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योगी के फॉर्मूले से बिजली विभाग को 3100 करोड़ रुपये की बचत, ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट में खुलासा
Mon, 17 Dec 2018 12:29 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:29 PM IST
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सीएम योगी
- फोटो : डेमो
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद बिजली विभाग को सपा राज से सस्ती बिजली खरीदने, उपभोक्ताओं को ज्यादा से ज्यादा बिजली देने और बिजली खरीदने व उत्पादन में कमी लाने का तीन सूत्री टास्क सौंपा था। अब इसके नतीजे सामने लगे हैं।
ऊर्जा विभाग ने मुख्यमंत्री को हाल ही भेजी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि किस तरह उसने तीनों ही पैरामीटर पर काम किया और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई। विभाग ने 2017-18 में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3,100 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का दावा किया है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार की ओर से भेजी प्रगति रिपोर्ट में बताया गया है कि नई सरकार के सत्ता में आते ही अप्रैल 2017 में सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने के लिए केंद्र सरकार के साथ पावर फॉर ऑल का समझौता किया गया।
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इसके बाद बिजली खरीद की कीमत में कमी लाने के लिए अनिवार्य रूप से सेंट्रल व स्टेट सेक्टर से अथवा प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के जरिए ही बिजली खरीद की रणनीति बनाई गई। तीसरा, स्टेट सेक्टर के तापीय विद्युत उत्पादन गृहों को पर्याप्त सुविधाएं व ओवरहॉलिंग के लिए आवश्यक फंड प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने की पहल शुरू हुई।
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ऊर्जा विभाग ने मुख्यमंत्री को हाल ही भेजी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि किस तरह उसने तीनों ही पैरामीटर पर काम किया और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई। विभाग ने 2017-18 में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3,100 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का दावा किया है।
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प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार की ओर से भेजी प्रगति रिपोर्ट में बताया गया है कि नई सरकार के सत्ता में आते ही अप्रैल 2017 में सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने के लिए केंद्र सरकार के साथ पावर फॉर ऑल का समझौता किया गया।
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इसके बाद बिजली खरीद की कीमत में कमी लाने के लिए अनिवार्य रूप से सेंट्रल व स्टेट सेक्टर से अथवा प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के जरिए ही बिजली खरीद की रणनीति बनाई गई। तीसरा, स्टेट सेक्टर के तापीय विद्युत उत्पादन गृहों को पर्याप्त सुविधाएं व ओवरहॉलिंग के लिए आवश्यक फंड प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने की पहल शुरू हुई।
सौर ऊर्जा में सस्ती बिजली खरीद का समझौता
डेमो
इन फैसलों पर अमल की कड़ी में ही योगी सरकार ने पिछली सरकारों द्वारा एमओयू रूट से 7040 मेगावाट बिजली खरीद के एमओयू को जून 2017 में निरस्त कर दिया। अब इसके नतीजे सामने आने लगे हैं
प्रदेश सरकार ने प्रदूषण रहित ऊर्जा के तहत 500-500 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए दो चरणों में प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग की। पहले चरण में सौर ऊर्जा की दरें 3.17 रुपये से 3.23 रुपये प्रति यूनिट तथा द्वितीय चरण में 3.02 रुपये से 3.08 रुपये प्रति यूनिट आई। इस तरह 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा 3.02 रुपये से 3.23 रुपये प्रति यूनिट के बीच उपलब्ध हो सकेगा।
बसपा और सपा राज से बेहद सस्ती बिजली खरीद के अनुबंध
पिछली सरकारों और योगी सरकार के बीच बिजली खरीद के जो पीपीए सामने आए हैं, उसमें बिजली खरीद के पीछे का अर्थशास्त्र सामने आ रहा है। बसपा और सपा शासनकाल में 2010 से 2015 के बीच किए गए पीपीए में जहां बिजली दरें 5.28 रुपये प्रति यूनिट से 6.82 रुपये प्रति यूनिट तय हुई थीं, योगी सरकार में 2.98 रुपये से 3.46 रुपये तक पड़ी हैं।
प्रदेश सरकार ने प्रदूषण रहित ऊर्जा के तहत 500-500 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए दो चरणों में प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग की। पहले चरण में सौर ऊर्जा की दरें 3.17 रुपये से 3.23 रुपये प्रति यूनिट तथा द्वितीय चरण में 3.02 रुपये से 3.08 रुपये प्रति यूनिट आई। इस तरह 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा 3.02 रुपये से 3.23 रुपये प्रति यूनिट के बीच उपलब्ध हो सकेगा।
बसपा और सपा राज से बेहद सस्ती बिजली खरीद के अनुबंध
पिछली सरकारों और योगी सरकार के बीच बिजली खरीद के जो पीपीए सामने आए हैं, उसमें बिजली खरीद के पीछे का अर्थशास्त्र सामने आ रहा है। बसपा और सपा शासनकाल में 2010 से 2015 के बीच किए गए पीपीए में जहां बिजली दरें 5.28 रुपये प्रति यूनिट से 6.82 रुपये प्रति यूनिट तय हुई थीं, योगी सरकार में 2.98 रुपये से 3.46 रुपये तक पड़ी हैं।
बिजली उत्पादन व खरीद लागत घटी
डेमो
सपा और योगी सरकार में बिजली खरीद में अंतर
सपा राज में एमओयू आधार पर पीपीए बिजली की वर्तमान नेट दर (रु. प्रति यूनिट)
रोजा परियोजना 1200 मेगावाट 5.28
बजाज एनर्जी 450 मेगावाट 7.93
ललितपुर परियोजना 6.82
योगी सरकार में किए गए पीपीए
सिंगरौली स्टेज-॥ । ( 1320 मेगावाट ) 2.98
न्यू नबीनगर ( 209 मेगावाट) 3.46
राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सभी परियोजनाओं में सुधार की कार्ययोजना पर काम शुरू हुआ। इससे वर्षवार औसत उत्पादन 4000 मेगावाट से बढ़कर 4400 मेगावाट हो गया। इसके अलावा बिजली की उत्पादन लागत 4.09 रुपये प्रति यूनिट से घटकर 3.47 रुपये तथा बिजली खरीद की औसत लागत 2016-17 में 4.12 रुपये प्रति यूनिट के मुकाबले 2017-18 में घटकर 3.86 रुपये प्रति यूनिट आ गई।
वहीं, 2016-17 में 1,06,061 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई थी, जबकि 2017-18 में 1,19,051 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई। 12990 मिलियन यूनिट अधिक बिजली खरीद के बावजूद खरीद लागत में 0.26 रुपये प्रति यूनिट की कमी आई जिससे अकेले बिजली खरीद मद में लगभग 3100 करोड़ रुपये की बचत हुई।
सपा राज में एमओयू आधार पर पीपीए बिजली की वर्तमान नेट दर (रु. प्रति यूनिट)
रोजा परियोजना 1200 मेगावाट 5.28
बजाज एनर्जी 450 मेगावाट 7.93
ललितपुर परियोजना 6.82
योगी सरकार में किए गए पीपीए
सिंगरौली स्टेज-॥ । ( 1320 मेगावाट ) 2.98
न्यू नबीनगर ( 209 मेगावाट) 3.46
राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सभी परियोजनाओं में सुधार की कार्ययोजना पर काम शुरू हुआ। इससे वर्षवार औसत उत्पादन 4000 मेगावाट से बढ़कर 4400 मेगावाट हो गया। इसके अलावा बिजली की उत्पादन लागत 4.09 रुपये प्रति यूनिट से घटकर 3.47 रुपये तथा बिजली खरीद की औसत लागत 2016-17 में 4.12 रुपये प्रति यूनिट के मुकाबले 2017-18 में घटकर 3.86 रुपये प्रति यूनिट आ गई।
वहीं, 2016-17 में 1,06,061 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई थी, जबकि 2017-18 में 1,19,051 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई। 12990 मिलियन यूनिट अधिक बिजली खरीद के बावजूद खरीद लागत में 0.26 रुपये प्रति यूनिट की कमी आई जिससे अकेले बिजली खरीद मद में लगभग 3100 करोड़ रुपये की बचत हुई।