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पिछले 10 महीने में बीमारू राज्यों की सूची से बाहर हुआ यूपी, देश-विदेश से आएगा निवेश: योगी आदित्यनाथ

Mon, 19 Feb 2018 09:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 19 Feb 2018 09:38 AM IST
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yogi adityanath talks about investors summit in uttar pradesh.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

यूपी पर वर्षों से लगा अभिशाप समाप्त हो गया है। सरकार के बीते 10 माह के प्रयासों से यूपी बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आ गया है। निवेश फ्रेंडली वातावरण बना है, उद्यमियों में विश्वास का माहौल है।’ यह कहना है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। लखनऊ में 21-22 फरवरी को होने वाली इन्वेस्टर्स समिट को लेकर खासे उत्साहित सीएम योगी का कहना है कि इस समिट के बाद देश-विदेश के बड़े औद्योगिक समूह प्रदेश में निवेश के लिए आगे आएंगे। जो भी एमओयू होंगे, उनका लगातार फॉलोअप किया जाएगा। निवेशकर्ताओं के साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अफसरों को लगाकर उन्हें सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। सभी क्लीयरेंस सिंगल विंडो से दी जाएंगी। इसकी निगरानी खुद मुख्यमंत्री कार्यालय करेगा।  योगी ने इन्वेस्टर्स समिट को लेकर राजेंद्र सिंह महेंद्र तिवारी से विस्तार से बात की।

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सवाल- यूपी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर इन्वेस्टर्स समिट हो रही है? आपको क्या उम्मीदें हैं?

जवाब-
खाद्यान्न, गन्ना, दुग्ध उत्पादन और जल संसाधन में यूपी नंबर-वन है। यहां सबसे बड़ा मार्केट है। रोड व एयर कनेक्टिविटी सबसे बेहतर है। इसके बावजूद यूपी बीमारू राज्य की श्रेणी में था। सरकार के प्रयासों से 10-12 सालों में बनी इस छवि से प्रदेश अब मुक्त हो गया है। हमने कानून-व्यवस्था को लेकर बनी धारणा बदल दी। अब हर उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए उत्सुक है।
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सवाल- निवेश के लिए किन सेक्टरों पर ज्यादा फोकस है?

जवाब-
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने 16 पॉलिसी बनाई हैं। इनमें औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रमोशन नीति, हैंडलूम, पावरलूम, सिल्क टेक्सटाइल गारमेंटिंग पॉलिसी, आईटी एवं स्टार्ट-अप पॉलिसी, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी, फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी, सिविल एविएशन पॉलिसी, टूरिज्म पॉलिसी, सोलर, एनर्जी पॉलिसी और एमएसएमई एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पालिसी मुख्य हैं। नई नीतियों से सभी सेक्टरों को कवर किया गया है। हम निवेशकों को सभी सुविधाएं देंगे।

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विदेशी निवेशकों ने भी जताई निवेश में दिलचस्पी

yogi adityanath talks about investors summit in uttar pradesh.

अगले साल होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट
सीएम ने कहा कि सभी एमओयू को निवेश का अमली जामा पहनाने के साथ ही हम अगले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट करने जा रहे हैं। अमेरिका, इग्लैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, जापान, कोरिया जैसे देशों ने प्रदेश में निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। नीदरलैंड ने लखनऊ में सब काउंसलेट खोला है। वह समिट का कंट्री पार्टनर है। हमसे छह देशों के एंबेसडर या हाईकमिश्नर के डेलीगेशन मिल चुके है। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति व पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ दोनों दिन समिट में रहेंगे। माॅरीशस, जापान, कोरिया और बेल्जियम भी कंट्री पार्टनर रहेंगे।

सवाल- आपने उद्योगपतियों को यूपी आने के लिए कैसे संतुष्ट किया ?

जवाब-
सरकार के 10 महीनों के कार्यकाल में शुरुआती तीन माह क्रिटिकल थे। किसानों की कर्जमाफी करनी थी, तब कोई पैसा देने को तैयार नहीं था। वित्तीय संस्थाओं के सीईओ फोन नहीं उठाते थे। यूपी होने का मतलब मानो अभिशाप हो गया था। अविश्वास का माहौल था। हमने तय किया कि इस छवि को बदलना है। किसी से पैसा नहीं लेंगे, अपने संसाधनों से किसानों की कर्जमाफी करेंगे, कोई नया टैक्स नहीं लगाएंगे। हम इसमें सफल रहे। खजाना खाली था तो भी हमने 100 दिन में सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्णय लिया। हाईकोर्ट से गिट्टी, मोरंग, बालू की बंदिशों के बावजूद 1.21 लाख किमी में से 85 हजार किमी सड़कें गडढ़ामुक्त हुईं। सभी जिलों को बिजली देनी शुरू की। तीन साल से गरीबों को आवास नहीं दिए जा रहे थे। हमने केंद्र से एकमुश्त फंड लेकर 8.87 लाख आवास दिए। महत्वपूर्ण बात यह रही कि 86 हजार अपात्र लोगों ने आवास का दावा वापस भी लिया।

सवाल- उद्योगपतियों में विश्वास बहाली के लिए और क्या किया?

जवाब-
19 मार्च को सरकार बनी और एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होनी थी। अफसरों ने कई मुश्किलें गिनाईं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संकल्प पत्र के वादे के मुताबिक किसानों से सीधे गेहूं खरीद की जाए। हमने उन राज्यों में मंत्री और अफसर भेजे, जहां किसानों से सीधे गेहूं खरीद होती है। एक अप्रैल को अफसरों की टीम लौटी। तब तक 5300 केंद्र स्थापित करा दिए गए। पहली बार हमने सीधे किसानों से 37 लाख टन गेहूं खरीदा। आरटीजीएस से उनके खातों में भुगतान भेजा गया। चीनी मिलें गन्ना मूल्य भुगतान नहीं कर रही थीं। हमने पिछले तीन साल का बकाया 25 हजार करोड़ रुपये किसानों को दिलाया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि एक भी चीनी मिल मालिक को जेल नहीं जाना पड़ा। शुरुआती दौर में एक-दो मामलों को छोड़कर एफआईआर भी दर्ज नहीं करानी पड़ी। चीनी मिल मालिक भी निवेशक हैं। पहले उनके शीरे के आवेदन लंबे समय तक लंबित रहते थे। हमने तुरंत निस्तारण कराया। इससे विश्वास का माहौल बना। उद्योगपतियों को लगा कि उनकी सुनवाई हो रही है।

पॉजीटिव माहौल बनाने के लिए और कई कदम उठाए

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देश के अधिकतर उद्योगपति या उनके प्रतिनिधि और 15-16 देशों के दूतावासों के अधिकारी मुझसे मिले। मैंने उनसे कहा कि इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली माहौल देंगे। हमने कानून-व्यवस्था को लेकर बनी धारणा को बदल दिया। उनके अपने इनपुट्स भी रहे होंगे। पॉजीटिव माहौल का यह असर रहा कि जो उद्योगपति पहले यूपी आने से बचते थे, वे अब निवेश के लिए आ रहे हैं।

सवाल- बीमार उद्योगों को पुनजीर्वित करने की भी कोई योजना है?

जवाब-
प्रदेश में ढाई लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल बढ़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए चीनी उद्योग में निजी, सहकारी और निगम की बंद व वर्तमान चीनी मिलों की क्षमता विस्तार और नई यूनिट के साथ ही को-जनरेशन, डिस्टलरी और इथेनॉल प्लांट लगा रहे हैं। बीमार इकाइयों को फिर से चालू करने की योजना है।

सवाल- तो माना जाए कि अब यूपी बीमारू राज्य नहीं रहेगा?

जवाब-
हमारे पास सब कुछ है। अब यूपी बीमारू राज्य नहीं रहा। इन्वेस्टर्स समिटि से पहले हमने उद्यमियों से संवाद किया। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू, हैदराबाद में रोड शो किए। अब इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से सरकार के अभियान को व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा। इससे रोजगार का सृजन होगा, प्रदेश का विकास होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आशीर्वाद और केंद्र सरकार के सहयोग से आने वाले वर्षों में यूपी देश का समृद्धतम राज्य बनेगा।

... तो टेक्सटाइल में भारत से पीछे होंगे बांग्लादेश, वियतनाम

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योगी आदित्यनाथ (file foto) - फोटो : amar ujala

हमने लचीली टेक्सटाइल पॉलिसी बनाई है। इससे महिलाओं, नौजवानों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा। पॉलिसी में सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। हर यूनिट को प्रति श्रमिक 3200 रुपये सब्सिडी दी जाएगी। शर्त रहेगी कि यूनिट श्रमिक का पीएफ जमा कराए और अपना रजिस्ट्रेशन कराए। प्रदेश में 60 हजार ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिलाओं के स्वयंसहायता समूह बनाए जाएंगे। उनसे सिलाई कढ़ाई, बुनाई कराई जाएगी। सोचिये, प्रदेश में हम 1.54 करोड़ बच्चों को दो-दो यूनिफाॅर्म और एक-एक स्वेटर दे रहे हैं। इसमें स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाए तो क्या स्थिति होगी। टेक्सटाइल के क्षेत्र में तो बांग्लादेश, वियतनाम, एशिया और यूरोप भी भारत से पीछे रह जाएंगे।

ओडी-ओपी से 20 लाख रोजगार मिलेंगे
वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडी-ओपी) योजना से तीन साल में 20 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रदेश से पलायन रुकेगा। राज्य सरकार हर जिले के परंपरागत उद्योग को बढ़ावा देगी। इनसे कम पूंजी में ज्यादा रोजगार पैदा किए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड अप योजना और कौशल विकास से जोड़कर परंपरागत उद्योगों का विकास किया जा सकता है। ओडीओपी और स्टार्ट अप के  लिए बजट में ढाई-ढाई सौ करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

पहली बार फसलों के अवशेष से इथेनॉल बनाने के चार प्लांट लगेंगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में पहली बार फसलों के अवशेष से इथेनॉल बनाने के लिए यूपी में प्लांट लगाने जा रहे हैं। कूड़ा-कचरा और फसलों के अवशेष का निस्तारण बड़ी समस्या है। किसान इसे जलाते हैं जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हम प्रदेश ही नहीं, संभवतया देश में पहली बार सेकंड जनरेशन इथेनॉल प्लांट लगाने जा रहे हैं। इनमें कूड़ा, कचरा, खेतों में बची हुई पुआल व फसलों के अन्य अवशेष से इथेनॉल बनाया जाएगा। इससे किसानों को फसलों के अवशेष से 500 से 550 रुपये क्विंटल अतिरिक्त आय होगी। इसके लिए एमओयू हो रहे हैं। प्रदेश के सभी क्षेत्रों पूर्वी, पश्चिमी, मध्य यूपी व बुंदेलखंड में एक-एक बड़ी यूनिट लगेगी। प्रत्येक यूनिट पर 800 से 1200 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

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