक टन आलू खरीदेगी। इसके लिए बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है।
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आलू का मुद्दा राजनीतिक न बनने देने के लिए योगी सरकार ने हरसंभव कदम उठाने का फैसला किया है। पिछले साल सरकार ने सत्ता संभालने के तत्काल बाद एक लाख मीट्रिक टन आलू 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था। इससे आलू के बाजार भाव चढ़ गए थे और किसानों को खुले बाजार में भी वाजिब दाम मिल सका।
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सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकार कम से कम दो लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने की योजना बना रही है। यह खरीद केंद्र की ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ के तहत की जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यहां बता दें कि बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत कुल उत्पादन के 20 फीसदी हिस्से की सरकारी खरीद हो सकती है।
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उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में कहीं भी किसानों के पास अब स्टोर करने लायक आलू नहीं है। इस समय किसान कच्चे आलू की खोदाई कर रहे हैं, जो उपयोग न होने की स्थिति में 3-4 दिन में ही काला पड़कर खराब हो जाता है। इसलिए किसान उतने ही आलू की खोदाई कर रहे हैं, जितना मंडी में बिक जाए। पूरी तरह से तैयार आलू मार्च में ही बाजार में आता है, जिसे स्टोर करने के लिए सरकारी या अन्य निजी एजेंसियां खरीदती हैं।
क्या है बाजार हस्तक्षेप योजना
केंद्रीय कृषि एवं सहयोगी विभागों ने ऐसी कृषि और बागवानी जिंसों को खरीदने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) लागू की है, जो आम तौर पर जल्द खराब हो जाती हैं। एमआईएस का मुख्य मकसद उत्पादन की भरमार हो जाने या कीमतों में गिरावट की स्थिति आने पर किसानों को वाजिब मूल्य दिलवाना सुनिश्चित करना है। एमआईएस को राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार लागू करती है। शर्त यह होती है कि इससे होने वाले नुकसान को राज्य व केंद्र सरकार आधा-आधा वहन करेंगी।
600 रुपये प्रति क्विंटल होगा सरकारी मूल्य
उद्यान विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकारी खरीद के लिए आलू का मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। मजदूरी, दवाइयों और बीज आदि के दाम बढ़ जाने के चलते यह फैसला किया गया है। मार्च में नया आलू आने पर यह खरीद शुरू होगी।
प्रमुख सचिव उद्यान सुधीर गर्ग का कहना है कि आलू उत्पादक किसानों से सरकार इस बार पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रेट पर खरीद करेगी। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है।
600 रुपये प्रति क्विंटल होगा सरकारी मूल्य
उद्यान विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकारी खरीद के लिए आलू का मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। मजदूरी, दवाइयों और बीज आदि के दाम बढ़ जाने के चलते यह फैसला किया गया है। मार्च में नया आलू आने पर यह खरीद शुरू होगी।
प्रमुख सचिव उद्यान सुधीर गर्ग का कहना है कि आलू उत्पादक किसानों से सरकार इस बार पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रेट पर खरीद करेगी। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है।