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भ्रष्टाचार पर और सख्त हुए योगी, बोले- 60 दिन में निपटाएं 20 साल से लटके 400 मामले

Wed, 01 Aug 2018 01:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 01 Aug 2018 01:02 AM IST
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yogi adityanath orders on corruption issue.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अभियोजन स्वीकृति के लिए पिछले 20 साल से लटके लगभग 400 मामलों को 60 दिनों में निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई हो, ताकि यह दूसरों के लिए एक नजीर बने। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंगलवार को प्रदेश की सभी जांच एजेंसियों की समीक्षा के दौरान दिए।

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प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के सामने ऐसे करीब 400 लोगों की डिटेल रखी गई जिनके मामले लंबित हैं। इसमें सीबीसीआईडी, विजलेंस, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, आर्थिक अपराध शाखा और एसआईटी के मामले शामिल हैं। इसमें कई आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारियों के साथ-साथ कई दलों के नेता भी शामिल हैं।
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इसके लिए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें सभी जांच एजेंसियों के विभागाध्यक्ष सदस्य होंगे। टास्क फोर्स प्रमुख सचिव को भी लंबित मामलों में निर्देश दे सकती है। साथ ही किसी जांच में तेजी लाने और कार्रवाई करने के लिए भी एजेंसी को टास्कफोर्स निर्देशित कर सकती है।
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20-20 साल से लंबित हैं मामले
सूत्रों का कहना है विजलेंस और आर्थिक अपराध शाखा के कई मामले 20-20 साल से स्वीकृति के इंतजार में हैं। कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं पर, उनकी जांच लंबित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों को तेजी से निपटाएं और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

इस साल पकड़े गए हैं रिश्वतखोरी के 46 मामले

पुलिस उपाधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार या इनसे ऊपर की रैंक के अधिकारियों के खिलाफ आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच विजलेंस करती है, जबकि बाकी मामलों में भ्रष्टाचार निवारण संगठन कार्रवाई करता है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने इस साल अब तक 46 मामले रिश्वत खोरी के पकड़े हैं, इनमें पांच पुलिस से संबंधित हैं। 20 मामले अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं।

वहीं, सीबीसीआईडी के लंबित 39 केस में से 21 की अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। सबसे अधिक मामले विजलेंस के हैं, जिनकी अभियोजन स्वीकृति शासन में लंबित है। मुख्यमंत्री ने इन सभी मामलों में वरीयता के आधार पर अभियोजन स्वीकृति देने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी ओम प्रकाश सिंह, डीजी सीबीसीआईडी वीरेंद्र कुमार, डीजी विजलेंस हितेश चंद्र अवस्थी, डीजी ईओडब्ल्यू आरपी सिंह और डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन विश्वजीत महापात्रा समेत कई अधिकारी शामिल थे।

पटनायक कमेटी की लागू हो सिफारिशें

वहीं सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठक के दौरान पटनायक कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र हुआ। कहा गया कि मानव संसाधन से लेकर ट्रेनिंग और अन्य संसाधन मुहैया कराने के साथ-साथ अभियोजन स्वीकृति के लिए समयावधि का निर्धारण की सिफारिश पटनायक कमेटी ने की है। यह सिफारिशें लागू हुई तो और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
 
प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी कानून व्यवस्था पर आज कसेंगे अधिकारियों के पेंच
बुधवार को प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और डीजीपी ओम प्रकाश सिंह कानून व्यवस्था पर जिलों में तैनात अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। हाल के दिनों में हुई घटनाओं को लेकर इस वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिलों में तैनात अधिकारियों के पेंच कसे जाएंगे। हाल के दिनों में प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी और राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में जघन्य अपराध की घटनाएं हुई हैं।

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